संदर्भ:
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) के तहत राजस्थान, असम, तमिलनाडु और केरल में एक सड़क सुरक्षा पहल शुरू की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, स्थायी वित्त पोषण को बढ़ावा देना, डेटा के उपयोग में सुधार करना और लक्षित सुधारों में मदद करना है।
भारत में सड़क सुरक्षा का संकट:
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- दुनिया के केवल 1% वाहन भारत में होने के बावजूद, वैश्विक स्तर पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की मौतों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 11% है।
- 2023: लगभग 4.80 लाख दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.72 लाख लोगों की जान गई।
- 2024: मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1.77 लाख हो गया; तेज रफ्तार इसका मुख्य कारण रहा।
- मरने वालों में 67% लोग 18-45 वर्ष की आयु से हैं।
- सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर साल भारत की जीडीपी (GDP) का 3-5% नुकसान होता है।
- दोपहिया वाहन चालक, पैदल यात्री और साइकिल सवार सबसे अधिक जोखिम में हैं।
- ये आंकड़े सड़क दुर्घटनाओं को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में रेखांकित करते हैं।
- दुनिया के केवल 1% वाहन भारत में होने के बावजूद, वैश्विक स्तर पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की मौतों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 11% है।
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भारत में संयुक्त राष्ट्र की पहल:
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- भारत में संयुक्त राष्ट्र (UN) की सड़क सुरक्षा परियोजना व्यापक #MakeASafetyStatement अभियान का एक हिस्सा है। यह सड़क सुरक्षा के लिए दूसरे दशक की कार्ययोजना (2021-2030) के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों को आधा करना है।
- यह अभियान डिजिटल होर्डिंग्स, प्रमुख शहरों में पोस्टरों और सोशल मीडिया के माध्यम से सुरक्षा के सरल उपायों को बढ़ावा देता है — जैसे कि हेलमेट पहनना और सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा का पालन करना, वाहन चलाते समय फोन के उपयोग से बचना, और सड़क पर चलने वाले अन्य कमजोर लोगों (जैसे पैदल यात्री और साइकिल सवार) का सम्मान करना।
- भारत में संयुक्त राष्ट्र (UN) की सड़क सुरक्षा परियोजना व्यापक #MakeASafetyStatement अभियान का एक हिस्सा है। यह सड़क सुरक्षा के लिए दूसरे दशक की कार्ययोजना (2021-2030) के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों को आधा करना है।
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भारत के लिए महत्व:
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- स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था: सड़क हादसे परिवारों को बर्बाद करते हैं और देश की उत्पादकता घटाते हैं। इलाज के खर्च और श्रम की हानि से भारी आर्थिक नुकसान होता है।
- साझा प्रयास: संयुक्त राष्ट्र समर्थित यह पहल भारत की वर्तमान सड़क सुरक्षा नीतियों और विधायी ढांचे को और मजबूत बनाती है, जो सरकार, समाज और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बहु-क्षेत्रीय साझेदारी को बढ़ावा देती है।
- व्यवहार में बदलाव: बड़े सितारों और मीडिया के माध्यम से लोगों की सोच और आदतों को बदलने की कोशिश की जा रही है, ताकि लोग शराब पीकर गाड़ी चलाना या हेलमेट न पहनने जैसी गलतियां छोड़ दें।
- स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था: सड़क हादसे परिवारों को बर्बाद करते हैं और देश की उत्पादकता घटाते हैं। इलाज के खर्च और श्रम की हानि से भारी आर्थिक नुकसान होता है।
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भारत के लिए नीतिगत प्रभाव:
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- भारत में सड़क सुरक्षा एक प्राथमिकता भी है और इसे लागू करना एक चुनौती भी। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए कुछ मुख्य रणनीतिक ढांचे इस प्रकार हैं:
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति,
- मोटर वाहन अधिनियम और नियमों को सख्ती से लागू करना,
- सुरक्षित बुनियादी ढांचे के लिए इंजीनियरिंग मानक, और
- लोगों को जागरूक करने की पहल।
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति,
- संयुक्त राष्ट्र (UN) की यह परियोजना भारत के घरेलू प्रयासों को और मजबूती प्रदान करती है। यह भारतीय संदर्भ में वैश्विक स्तर की बेहतरीन पद्धतियों को शामिल करती है, विशेष रूप से दुर्घटनाओं के आंकड़ों का सही विश्लेषण,सुरक्षा कार्यों के लिए धन की व्यवस्था,दुर्घटना के बाद की देखभाल प्रणाली।
- भारत में सड़क सुरक्षा एक प्राथमिकता भी है और इसे लागू करना एक चुनौती भी। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए कुछ मुख्य रणनीतिक ढांचे इस प्रकार हैं:
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संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF):
संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) की स्थापना 2018 में हुई थी और इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। यह एक 'मल्टी-पार्टनर ट्रस्ट फंड' है, जिसका मुख्य उद्देश्य 2030 तक दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों को 50% तक कम करना है। इसका विशेष ध्यान विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) पर है।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र की यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए भारत में सड़क हादसों के बोझ को कम करने का एक ठोस प्रयास है। यह बेहतर संस्थानों और राज्य-स्तरीय सुधारों के माध्यम से जीवन बचाने के लक्ष्य को मजबूत करती है।
