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Blog / 09 Feb 2026

केंद्रीय बजट 2026–27: अवसंरचना, विनिर्माण और समावेशी विकास की रूपरेखा

सन्दर्भ:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026–27 संसद में प्रस्तुत किया। विजन 2047’ की यात्रा के मध्य चरण में स्थित यह बजट ऐसे महत्वपूर्ण समय पर प्रस्तुत हुआ है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद संरचनात्मक बाधाओं का समाधान करते हुए विकास की आवश्यकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। अपने मूल में, यह बजट अवसंरचना-आधारित, सुधार-उन्मुख और विनिर्माण-प्रेरित रणनीति प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य उच्च विकास पथ को बनाए रखना, नागरिकों के लिए जीवन की सुगमता में सुधार करना, निजी निवेश को उत्प्रेरित करना तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करना है। इसके स्वरूप में पूर्व प्राथमिकताओं की निरंतरता स्पष्ट दिखाई देती है, साथ ही प्रौद्योगिकी, डेटा अवसंरचना और कर सुधारों जैसे क्षेत्रों में कुछ साहसिक नई नीतिगत पहलें भी शामिल हैं।

    • बजट अनुमान (BE) 2026–27 के अनुसार, गैर-ऋण प्राप्तियाँ ₹36.5 लाख करोड़ और कुल व्यय ₹53.5 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि शुद्ध कर प्राप्तियाँ पर ₹28.7 लाख करोड़ आकलन किया गया हैं। सकल बाजार उधारी ₹17.2 लाख करोड़ और दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से शुद्ध उधारी ₹11.7 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3% पर अनुमानित है, जबकि ऋण-से-जीडीपी अनुपात 55.6% रहने का अनुमान है, जो संशोधित अनुमान (RE) 2025–26 के 56.1% से थोड़ा कम है।

बजट के विषय में-

भारतीय संविधान में बजटशब्द का प्रत्यक्ष उपयोग नहीं किया गया है, इसे अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरणकहा गया है। राष्ट्रपति की सिफारिश पर इसे संसद के दोनों सदनों में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और इसमें वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल–31 मार्च) के लिए अनुमानित प्राप्तियों और व्ययों का विवरण होता है।

मुख्य प्रावधान:
अनुच्छेद 110 (धन विधेयक): यह निर्धारित करता है कि धन विधेयक क्या है, जिसमें कराधान, सरकारी उधारी तथा समेकित कोष की अभिरक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं। बजट का हिस्सा वित्त विधेयक सामान्यतः धन विधेयक होता है।
अनुच्छेद 113 (अनुमानों की प्रक्रिया): आरोपित (गैर-मतदान योग्य) और मतदान योग्य व्ययों के बीच अंतर करता है।
अनुच्छेद 114 (विनियोग विधेयक): विनियोग अधिनियम के बिना समेकित कोष से कोई धन नहीं निकाला जा सकता।
अनुच्छेद 115 (अनुपूरक अनुदान): अप्रत्याशित आवश्यकताओं या नई सेवाओं के लिए अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति की अनुमति देता है।
अनुच्छेद 116 (वोट ऑन अकाउंट): पूर्ण बजट स्वीकृति से पहले सरकार के संचालन हेतु अग्रिम अनुदान की अनुमति देता है।
अनुच्छेद 117 एवं 265: वित्त विधेयकों से संबंधित हैं और यह स्थापित करते हैं कि कर केवल विधि द्वारा ही लगाए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 266–267: नियमित और अप्रत्याशित सरकारी व्ययों के लिए समेकित कोष, लोक लेखा और आकस्मिकता निधि की स्थापना करते हैं।

ये अनुच्छेद भारत की बजटीय प्रक्रिया की कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारशिला प्रदान करते हैं, जिससे जवाबदेही, संसदीय नियंत्रण और राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित होता है।

बजट तीन कर्तव्योंसे प्रेरित है, जो संतुलित विकास के प्रति सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं:

1. आर्थिक वृद्धि को तेज़ और सतत बनाना
पहला कर्तव्य अर्थव्यवस्था में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर केंद्रित है, साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर देता है। इसमें विनिर्माण, अवसंरचना, नवाचार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ शामिल हैं, ताकि वृद्धि को सुदृढ़ और दीर्घकालिक बनाया जा सके।

2. आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमताओं का निर्माण
दूसरा कर्तव्य जन-केंद्रित विकास पर आधारित है जो अवसरों का सृजन, कौशल विकास को समर्थन, रोजगार को बढ़ावा और नागरिकों को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर देता है। यह विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को उनकी आर्थिक और सामाजिक आकांक्षाएँ साकार करने में सक्षम बनाने पर बल देता है।

3. समावेशी विकास सुनिश्चित करना (सबका साथ, सबका विकास)
तीसरा कर्तव्य सरकार के सबका साथ, सबका विकासके मंत्र के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और क्षेत्रक को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुँच प्राप्त हो। यह विकास के एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें विकास के लाभ भारत की विविध जनसंख्या में व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं।

