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Blog / 01 Jun 2026

भारत में गिद्ध संरक्षण

संदर्भ:

हाल ही में भारत के दो दशकों से चल रहे गिद्ध संरक्षण प्रयासों में बड़ी प्रगति देखी गई है। भारत में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई थी जिसका मुख्य कारण पशु चिकित्सा दवा डाइक्लोफेनैक (diclofenac) था।

संकट की पृष्ठभूमि:

1990 के दशक में भारत में गिद्धों की आबादी में 99% की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण पशु चिकित्सा दवा डाइक्लोफेनैक (diclofenac) था।
गिद्ध उन मवेशियों के शव खाते थे जिनका इलाज डाइक्लोफेनैक से किया गया होता था।
यह दवा गिद्धों में गुर्दे (किडनी) फेलियर और तेजी से मृत्यु का कारण बनी।
इस तीव्र गिरावट ने पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप:
o आवारा कुत्तों की आबादी में वृद्धि
o रेबीज का खतरा बढ़ना
o सड़ते हुए शवों का जमाव, जिससे रोग फैलने का जोखिम बढ़ा

मुख्य संरक्षण प्रयास और उपलब्धियाँ:

कैप्टिव प्रजनन कार्यक्रम (Captive Breeding Programme)
• 2004 में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और राज्य वन विभागों के सहयोग से शुरू किया गया।
प्रमुख प्रजनन केंद्र:
o जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, पिंजौर
o जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, राजाभातखावा
o जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, रानी
o जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, भोपाल

लक्षित प्रजातियाँ:
सफेद-पीठ वाला गिद्ध (White-rumped Vulture)
लंबी चोंच वाला गिद्ध (Long-billed Vulture)
पतली चोंच वाला गिद्ध (Slender-billed Vulture)

(इन सभी को अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।)

बाघ अभयारण्य क्यों सुरक्षित रिहाई स्थल हैं:

पेंच टाइगर रिज़र्व, ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व और मेलघाट टाइगर रिज़र्व जैसे बाघ अभयारण्य गिद्धों के पुनर्वास के लिए इसलिए चुने जाते हैं क्योंकि:

सुरक्षित भोजन स्रोत: जंगली पशुओं के शव हानिकारक पशु चिकित्सा दवाओं से मुक्त होते हैं।
न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप: कम मानवीय गतिविधियाँ घोंसला बनाने और जीवित रहने में मदद करती हैं।
पारिस्थितिक उपयुक्तता: बड़े संरक्षित क्षेत्र स्थिर आवास प्रदान करते हैं।

नीतिगत उपाय और चुनौतियाँ:

भारत ने 2006 में डाइक्लोफेनैक पर प्रतिबंध लगाया और बाद में केटोप्रोफेन, एसिक्लोफेनैक और निमेसुलाइड जैसे अन्य हानिकारक NSAIDs पर भी प्रतिबंध/पाबंदियाँ लगाईं।
चुनौतियाँ :
o अवैध या असुरक्षित पशु चिकित्सा दवाओं का उपयोग जारी रहना
o संरक्षित क्षेत्रों के बाहर प्रभावी गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zones) की आवश्यकता
o सुरक्षित और सतत भोजन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना

भारत में गिद्ध:

मुख्य तथ्य
गिद्ध सामाजिक, शवभक्षी पक्षी हैं जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और रोग फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व में पाए जाने वाली 23 गिद्ध प्रजातियों में से 9 प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं।
इनकी विशेषताएँ हैंचौड़े पंख, गंजा सिर, उत्कृष्ट उड़ान क्षमता और शवभक्षण व्यवहार।

कानूनी संरक्षण
• CITES: परिशिष्ट II (Appendix II)
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972: अनुसूची I (Schedule I)

भारत में गिद्धों की संरक्षण स्थिति:

प्रजाति

IUCN स्थिति

सफेद-पीठ वाला गिद्ध

अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered)

पतली चोंच वाला गिद्ध

अत्यंत संकटग्रस्त

लंबी चोंच वाला गिद्ध

अत्यंत संकटग्रस्त

लाल सिर वाला गिद्ध

अत्यंत संकटग्रस्त

मिस्र गिद्ध

संकटग्रस्त (Endangered)

हिमालयी ग्रिफ़न

निकट संकट (Near Threatened)

सिनेरियस गिद्ध

निकट संकट

दाढ़ी वाला गिद्ध

निकट संकट

यूरेशियन ग्रिफ़न गिद्ध

कम चिंताजनक (Least Concern)

निष्कर्ष:

भारत में गिद्ध संरक्षण एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक पुनर्प्राप्ति प्रयास है। इन शवभक्षी पक्षियों का धीरे-धीरे पुनर्जीवन केवल एक प्रजाति को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में पारिस्थितिक संतुलन, रोग नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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