संदर्भ:
हाल ही में, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व की सुपखार रेंज में 17 हेक्टेयर के बाड़े में आठ जंगली जल भैंसों को छोड़ा। इन भैंसों को मध्य प्रदेश में इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए चलाए जा रहे चरणबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाया गया है। यह प्रजाति लगभग एक शताब्दी पहले मध्य प्रदेश के जंगलों से विलुप्त हो गई थी।
जंगली जल भैंस के बारे में:
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- जंगली जल भैंस (Bubalus arnee) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल निवासी एक बड़ी गोवंशीय प्रजाति है। इसे IUCN की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है।
- यह प्रजाति पर्याप्त जल संसाधनों वाले घास के मैदानों, आर्द्रभूमियों और वन क्षेत्रों में निवास करती है। यह अपने आवास के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश की मैकाल पर्वत शृंखला में स्थित है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1955 में हुई थी और इसे 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया था। असम में स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक महत्त्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है और इन भैंसों का स्रोत है।
- जंगली जल भैंस (Bubalus arnee) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल निवासी एक बड़ी गोवंशीय प्रजाति है। इसे IUCN की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है।
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स्थानांतरण और अनुकूलन:
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- चार भैंसों का पहला समूह, जिसमें तीन मादाएँ और एक नर शामिल था, 28 अप्रैल 2026 को कान्हा पहुँचा। चार भैंसों का दूसरा समूह, जिसमें समान लिंग संरचना थी, 9 मई 2026 को पहुँचा। वर्तमान समूह में छह मादाएँ और दो नर शामिल हैं।
- शुरुआत में, इन जानवरों को संगरोध (क्वारंटीन) और अनुकूलन के लिए एक हेक्टेयर के बाड़े में रखा गया था। इसके बाद उन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर दिया गया। संगरोध से विभिन्न पशु आबादियों के बीच संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। मानसून के मौसम के बाद इन जानवरों को धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने के लिए तैयार किए जाने की उम्मीद है।
- चार भैंसों का पहला समूह, जिसमें तीन मादाएँ और एक नर शामिल था, 28 अप्रैल 2026 को कान्हा पहुँचा। चार भैंसों का दूसरा समूह, जिसमें समान लिंग संरचना थी, 9 मई 2026 को पहुँचा। वर्तमान समूह में छह मादाएँ और दो नर शामिल हैं।
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पुनः प्रवर्तन कार्यक्रम:
मध्य प्रदेश का लक्ष्य तीन वर्षों में कान्हा क्षेत्र में 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करना है। असम ने चरणबद्ध तरीके से इन जानवरों की आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की है। वर्तमान में बाड़े में मौजूद आठ भैंसें इसी कार्यक्रम का हिस्सा हैं और उन्हें अभी तक खुले जंगल में नहीं छोड़ा गया है।
महत्त्व और चुनौतियाँ:
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- इस पहल का उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को पुनर्स्थापित करना, एक संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में सहायता करना और वन्यजीव प्रबंधन में अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करना है। हालाँकि, इसकी सफलता उपयुक्त आवास, पर्याप्त भोजन और पानी, आनुवंशिक विविधता, रोगों की रोकथाम तथा दीर्घकालिक निगरानी पर निर्भर करती है।
- संभावित चुनौतियों में मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का क्षरण और घरेलू भैंसों के साथ संकरण शामिल हैं। इस कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता के लिए वैज्ञानिक निगरानी और समुदाय की भागीदारी आवश्यक होगी।
- इस पहल का उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को पुनर्स्थापित करना, एक संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में सहायता करना और वन्यजीव प्रबंधन में अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करना है। हालाँकि, इसकी सफलता उपयुक्त आवास, पर्याप्त भोजन और पानी, आनुवंशिक विविधता, रोगों की रोकथाम तथा दीर्घकालिक निगरानी पर निर्भर करती है।
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निष्कर्ष:
कान्हा में जंगली जल भैंसों का पुनः प्रवर्तन मध्य प्रदेश में पारिस्थितिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसकी सफलता केवल जानवरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि उनके अस्तित्व, प्रजनन और प्राकृतिक आवास के अनुकूल होने को सुनिश्चित करने पर भी निर्भर करेगी।
