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Video Section / 27 Feb 2022

इंडिजिनस स्टील्थ फाइटर - समसामयिकी लेख


इंडिजिनस स्टील्थ फाइटर - समसामयिकी लेख

की वर्ड्स :- एएमसीए, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एडीए, डीआरडीओ, एचएएल, स्टील्थ फाइटर, गतिशीलता।

चर्चा में क्यों?

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, भारत तथा फ़्रांस अगले कुछ माह में पांचवीं पीढ़ी के 125KN इंजन के स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के संयुक्त विकास हेतु समझौता कर सकते हैं।

उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान क्या है?

  • उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने का एक भारतीय कार्यक्रम है। इसमें छठी पीढ़ी की कुछ प्रौद्योगिकियां भी सम्मिलित की जाएंगी।
  • विमान का डिजाइन, वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) द्वारा किया जाता है। यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत गठित संस्थान है।
  • इसे डीआरडीओ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), और फ्रांसीसी इंजन निर्माता सफरान के मध्य सार्वजनिक-निजी मॉडल पर आधारित संयुक्त उद्यम द्वारा निर्मित किया जायेगा।
  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2028 तक विमान का उत्पादन करना है। विमान का संभावित लागत लगभग 15000 करोड़ रूपये आने की सम्भावना है।
  • एएमसीए सिंगल-सीट, ट्विन-इंजन, स्टील्थ ऑल-वेदर स्विंग-रोल लड़ाकू विमान होगा। एएमसीए के दो वेरिएंट चरणबद्ध प्रोडक्शन मॉडल में तैयार किए जाएंगे। एएमसीए मार्क 1 पांचवीं पीढ़ी की तकनीकों से लैस होगा तथा मार्क 2 में छठी पीढ़ी की प्रौद्योगिकी का भी प्रयोग किया जायेगा।
  • एएमसीए का प्रारंभिक डिजाइन 2009 में आरम्भ किया गया था। इसे इंटरनल वेपन वे तथा डायवर्टरलेस सुपरसोनिक इंटेक के एक जुड़वां इंजन वाले स्टील्थ विमान के रूप में परिकल्पित किया गया है। अब इसकी डिजाइन तैयार हो चुकी है तथा यह विमान विनिर्माण प्रक्रिया की तरफ बढ़ा जा चुका है। यह 25 टन का विमान होगा जिसमें 1,500 किलोग्राम का आंतरिक पेलोड, 6,500 किलोग्राम आंतरिक ईंधन तथा 5,500 किलोग्राम बाह्य पेलोड होगा।
  • इस विमान के कॉन्फ़िगरेशन को फ्रीज कर दिया गया है। प्रारंभिक सेवा गुणवत्ता आवश्यकताओं (PSQR) को अंतिम रूप देकर प्रारंभिक डिजाइन समीक्षा पूर्ण कर ली गई है। इस वर्ष के अंत तक इस विमान का क्रिटिकल डिज़ाइन रिव्यू (सीडीआर) होने की सम्भावना है। 2025 में इसके प्रथम उड़ान (ट्रायल) की योजना बनाई गई है।
  • एसीएमए में स्टील्थ और नॉन-स्टील्थ कॉन्फ़िगरेशन होंगे, इसके साथ ही इसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा। मौजूदा GE414 इंजन के साथ एसीएमए एमके-1 का निर्माण किया जायेगा इसके उपरान्त एक उन्नत, अधिक शक्तिशाली इंजन के साथ एसीएमए एमके- 2 को संयुक्त रूप से विकसित करने की योजना है।
  • इसके साथ ही इस परियोजना में नौसेना के वायुयान वाहकों से उड़ान भरने के लिए दो इंजन वाले डेक-आधारित लड़ाकू जेट के विकास पर भी बात हो रही है। डॉ. देवधारे ने कहा कि इन दोनों ही विमानों की प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों में समानता है।
  • एसीएमए का उद्देश्य वायवीय श्रेष्ठता, जमीनी हमले, शत्रु वायु रक्षा (SEAD) के दमन तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) मिशन सहित कई मिशनों को पूरा करना है। यह विमान सुखोई Su-30MKI का बेहतर प्रतिस्थापन होगा।
  • एएमसीए डिजाइन को निम्न रडार क्रॉस सेक्शन और सुपरक्रूज क्षमता के लिए अनुकूलित किया गया है।

स्टील्थ टेक्नोलॉजी एयरक्राफ्ट विमान क्या है?

