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Blog / 26 Feb 2026

केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी दी

संदर्भ:

हाल ही में भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दक्षिणी राज्य केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही राज्य के आधिकारिक नाम में परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। यह निर्णय जून 2024 में केरल विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव के आधार पर लिया गया, जिसमें राज्य का नाम “केरलम” करने का अनुरोध किया गया था।

प्रस्ताव के बारे में:

केंद्र सरकार ने “केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026” को मंजूरी दी है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की अनुशंसा के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की सिफारिश मिलने के बाद, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधानों के तहत इसे केरल विधानसभा को उसके विचार के लिए भेजा जाएगा। राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद ही विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जा सकेगा।

Kerala to Keralam: Shocking Rename Approved in 2026 Triumph

राज्य का नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया:

      • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 का प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह किसी राज्य का नाम कानून के माध्यम से बदल सकती है। इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
      • राज्य का प्रस्ताव: संबंधित राज्य की विधानसभा को नाम परिवर्तन के पक्ष में प्रस्ताव पारित करना होता है।
      • राष्ट्रपति की अनुशंसा: संसद में विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की अनुशंसा आवश्यक होती है।
      • राज्य विधानसभा की राय: राष्ट्रपति विधेयक को संबंधित राज्य विधानसभा को उसके विचार के लिए भेजते हैं। हालांकि, विधानसभा की राय बाध्यकारी (अनिवार्य रूप से मानने योग्य) नहीं होती।
      • संसद की स्वीकृति: विधेयक को संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से पारित किया जाता है।
      • राष्ट्रपति की स्वीकृति: संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से विधेयक कानून बन जाता है। इसके पश्चात संविधान की प्रथम और चतुर्थ अनुसूचियों में राज्य के नाम को संशोधित किया जाता है।

राज्यों के नाम परिवर्तन का ऐतिहासिक संदर्भ:

      • भारत में पहले भी कई राज्यों के नाम उनकी भाषाई, सांस्कृतिक या ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप बदले जा चुके हैं:
        • ओडिशा (पूर्व में उड़ीसा): वर्ष 2011 में राज्य और उसकी भाषा दोनों के नाम में संशोधन किया गया।
        • उत्तराखंड (पूर्व में उत्तरांचल): वर्ष 2007 में स्थानीय परंपरा और प्रचलन के अनुसार नाम बदला गया।
      • ये सभी परिवर्तन संबंधित राज्यों की मांग और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किए गए थे।

नाम परिवर्तन का महत्व:

      • सांस्कृतिक और भाषाई पहचान: समर्थकों का मानना है कि “केरलम” नाम राज्य की मलयालम भाषाई विरासत के अधिक अनुरूप है और उसके ऐतिहासिक नाम को सही रूप में दर्शाता है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव निकट हैं, इसलिए इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
      • संवैधानिक और प्रशासनिक प्रभाव: यद्यपि यह परिवर्तन मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है, फिर भी इसके लिए पूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। नाम परिवर्तन के बाद सरकारी दस्तावेज़ों, आधिकारिक अभिलेखों, मानचित्रों और संघीय रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

निष्कर्ष:

केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने की केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति क्षेत्रीय पहचान और भाषाई विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और संवैधानिक कदम है। हालांकि यह एक प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण चरण है, अंतिम निर्णय संसद द्वारा अनुच्छेद 3 के तहत पूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही प्रभावी होगा। यह कदम भारत की संघीय व्यवस्था की उस विशेषता को भी दर्शाता है, जिसमें क्षेत्रीय भावनाओं और स्थानीय आकांक्षाओं को संविधान के दायरे में सम्मान दिया जाता है।

 

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