संदर्भ:
हाल ही में प्रकाशित विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत विश्व का छठा सर्वाधिक प्रदूषित देश है, जबकि इसके PM2.5 स्तर तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। यह स्थिति एक मिश्रित प्रवृत्ति को दर्शाती है जहाँ एक ओर वायु गुणवत्ता संकेतकों में सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण का स्तर अभी भी काफी अधिक बना हुआ है।
रिपोर्ट के विषय में:
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- यह रिपोर्ट प्रतिवर्ष आईक्यू एयर (IQAir) द्वारा जारी की जाती है, जो स्विट्ज़रलैंड स्थित वायु शोधन तकनीक कंपनी है।
- यह रिपोर्ट PM2.5 कणों के आधार पर वैश्विक वायु गुणवत्ता का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है।
- वर्ष 2025 के संस्करण में अधिक देशों को शामिल किया गया, जिनमें पहले प्रदूषण की निगरानी नहीं की जाती थी।
- इसका दायरा 2023 में 134 देशों (7,812 शहरों) से बढ़कर 2025 में 143 देशों (9,446 शहरों) तक पहुंच गया है, जिससे यह वायु प्रदूषण पर सबसे व्यापक वैश्विक डेटासेट में से एक बन गई है।
- यह रिपोर्ट प्रतिवर्ष आईक्यू एयर (IQAir) द्वारा जारी की जाती है, जो स्विट्ज़रलैंड स्थित वायु शोधन तकनीक कंपनी है।
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मुख्य निष्कर्ष:
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- भारत की वायु गुणवत्ता प्रवृत्ति
- वर्ष 2025 में भारत का जनसंख्या-भारित औसत PM2.5 स्तर 48.9 µg/m³ रहा। यह 2024 (50.6 µg/m³) की तुलना में 3% तथा 2023 (54.4 µg/m³) की तुलना में 10% कम है। हालांकि सुधार हुआ है, फिर भी यह स्तर सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है।
- वर्ष 2025 में भारत का जनसंख्या-भारित औसत PM2.5 स्तर 48.9 µg/m³ रहा। यह 2024 (50.6 µg/m³) की तुलना में 3% तथा 2023 (54.4 µg/m³) की तुलना में 10% कम है। हालांकि सुधार हुआ है, फिर भी यह स्तर सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है।
- वैश्विक रैंकिंग में स्थिति:
- वर्ष 2025 में भारत छठे स्थान पर है जबकि शीर्ष 3 प्रदूषित देश क्रमशः पाकिस्तान (67.3 µg/m³), बांग्लादेश (66.1 µg/m³) और ताजिकिस्तान (57.3 µg/m³) है।
- भारत की रैंकिंग 2023 में तीसरी, 2024 में पाँचवीं और 2025 में छठी है।
- शहरी प्रदूषण की स्थिति:
- नई दिल्ली में वर्ष 2025 में PM2.5 स्तर 82.2 µg/m³ रहा, जो तीन वर्षों का न्यूनतम है तथा 2024 से 8% कम है। फिर भी यह विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है।
- लोऩी (गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) वर्ष 2025 में भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा।
- पूर्व के रुझान:
- 2023: बेगूसराय (बिहार) विश्व का सबसे प्रदूषित शहर
- 2024: बर्नीहाट (असम-मेघालय सीमा) शीर्ष पर
- 2023: बेगूसराय (बिहार) विश्व का सबसे प्रदूषित शहर
- नई दिल्ली में वर्ष 2025 में PM2.5 स्तर 82.2 µg/m³ रहा, जो तीन वर्षों का न्यूनतम है तथा 2024 से 8% कम है। फिर भी यह विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है।
- वैश्विक प्रदूषण में भारत की हिस्सेदारी:
- वर्ष 2024 में विश्व के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 74 भारत में थे, जो 2023 के 83 की तुलना में सुधार दर्शाता है।
- 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 17 मध्य एवं दक्षिण एशिया क्षेत्र में हैं, जिनमें अधिकांश भारत और पाकिस्तान में स्थित हैं।
- वर्ष 2024 में विश्व के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 74 भारत में थे, जो 2023 के 83 की तुलना में सुधार दर्शाता है।
- भारत की वायु गुणवत्ता प्रवृत्ति
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भारत की वायु प्रदूषण प्रबंधन व्यवस्था:
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- नीतिगत एवं निगरानी संबंधी चुनौतियाँ:
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मुख्य ध्यान PM10 पर केंद्रित रहा है, जबकि PM2.5 अधिक खतरनाक है।
- वाहनों और उद्योगों के उत्सर्जन मानकों का कमज़ोर क्रियान्वयन वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।
- कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों के लिए सल्फर उत्सर्जन मानकों में ढील भी प्रदूषण बढ़ाने का कारण हो सकती है।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मुख्य ध्यान PM10 पर केंद्रित रहा है, जबकि PM2.5 अधिक खतरनाक है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का मूल्यांकन:
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत:
- 64% धनराशि सड़क धूल नियंत्रण (जैसे पानी का छिड़काव, सफाई) पर खर्च की गई
- 15% बायोमास जलाने पर
- 13% वाहन उत्सर्जन पर
- मात्र 1% औद्योगिक प्रदूषण पर
- 64% धनराशि सड़क धूल नियंत्रण (जैसे पानी का छिड़काव, सफाई) पर खर्च की गई
- यह दर्शाता है कि नीति में धूल नियंत्रण पर अत्यधिक जोर है, जबकि प्रमुख प्रदूषण स्रोतों को अपेक्षाकृत कम प्राथमिकता दी गई है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत:
- नीतिगत एवं निगरानी संबंधी चुनौतियाँ:
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निष्कर्ष:
विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 भारत की वायु गुणवत्ता का एक संतुलित चित्र प्रस्तुत करती है। जहां एक ओर PM2.5 स्तर में सुधार के संकेत मिलते हैं, वहीं दूसरी ओर संरचनात्मक चुनौतियाँ, जैसे कमजोर क्रियान्वयन, असंतुलित नीतिगत प्राथमिकताएँ और शहरी प्रदूषण, अब भी बनी हुई हैं। भारत को दीर्घकालिक सुधार के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करना, प्रमुख प्रदूषण स्रोतों को प्राथमिकता देना और वैश्विक मानकों के अनुरूप नीतियाँ बनाने की आवश्यकता है।