बजट 2026-27 के प्रमुख पहलू:

1.      समष्टि आर्थिक परिदृश्य और राजकोषीय रणनीति:
बजट की पूर्व संध्या पर भारत की समष्टि आर्थिक स्थिति लचीलापन दर्शाती है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में वास्तविक GDP वृद्धि 7.4% आँकी गई, जबकि वित्तीय वर्ष 2026–27 में नाममात्र वृद्धि 10% रहने का अनुमान है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 27 के लिए GDP के 4.3% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित करते हुए राजकोषीय समेकन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, साथ ही 2030 तक ऋण अनुपात को लगभग 50% पर स्थिर करने का मध्यम अवधि लक्ष्य रखा है। 

पूंजीगत व्यय पर जोर
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बजट का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है, जो अवसंरचना सृजन और आर्थिक गुणक प्रभावों का चालक है। पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है, जो जीडीपी के 4.4% के बराबर है, जिससे परिसंपत्ति सृजन को बनाए रखने और निजी निवेश को आकर्षित करने के सरकार के इरादे स्पष्ट होते हैं।

पूंजीगत व्यय की प्राथमिकताओं में परिवहन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, जलमार्ग, शहरी अवसंरचना और ऊर्जा प्रणालियाँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य संपर्क सुधारना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।

कर सुधार और अनुपालन में सुगमता:
बजट 2026 की सबसे अधिक प्रतीक्षित विशेषताओं में कर प्रणाली का सरलीकरण शामिल है, ताकि इसे अधिक सरल, पारदर्शी और अनुपालन-अनुकूल बनाया जा सके।

नया आयकर अधिनियम और सरलीकरण
एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में आयकर अधिनियम, 2025 की घोषणा की गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। यह छह दशक पुराने कानून को प्रतिस्थापित करेगा और मुकदमेबाजी को कम करने तथा फाइलिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से अधिक सुव्यवस्थित ढांचा प्रदान करेगा। नए आयकर रिटर्न फॉर्म अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल होने की उम्मीद है, जिससे व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों को लाभ मिलेगा।

कर राहत और TCS युक्तिकरण
बजट में कई कर राहत उपाय प्रस्तुत किए गए, जिनमें शामिल हैं:
मौजूदा आयकर स्लैब को बनाए रखना, दरों में बदलाव के बजाय अनुपालन में राहत पर जोर।
उदार प्रेषण योजना (LRS) के तहत विदेशी यात्रा पैकेज, शिक्षा और चिकित्सा प्रेषण पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) को घटाकर 2% करना, जिससे वैश्विक आवागमन सुगम हो सके।

ये कदम राजस्व सुदृढ़ता बनाए रखते हुए अनुपालन बोझ कम करने के बीच संतुलन को दर्शाते हैंजो करदाताओं और व्यवसायों की एक प्रमुख अपेक्षा है।

 

2.     अवसंरचना, संपर्क और लॉजिस्टिक्स:

उच्च गति रेल कॉरिडोर
एक प्रमुख प्रस्ताव के रूप में सात नए उच्च गति रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई, जो मुंबईपुणे, पुणेहैदराबाद, हैदराबादबेंगलुरु, दिल्लीवाराणसी और वाराणसीसिलीगुड़ी जैसे प्रमुख आर्थिक क्लस्टरों को जोड़ेंगे। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी लाना, गतिशीलता में सुधार करना और शहरी समूहों के आसपास विकास के केंद्र के रूप में कार्य करना है।

ऐसे निवेशों से औद्योगिक संपर्क, क्षेत्रीय विकास और निर्माण, संचालन तथा सहायक सेवाओं में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय जलमार्ग और समर्पित माल ढुलाई गलियारे
बजट में लॉजिस्टिक्स दक्षता पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें शामिल हैं:
पाँच वर्षों में 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन।
पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे (जैसे दानकुनी से सूरत), जिससे माल परिवहन लागत घटे और वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो।

सामूहिक रूप से, इन पहलों का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना जो वर्तमान में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अपेक्षाकृत अधिक है और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड
दीर्घ अवधि वाली परियोजनाओं में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड का प्रस्ताव किया गया है, जो आंशिक ऋण गारंटी प्रदान कर ऋणदाताओं और निवेशकों के बीच जोखिम की धारणा को कम करेगा।

विनिर्माण और रणनीतिक उद्योग:
बजट ने इस सिद्धांत को और सुदृढ़ किया है कि सतत विकास के लिए विनिर्माण केंद्रीय भूमिका निभाता है, विशेष रूप से रणनीतिक और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में।

 

3.     इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
वैश्विक चिप संकट और आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में निवेश आकर्षित करने के पूर्व प्रयासों पर आधारित है।