  • स्टील्थ एयरक्राफ्ट को विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि इस विमान का पता न लगाया जा सके। इसके डिजाइनिंग में रडार, इन्फ्रारेड, दृश्य प्रकाश, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) स्पेक्ट्रम, और ऑडियो के प्रतिबिंब/उत्सर्जन को कम किया जाता है जिससे ये शत्रु के रडार तंत्र के द्वारा चिह्नित न किये जा सके।
  • यद्यपि ऐसा संभव नही है कि किसी विमान को रडार की रेंज से बचाया जा सके परन्तु स्टील्थ एयरक्राफ्ट में तकनीकी के प्रभावी प्रयोग से विमान का पता लगाने या ट्रैक करने के कार्य को कठिन बना दिया जाता है।
  • इस विमान में पैसिव लो ऑब्जर्बेबल [passive low observable (LO)] तकनीकों को जोड़ा जाता है। इसके साथ ही इनमे सक्रिय उत्सर्जक जैसे कम-संभाव्यता-अवरोधन रडार, रेडियो और लेजर डिज़ाइनर भी संलग्न किए जाते हैं।
  • इस विमान के सक्रिय उपायों में ऐसे तंत्र सम्मिलित हैं जिनके द्वारा एक तरफ राडार क्रॉस सेक्शन को कम कर विमान को रडार के रेंज से बचाया जा सके।

स्टील्थ टेक्नोलॉजी के लाभ :-

  • पारंपरिक वाहनों के स्थान पर स्टील्थ वाहनों के उपयोग से युद्ध क्षेत्र की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही साथ इसमें दीर्घकालिक वित्तीय बचत भी प्राप्त होगी।
  • एक स्टील्थ लड़ाकू विमान द्वारा किये गए आक्रमण की स्थिति में शत्रु प्रतिकार करने की स्थिति में नहीं रहता क्योंकि शत्रु इन स्टील्थ लड़ाकू विमानों का पता लगाने में असमर्थ रहते हैं।
  • स्टील्थ तकनीकी के विमानों में जान-माल का कम नुकसान होता है।

स्टील्थ प्रौद्योगिकी से हानि :-

  • स्टील्थ प्रौद्योगिकी से निर्मित विमान, पारम्परिक विमानों की तुलना में कम गतिशील होते हैं।
  • स्टील्थ एयरक्राफ्ट, पारंपरिक एयरक्राफ्ट की तुलना में कम पेलोड या वहन करने की क्षमता होती है।
  • एक स्टील्थ विमान की लागत बहुत अधिक होती है । B-2 ($2 बिलियन) और F-22 ($100 मिलियन) जैसे लड़ाकू विमान दुनिया के सबसे महंगे स्टील्थ विमान हैं।

आगे की राह :-

  • भारत ने विदेशी देश के निर्यात पर निर्भरता को कम करते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' तथा 'मेक इन इंडिया' मिशन को बढ़ावा देते हुए, पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान के स्वदेशी विनिर्माण का निर्णय लिया है।
  • फ्रांस के साथ समझौते के उपरान्त, विमान के विकास के साथ-साथ इंजन को समय-सीमा को पूर्ण करने की दिशा में भी प्रगति करनी होगी।
  • विमान के निर्माण और उत्पादन की योजना एक विशेष प्रयोजन वाहन के माध्यम से बनाई जानी चाहिए, इसमें निजी उद्यम को भी स्थान देना चाहिए।
  • एएमसीए पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ युद्धक विमानों के साथ देशों के विशिष्ट क्लब में भारत का प्रवेश सुनिश्चित करेगा। इस श्रेणी में अब तक, यूएस (F-35 और F-22 Raptor), रूस (Su-57 Felon) और चीन (J-20) ही थे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान संचालित करने वाला चौथा देश बन सकता है।

स्रोत :- The Hindu

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3:
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; स्वदेशी रूप से प्रौद्योगिकी का विकास।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • चर्चा करें कि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' मिशन भारत की रक्षा क्षमताओं को कैसे मजबूत बना सकते हैं। समालोचनात्मक विश्लेषण करें।