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Blog / 17 Aug 2026

यार्ड 3037 ‘श्रुति’: भारत का अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए निर्मित अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (NGOPV) यार्ड 3037, जिसका नाम श्रुतिरखा गया है, को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में जलावतरण किया गया। यह जलावतरण समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण को सुदृढ़ करने के भारत के प्रयासों की दिशा में एक और कदम है।

श्रुतिके बारे में:

      • श्रुतिचार ऐसे पोतों के निर्माण के कार्यक्रम के अंतर्गत GRSE द्वारा जलावतरण किया गया दूसरा अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत है। व्यापक अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत कार्यक्रम के अंतर्गत 11 पोतों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से सात का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) और चार का निर्माण GRSE द्वारा किया जा रहा है।
      • इन पोतों को बहुउद्देशीय मंच के रूप में तैयार किया गया है, जो समुद्री सुरक्षा तथा सहायता संबंधी दोनों प्रकार के अभियानों को संचालित करने में सक्षम हैं।

Yard 3037 ‘Shruti’

प्रमुख विशेषताएँ:

अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत लगभग 113 मीटर लंबे हैं, इनका विस्थापन लगभग 3,000 टन है और ये लगभग 23 नॉट की अधिकतम निर्धारित गति प्राप्त कर सकते हैं। इनकी समुद्र में टिके रहने की क्षमता लगभग 14 नॉट की गति से 8,500 समुद्री मील है, जिससे ये लंबे समय तक समुद्र में अभियान संचालित कर सकते हैं।

संचालन संबंधी महत्त्व:

श्रुतिनौसेना की समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती-रोधी अभियान, तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव, अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा तथा अवैध तस्करी-रोधी अभियानों को संचालित करने की क्षमता को मजबूत करेगा। ऐसे पोत नियमित समुद्री सुरक्षा संबंधी दायित्वों को पूरा कर सकते हैं, जिससे बड़े अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को उच्च स्तरीय युद्ध अभियानों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

आत्मनिर्भर भारत:

      • अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। 11 अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों के लिए ₹9,781 करोड़ का अनुबंध मार्च 2023 में खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित)’ [Buy (Indian-IDDM)] श्रेणी के अंतर्गत किया गया था। इसमें स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है।
      • इस कार्यक्रम से पर्याप्त रोजगार सृजित होने तथा भारतीय रक्षा विनिर्माताओं, पोत निर्माण कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अवसर उत्पन्न होने की भी अपेक्षा है।

रणनीतिक महत्त्व:

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के बढ़ते समुद्री हितों के लिए निरंतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता आवश्यक है। अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत समुद्री मार्गों, अपतटीय बुनियादी ढाँचे और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में सहायता कर सकते हैं तथा समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और घुसपैठ जैसे गैर-पारंपरिक खतरों से निपट सकते हैं।

निष्कर्ष:

यार्ड 3037 ‘श्रुति का जलावतरण भारत की बढ़ती स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता और समुद्री सुरक्षा पर उसके बढ़ते ध्यान को दर्शाता है। अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत कार्यक्रम में नौसेना का आधुनिकीकरण, तटीय निगरानी, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और औद्योगिक विकास का समन्वय किया गया है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में एक सक्षम समुद्री शक्ति के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

 

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