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Blog / 08 Jul 2026

यूडीआईएसई+ (UDISE+) रिपोर्ट 2025–26: भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति

संदर्भ:

हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) रिपोर्ट 2025–26 जारी की। यह रिपोर्ट भारत के स्कूली शिक्षा क्षेत्र से संबंधित व्यापक आँकड़े प्रस्तुत करती है।

UDISE+ रिपोर्ट 2025–26 के बारे में:

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा प्रबंधन सूचना प्रणालियों (Education Management Information Systems) में से एक है। इसके अंतर्गत शामिल हैं-

      • 14.8 लाख से अधिक विद्यालय
      • लगभग 1.02 करोड़ शिक्षक
      • 26 करोड़ से अधिक विद्यार्थी

यह स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत स्कूली शिक्षा से संबंधित प्रमुख डेटा भंडार (Data Repository) के रूप में कार्य करता है। साथ ही, यह साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, संसाधनों के प्रभावी आवंटन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

UDISE+ रिपोर्ट 2025–26 के प्रमुख निष्कर्ष

1. शिक्षकों की उपलब्धता और छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में सुधार

वर्ष 2022–23 में शिक्षकों की संख्या 94.83 लाख थी, जो बढ़कर 2025–26 में 1.02 करोड़ हो गई। यह लगभग 8.3 प्रतिशत की वृद्धि है।

विभिन्न स्तरों पर छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil–Teacher Ratio - PTR) में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है-

      • आधारभूत (Foundational) स्तर: 10:1
      • प्रारंभिक (Preparatory) स्तर: 12:1
      • मध्य (Middle) स्तर: 17:1
      • माध्यमिक (Secondary) स्तर: 21:1

ये सभी अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 द्वारा निर्धारित 30:1 के मानक से बेहतर हैं। इससे कक्षाओं में बेहतर संवाद तथा प्रत्येक विद्यार्थी पर व्यक्तिगत ध्यान देना संभव हो सकेगा।

NEP 2020 के अंतर्गत भारत की 10+2 शिक्षा प्रणाली को 5+3+3+4 संरचना से प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें चार चरण शामिल हैं

      • आधारभूत चरण (Foundational): 5 वर्ष
      • प्रारंभिक चरण (Preparatory): 3 वर्ष
      • मध्य चरण (Middle): 3 वर्ष
      • माध्यमिक चरण (Secondary): 4 वर्ष

2. नामांकन, विद्यालय में बने रहने की दर तथा संक्रमण दर में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न स्तरों पर ड्रॉपआउट दर में कमी दर्ज की गई है-

      • प्रारंभिक स्तर: 1.8%
      • मध्य स्तर: 3.6%
      • माध्यमिक स्तर: 7.0%

माध्यमिक स्तर पर रिटेंशन रेट (Retention Rate) 47.2% से बढ़कर 51.9% हो गया है।

इसी प्रकार, सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio - GER) माध्यमिक स्तर पर 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया।

विभिन्न चरणों के बीच संक्रमण दर (Transition Rate) भी बेहतर हुई है-

      • आधारभूत से प्रारंभिक स्तर: 99.2%
      • प्रारंभिक से मध्य स्तर: 93.8%
      • मध्य से माध्यमिक स्तर: 88.3%

3. विद्यालयों का युक्तिकरण (Rationalisation of Schools)

रिपोर्ट के अनुसार-

      • एकल-शिक्षक विद्यालयों की संख्या घटकर 1,00,843 रह गई है।
      • शून्य नामांकन (Zero Enrolment) वाले विद्यालयों की संख्या घटकर 5,663 हो गई है।

यह शिक्षकों की बेहतर तैनाती, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है।

4. डिजिटल अवसंरचना और समावेशी शिक्षा में प्रगति

विद्यालयों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार हुआ है-

      • कंप्यूटर उपलब्धता वाले विद्यालय: 69.9%
      • इंटरनेट सुविधा वाले विद्यालय: 67.4%

मूलभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है-

      • 99.5% विद्यालयों में पेयजल उपलब्ध है।
      • 95% विद्यालयों में बिजली की सुविधा है।
      • 97% से अधिक विद्यालयों में कार्यशील शौचालय उपलब्ध हैं।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप और हैंडरेल जैसी सुविधाओं वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 58.2% हो गई है, जिससे समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिला है।

इसके अतिरिक्त-

      • महिला शिक्षक अब कुल शिक्षकों का 54.9% हैं।
      • बालिकाओं का नामांकन बढ़कर 48.4% हो गया है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है, जिसका प्रमुख कारण विद्यालयों की सीमित उपलब्धता तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ हैं।
      • अनेक विद्यालयों में अभी भी बुनियादी अवसंरचना का अभाव है।
      • केवल 81.9% विद्यालयों में खेल का मैदान उपलब्ध है।
      • मात्र 29.9% विद्यालयों में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की सुविधा है।
      • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs - CWSN) के लिए रैंप, सुलभ शौचालय और बाधारहित अवसंरचना जैसी सुविधाओं का और विस्तार आवश्यक है।
      • लगभग एक लाख विद्यालय अभी भी केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

आगे की राह:

भारत को आवश्यकता है कि-

      • वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का विस्तार किया जाए।
      • सुलभ अवसंरचना एवं सहायक सुविधाओं के माध्यम से समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाया जाए।
      • वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा तथा हरित अवसंरचना को बढ़ावा देकर टिकाऊ (Sustainable) विद्यालय विकसित किए जाएँ।
      • पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएँ तथा डिजिटल शिक्षा को नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी और पीएम ई-विद्या (PM e-VIDYA) जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़कर और अधिक सशक्त बनाया जाए।

निष्कर्ष:

UDISE+ रिपोर्ट 2025–26 दर्शाती है कि भारत ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की विद्यालय में बने रहने की दर, डिजिटल अवसंरचना तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालाँकि, माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट, समावेशी शिक्षा तथा एकल-शिक्षक विद्यालयों जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए लक्षित प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों तथा सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) को प्राप्त करने के लिए समान, प्रौद्योगिकी-संचालित एवं टिकाऊ शिक्षा प्रणाली का विकास अत्यंत आवश्यक है।

 

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