सेमीकंडक्टर से आगे क्षेत्रीय फोकस
अन्य प्रमुख विनिर्माण पहलों में शामिल हैं:
जैव-फार्मास्युटिकल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम (₹10,000 करोड़)।
• ₹40,000 करोड़ के उन्नत परिव्यय के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दुर्लभ मृदा कॉरिडोर, ताकि खनिज प्रसंस्करण और उन्नत विनिर्माण को समर्थन मिल सके।

ये रणनीतिक प्रयास आयात निर्भरता को कम करने, उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजित करने और भारत को वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में और गहराई से एकीकृत करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

 

4.    एमएसएमई, उद्यमिता और पूंजी तक पहुँच:
छोटे व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये रोजगार प्रदान करते हैं, उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं और ग्रामीण तथा शहरी आजीविका को बनाए रखते हैं।

लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) ग्रोथ फंड
एमएसएमई वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड घोषित किया गया, जिसे आत्मनिर्भर भारत फंड में ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि से पूरक किया गया है।

तरलता समर्थन और ऋण सुधार
एमएसएमई से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSE) खरीद के लिए TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) का अनिवार्य उपयोग, ताकि तरलता में सुधार हो।
वित्तपोषण लागत घटाने और जोखिम साझा करने के लिए क्रेडिट गारंटी में वृद्धि।
टियर II और टियर III शहरों में कॉरपोरेट मित्र’, जो कंपनियों को अनुपालन दायित्वों को कुशलता से पूरा करने में सहायता करेंगे।

ये संरचनात्मक हस्तक्षेप पूंजी तक पहुँच को बेहतर बनाने, वित्तपोषण चैनलों को औपचारिक बनाने और छोटे उद्यमों को बड़े मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करने का प्रयास करते हैं।

 

5.     सामाजिक क्षेत्र: शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण:
बजट ने सामाजिक क्षेत्र में निवेश के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है, साथ ही विकासात्मक हस्तक्षेपों में प्रौद्योगिकी के समावेशन पर जोर दिया है।

शिक्षा और कौशल विकास
उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मॉडल के तहत प्रत्येक जिले में बालिका छात्रावासों की स्थापना।
एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र को समर्थन, ताकि रचनात्मक प्रतिभा का विकास हो और शिक्षा को रोजगार से जोड़ा जा सके।

ये कदम इस बात को रेखांकित करते हैं कि दीर्घकालिक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए मानव पूंजी विकास अत्यंत आवश्यक है।

कृषि और किसान समर्थन
कृषि नीति में सब्सिडी की बजाय उत्पादकता वृद्धि पर अधिक जोर दिया गया है, जिसमें भारत विस्तारजैसे प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेप शामिल हैं, जो किसानों को बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद के लिए विभिन्न डेटा संसाधनों को एकीकृत करता है।

 

6.    रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता:
राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, बजट में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित किए गए हैं।
रक्षा व्यय को बढ़ाकर लगभग ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा आधुनिकीकरण, विमान और नौसैनिक परिसंपत्तियों के लिए निर्धारित है।

यह भारत की रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के इरादे को दर्शाता है, जो रणनीतिक स्वायत्तता के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

 

7.     वित्तीय क्षेत्र और शासन सुधार:
बजट में वित्तीय बाजारों को गहराई देने और नियामक ढांचे में सुधार के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए गए हैं:
कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए मार्केट मेकिंग ढांचा, ताकि तरलता और निवेशक भागीदारी बढ़े।
शहरी अवसंरचना के वित्तपोषण के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड निर्गम को प्रोत्साहन।
वैश्विक पूंजी प्रवाह में हो रहे परिवर्तनों के अनुरूप FEMA नियमों की समीक्षा।
ट्रस्ट-आधारित मॉडल और अग्रिम निर्णयों की वैधता अवधि बढ़ाने वाले सीमा शुल्क सुधार।

इन सुधारों का उद्देश्य गहरे पूंजी बाजारों को प्रोत्साहित करना और वैश्विक वित्तीय एकीकरण में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है।

 

8.    राजकोषीय स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण:
राजकोषीय अनुशासन इस बजट का एक केंद्रीय विषय बना हुआ है। 4.3% के लक्षित राजकोषीय घाटे के माध्यम से विकासात्मक आवश्यकताओं और समष्टि आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। राजकोषीय समेकन लक्ष्यों को आधार बनाकर और सार्वजनिक ऋण को नियंत्रण में रखकर, बजट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत की निवेश-आधारित विकास यात्रा दीर्घकाल में टिकाऊ बनी रहे।

निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026–27 उच्च विकास को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ करने और राजकोषीय उत्तरदायित्व बनाए रखने के बीच एक जटिल संतुलन को प्रतिबिंबित करता है। अवसंरचना, रणनीतिक विनिर्माण, कर सुधार और मानव पूंजी पर इसका फोकस भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
यद्यपि क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, विशेष रूप से बड़े पैमाने की अवसंरचना परियोजनाओं और नियामक क्रियान्वयन में, फिर भी यह बजट विकास, समावेशन और सुधार को एकीकृत करने वाला एक सुसंगत रोडमैप प्रस्तुत करता है।