संदर्भ:
विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट, "महिलाएं, व्यवसाय और कानून 2026" के अनुसार, महिलाओं को समान आर्थिक अवसर प्रदान करने वाले कानून वैश्विक स्तर पर अपनी कुल क्षमता के केवल आधे (50%) ही कार्यान्वित हो पाते हैं। बेहतर विधायी ढांचे के अस्तित्व के बावजूद, प्रभावी प्रवर्तन और क्रियान्वयन के अभाव के कारण महिलाओं को कार्यस्थल पर निरंतर गंभीर संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह 'कानूनी प्रावधानों' और 'व्यावहारिक धरातल' के मध्य व्याप्त विशाल अंतराल न केवल वैश्विक आर्थिक विकास की गति को बाधित करता है, बल्कि समाज में लैंगिक असमानता के स्तर को भी बनाए रखता है, जो अंततः समावेशी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में एक बड़ी बाधा है।
महिलाएं, व्यवसाय और कानून (WBL) 2026 रिपोर्ट के बारे में:
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- यह रिपोर्ट 190 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करने वाला 11वां वार्षिक अध्ययन है। यह विश्लेषण करता है कि कानून और नीतियां महिलाओं के आर्थिक अवसरों को कैसे प्रभावित करती हैं।
- इस संस्करण में महिलाएं, व्यवसाय और कानून (WBL) 2.0 ढांचा पेश किया गया है, जो तीन स्तंभों का मूल्यांकन करता है:
- कानूनी ढांचा: समानता की गारंटी देने वाले कानून।
- सहायक ढांचा: नीतियां और सेवाएं जो कार्यान्वयन को सक्षम बनाती हैं।
- प्रवर्तन धारणाएं: वास्तविकता में कानून कितनी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।
- कानूनी ढांचा: समानता की गारंटी देने वाले कानून।
- यह रिपोर्ट 190 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करने वाला 11वां वार्षिक अध्ययन है। यह विश्लेषण करता है कि कानून और नीतियां महिलाओं के आर्थिक अवसरों को कैसे प्रभावित करती हैं।
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रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
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- रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की आर्थिक समानता का समर्थन करने वाले कानूनों के लिए देशों का औसत स्कोर 100 में से 67 है। जब इन कानूनों को लागू करने की बात आती है, तो स्कोर गिरकर 53 हो जाता है। साथ ही, इन अधिकारों को लागू करने के लिए आवश्यक प्रणालियों का स्कोर केवल 47 है।
- दुनिया भर में केवल 4% महिलाएं ऐसे देशों में रहती हैं जहां लगभग पूर्ण कानूनी समानता है। यदि मौजूदा सभी कानून पूरी तरह से लागू हो भी जाएं, तो भी महिलाओं के पास पुरुषों को उपलब्ध कानूनी अधिकारों का केवल दो-तिहाई हिस्सा ही होगा।
- रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की आर्थिक समानता का समर्थन करने वाले कानूनों के लिए देशों का औसत स्कोर 100 में से 67 है। जब इन कानूनों को लागू करने की बात आती है, तो स्कोर गिरकर 53 हो जाता है। साथ ही, इन अधिकारों को लागू करने के लिए आवश्यक प्रणालियों का स्कोर केवल 47 है।
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चिंता के मुख्य विषय:
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- हिंसा से सुरक्षा: सुरक्षा को सबसे बड़ी कमजोरी बताया गया है। कई देशों में घर, सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थल पर महिलाओं को हिंसा से बचाने वाले कड़े कानूनों की कमी है। जहाँ कानून हैं, वहाँ प्रवर्तन कमजोर है। सुरक्षा के बिना महिलाएं आर्थिक जीवन में पूरी तरह भाग नहीं ले सकतीं।
- ऋण और उद्यमिता तक पहुंच: हालांकि अधिकांश देशों में महिलाओं को कानूनी रूप से व्यवसाय शुरू करने की अनुमति है, लेकिन केवल आधी अर्थव्यवस्थाएं ऋण तक समान पहुंच सुनिश्चित करती हैं। ऋण लेने में महिलाओं को वित्तीय पक्षपात और बैंकिंग सहायता की कमी जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- बाल देखभाल सहायता: कम आय वाले देशों में चाइल्डकेयर सिस्टम लगभग अनुपस्थित हैं। आधे से भी कम देश इसके लिए वित्तीय या कर सहायता प्रदान करते हैं। इसके अभाव में कई महिलाएं नौकरी छोड़ने या अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने को मजबूर हैं।
- आर्थिक प्रभाव: रिपोर्ट चेतावनी देती है कि महिलाओं के आर्थिक अधिकारों का कमजोर प्रवर्तन वैश्विक विकास को रोक रहा है। अगले दशक में लगभग 1.2 बिलियन युवा कार्यबल में शामिल होंगे, जिनमें से आधी लड़कियां होंगी। यदि उन्हें समान अवसर नहीं मिले, तो देश अपनी उत्पादक आबादी का एक बड़ा हिस्सा खो देंगे।
- तात्कालिक प्रगति: चुनौतियों के बावजूद कुछ प्रगति हुई है। पिछले दो वर्षों में 68 देशों ने महिलाओं के आर्थिक अधिकारों में सुधार के लिए 113 कानूनी सुधार किए हैं। मिस्र को शीर्ष सुधारकों में से एक के रूप में पहचाना गया है।
- हिंसा से सुरक्षा: सुरक्षा को सबसे बड़ी कमजोरी बताया गया है। कई देशों में घर, सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थल पर महिलाओं को हिंसा से बचाने वाले कड़े कानूनों की कमी है। जहाँ कानून हैं, वहाँ प्रवर्तन कमजोर है। सुरक्षा के बिना महिलाएं आर्थिक जीवन में पूरी तरह भाग नहीं ले सकतीं।
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निष्कर्ष:
विश्व बैंक की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केवल कानून पारित करना पर्याप्त नहीं है। देशों को उचित प्रवर्तन सुनिश्चित करना होगा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का समर्थन करने के लिए मजबूत संस्थान बनाने होंगे। लैंगिक समानता न केवल एक सामाजिक लक्ष्य है, बल्कि सतत विकास के लिए एक आर्थिक आवश्यकता भी है।

