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Blog / 08 Oct 2026

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026: वन्यजीवों की संख्या में गिरावट

संदर्भ:

हाल ही में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) ने अपनी नवीनतम लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, 1970 से 2022 के बीच निगरानी की गई वन्यजीव आबादी के औसत आकार में 73% की गिरावट आई है। इस आकलन में 5,790 कशेरुकी प्रजातियों से संबंधित 35,803 आबादी के रुझानों का विश्लेषण किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष:

विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों में गिरावट की दर काफी अलग-अलग है:

      • मीठे पानी की आबादी: 85% गिरावट
      • स्थलीय आबादी: 69% गिरावट
      • समुद्री आबादी: नवीनतम आकलन में लगभग 59% गिरावट।

रिपोर्ट में आवास का नुकसान और क्षरण सबसे अधिक रिपोर्ट किया गया खतरा है। इसके बाद अत्यधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ और बीमारियाँ प्रमुख खतरे हैं। ये दबाव खाद्य, ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों से जुड़ी व्यापक समस्याओं से संबंधित हैं।

मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र सबसे अधिक संवेदनशील क्यों हैं?

      • मीठे पानी की जैव विविधता को एक साथ कई दबावों का सामना करना पड़ रहा है:
        • बाँधों और अवसंरचना के माध्यम से नदियों का विखंडन
        • जल का अत्यधिक दोहन
        • प्रदूषण
        • आर्द्रभूमियों का क्षरण
        • असंधारणीय मत्स्यन
        • जलवायु परिवर्तन
      • 85% की गिरावट मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्रों को संरक्षण की एक प्रमुख प्राथमिकता बनाती है।

भारत का संरक्षण अनुभव:

      • वैश्विक गिरावट के बावजूद, भारत यह दर्शाता है कि लक्षित संरक्षण प्रयास कई प्रजातियों की आबादी में पुनरुद्धार ला सकते हैं। WWF के आकलन पर हालिया रिपोर्टिंग में बाघ, एक सींग वाले गैंडे, एशियाई सिंह और गंगा नदी डॉल्फिन की आबादी में वृद्धि को रेखांकित किया गया है।
      • भारत का अनुभव निम्नलिखित के महत्व को दर्शाता है:
        • संरक्षित क्षेत्र
        • प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण कार्यक्रम
        • आवास का पुनर्स्थापन
        • अवैध शिकार-रोधी उपाय
        • सामुदायिक भागीदारी
        • वैज्ञानिक आबादी निगरानी

जैव विविधता के लिए प्रमुख खतरे:

      • आवास का नुकसान: कृषि विस्तार, वनों की कटाई, खनन और अवसंरचना विकास।
      • अत्यधिक दोहन: असंधारणीय शिकार, मछली पकड़ना और जैविक संसाधनों का दोहन।
      • जलवायु परिवर्तन: तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव और चरम मौसम की घटनाएँ।
      • प्रदूषण: रसायन, प्लास्टिक, सीवेज और कृषि प्रदूषक।
      • आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ: देशज प्रजातियों को प्रभावित करने वाली प्रतिस्पर्धा और परभक्षण।

वैश्विक महत्व:

      • यह रिपोर्ट कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (GBF) को लागू करने की तात्कालिकता को रेखांकित करती है, जिसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकना और उलटना तथा 2050 तक प्रकृति-सकारात्मक विश्व प्राप्त करना है।
      • ये निष्कर्ष जैव विविधता पर अभिसमय (CBD), सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और भारत की जैव विविधता संबंधी प्रतिबद्धताओं के लिए भी प्रासंगिक हैं।

आगे की राह:

      • क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों और आर्द्रभूमियों का पुनर्स्थापन करें।
      • संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क और वन्यजीव गलियारों को मजबूत करें।
      • टिकाऊ कृषि, मत्स्यन और वानिकी को बढ़ावा दें।
      • प्रदूषण और आक्रामक प्रजातियों को कम करें।
      • अवसंरचना नियोजन में जैव विविधता को शामिल करें।
      • समुदाय-आधारित संरक्षण को मजबूत करें।
      • आर्थिक प्रणालियों को पारिस्थितिक स्थिरता के अनुरूप बनाएं।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बारे में:

      • वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 29 अप्रैल 1961 को हुई थी और इसका मुख्यालय ग्लैंड, स्विट्जरलैंड में है। मूल रूप से इसका नाम वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड था। वर्ष 1986 में इसने वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर नाम अपनाया, जबकि WWF संक्षिप्त नाम को बरकरार रखा।
      • इसका मिशन प्रकृति का संरक्षण करना और जैव विविधता के लिए खतरों का समाधान करना है। इसके प्रमुख कार्य क्षेत्रों में जलवायु, खाद्य, वन, मीठा पानी, महासागर और वन्यजीव शामिल हैं। इसका प्रतिष्ठित लोगो विशाल पांडा है।
      • लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित की जाती है और जैव विविधता के रुझानों का अध्ययन करने के लिए लिविंग प्लैनेट इंडेक्स का उपयोग करती है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की पहल:

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) से जुड़ी महत्वपूर्ण पहलों में शामिल हैं:

        • अर्थ आवर (Earth Hour)- पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए 2007 में सिडनी में शुरू किया गया।
        • ऋण-के-बदले-प्रकृति स्वैप (Debt-for-Nature Swaps)- ऐसे तंत्र जो ऋण राहत को संरक्षण निवेश से जोड़ते हैं।
        • WWF ने मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल (MSC) की स्थापना में भी सहायता की।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ - इंडिया-

        • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ – इंडिया की स्थापना 1969 में एक धर्मार्थ सार्वजनिक न्यास के रूप में की गई थी और इसका सचिवालय नई दिल्ली में है। इसकी संरक्षण प्राथमिकताओं में बाघ, हाथी, गैंडा, लाल पांडा, हिम तेंदुआ और नीलगिरि तहर जैसी प्रजातियाँ तथा तराई आर्क लैंडस्केप जैसे परिदृश्य शामिल हैं।

निष्कर्ष:

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि जैव विविधता का नुकसान तेजी से एक पारिस्थितिकी तंत्र-स्तरीय संकट बनता जा रहा है। इसलिए संरक्षण को केवल व्यक्तिगत प्रजातियों की सुरक्षा तक सीमित रखने के बजाय आवास के पुनर्स्थापन, टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों और प्रकृति के नुकसान के मूल कारणों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

 

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