होम > Blog

Blog / 15 May 2026

निकोबार द्वीप समूह में वन्यजीव अभयारण्य

निकोबार द्वीप समूह में वन्यजीव अभयारण्य

संदर्भ:

हाल ही में निकोबारी जनजातीय परिषद (Nicobarese Tribal Council) ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिटिल निकोबार, मेंचल और मेरोए द्वीपों पर अधिसूचित तीन नए वन्यजीव अभयारण्यों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। परिषद का आरोप है कि केंद्र सरकार ने वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act- FRA), 2006 के अंतर्गत अनिवार्य परामर्श प्रक्रिया का पालन नहीं किया तथा इन द्वीपों पर समुदाय के पैतृक स्वामित्व, सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिक संबंधों की उपेक्षा की है।

वन्यजीव अभयारण्यों को लेकर विवाद:

      • इन अभयारण्यों को ₹92,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना (Great Nicobar Island Development Project) से जुड़े पर्यावरणीय शमन (Environmental Mitigation) उपायों के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था।
      • इस परियोजना में कंटेनर बंदरगाह, हवाई अड्डा और टाउनशिप के निर्माण जैसी आधारभूत संरचना परियोजनाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर विकास से होने वाली पारिस्थितिक क्षति की भरपाई करना है।

विवाद के केंद्र में स्थित द्वीप:

      • लिटिल निकोबार द्वीप (ओंग)

        • क्षेत्रफल एवं स्थिति: लगभग 140 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला यह द्वीप दक्षिणी निकोबार समूह का आबाद द्वीप है।
        • महत्त्व: यह जैव-विविधता से समृद्ध द्वीप है, जहाँ संकटग्रस्त प्रजातियाँ तथा निकोबारी समुदाय की बस्तियाँ स्थित हैं।
        • अभयारण्य प्रस्ताव: लेदरबैक कछुआ अभयारण्य (Leatherback Turtle Sanctuary) का प्रस्ताव पारंपरिक गांवों से आच्छादित क्षेत्र में है।
        • चिंता: इससे समुदाय की पैतृक एवं आवासीय भूमि तक पहुँच सीमित होने की आशंका है।
      • मेंचल द्वीप (पिंगायेयाक)

        • स्थिति: निर्जन द्वीप, जिसका उपयोग कभी-कभी मौसमी खेती और मत्स्यन के लिए किया जाता है।
        • सांस्कृतिक महत्त्व: इसे पवित्र द्वीप माना जाता है, जहाँ पूर्वजों की आत्माओं का निवास माना जाता है।
        • अभयारण्य प्रस्ताव: स्थानिक पक्षी संरक्षण हेतु मेगापोड अभयारण्य (Megapode Sanctuary) का प्रस्ताव।
        • चिंता: समुदाय इसे सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण भूमि से पूर्ण बहिष्करण के रूप में देखता है।
        • मेरोए द्वीप (पिरुई)
        • स्थिति: लगभग 0.52 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला छोटा निर्जन द्वीप।
        • उपयोग: नारियल संग्रहण और मत्स्यन के संसाधन क्षेत्र के रूप में उपयोग।
        • अभयारण्य प्रस्ताव: प्रवाल भित्तियों के संरक्षण हेतु कोरल अभयारण्य (Coral Sanctuary)
        • चिंता: यह समुदाय के पारंपरिक स्वामित्व और उपयोग अधिकारों की अनदेखी करता है।

निकोबारी समुदाय इस कदम का विरोध क्यों कर रहे है?

समुदाय का विरोध कानूनी, सांस्कृतिक और आजीविका संबंधी चिंताओं पर आधारित है:

      • FRA का उल्लंघन: अभयारण्य अधिसूचना से पहले ग्राम सभा से उचित परामर्श और सहमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
      • पवित्र भू-दृश्य: मेंचल और मेरोए को पूर्वजों की आत्माओं का निवास माना जाता है, इसलिए वहाँ पहुँच पर प्रतिबंध सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।
      • आजीविका पर निर्भरता: ये द्वीप नारियल एवं सुपारी के बागानों तथा आवास, औजारों और पारंपरिक शिल्प के लिए उपयोग होने वाले वन संसाधनों का आधार हैं।
      • सीमित अधिकारों पर चिंता: प्रशासन ने केवल धार्मिक शिकार (ritual hunting) की अनुमति दी है, जबकि समुदाय का कहना है कि उनके अधिकारों में निवास, कृषि और संसाधनों का उपयोग भी शामिल है।
      • पर्यटन का विरोध: प्रस्तावित ईको-टूरिज्म का विरोध करते हुए स्थानीय लोग जेट्टी, पेयजल आपूर्ति और दूरसंचार संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष:

निकोबार द्वीप समूह में वन्यजीव अभयारण्यों को लेकर उत्पन्न विवाद संरक्षण-आधारित विकास नीति और आदिवासी अधिकारों के बीच गहरे टकराव को दर्शाता है। एक ओर ये अभयारण्य ग्रेट निकोबार में विकास परियोजनाओं से प्रभावित नाजुक पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निकोबारी समुदाय इन्हें अपनी पैतृक भूमि, सांस्कृतिक पहचान और आजीविका सुरक्षा पर अतिक्रमण के रूप में देखता है। इस विवाद का समाधान पारिस्थितिक संरक्षण और वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्त कानूनी एवं आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने पर निर्भर करेगा।

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj