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Blog / 08 Apr 2026

जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत दो नए नामित भंडार अधिसूचित

सन्दर्भ:

हाल ही में, भारत सरकार ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत दो प्रमुख संस्थानों को 'नामित रिपॉजिटरी' (Designated Repositories) के रूप में अधिसूचित किया है। यह कदम भारत की समृद्ध जैविक विरासत के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ाएगा। इन नई नियुक्तियों के साथ, देश में राष्ट्रीय रिपॉजिटरी नेटवर्क की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जो जैव संसाधनों के अध्ययन और सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

नामित रिपॉजिटरी क्या होते है?

      • जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत नामित रिपॉजिटरी (Designated Repository) वे संस्थाएं हैं जिन्हें सरकार द्वारा जैविक संसाधनों और उनसे संबंधित जानकारी को संरक्षित करने के लिए मान्यता प्राप्त है।
      • ये संस्थान (जैसे- केंद्रीय या राज्य प्रयोगशालाएं, विश्वविद्यालय) शोध, अकादमिक या व्यावसायिक उपयोग के लिए जमा किए गए नमूनों को सुरक्षित रखते हैं और एक केंद्रीय नेटवर्क के रूप में कार्य करते हैं

नए नामित रिपॉजिटरी के बारे में:

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने निम्नलिखित दो संस्थानों को अधिसूचित किया है:

      • रेफरल सेंटर 'भवसागर' (Referral Centre Bhavasagara - CMLRE, कोच्चि): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत समुद्री सजीव संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), कोच्चि में स्थित इस केंद्र को 'गहरे समुद्र के जीवजंतुओं' (Deep-Sea Fauna) के लिए राष्ट्रीय रिपॉजिटरी के रूप में मान्यता दी गई है। यह केंद्र विशेष रूप से दुर्लभ अकशेरुकी (invertebrates) और गहरे समुद्र की मछलियों सहित 3,500 से अधिक टैक्सोनॉमिक रूप से पहचाने गए नमूनों को संरक्षित करता है। यह हिंद महासागर के गहरे समुद्र में अनुसंधान और जैव-संसाधनों की सूची बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।  
      • सूक्ष्मजीवों का MACS संग्रह (MACS Collection of Microorganisms - ARI, पुणे): अगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे में स्थित यह केंद्र विशेष सूक्ष्मजीव संस्कृतियों (microbial cultures) पर ध्यान केंद्रित करता है। यह विशेष रूप से 'कठिन-से-विकसित' (difficult-to-grow) और एनारोबिक/एक्सट्रीमोफिलिक प्रजातियों के लिए जाना जाता है, जो औद्योगिक और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं।  

जैविक विविधता अधिनियम, 2002:

यह अधिनियम 1992 के सीबीडी (CBD) के दायित्वों को पूरा करने के लिए बनाया गया था, जिसका उद्देश्य है:

      • जैव विविधता का संरक्षण।
      • इसके घटकों का सतत उपयोग।
      • जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण (Access and Benefit Sharing - ABS)

तीन-स्तरीय संरचना:

      • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA): विदेशी संस्थाओं के लिए अनुमोदन और शोध स्थानांतरण को विनियमित करता है।
      • राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB): राज्य-स्तरीय नियमन।
      • जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs): स्थानीय स्तर पर पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBRs) के माध्यम से संरक्षण और ज्ञान का दस्तावेजीकरण

हालिया संशोधन (2023):

जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने छोटे अपराधों को गैर-अपराधिक (decriminalize) बनाने, आयुष चिकित्सकों को बढ़ावा देने और अनुसंधान व वाणिज्यिक उपयोग को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। यह संशोधन 'व्यवसाय करने में आसानी' (Ease of Doing Business) के साथ-साथ संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है।

निष्कर्ष:

कोच्चि और पुणे में नए रिपॉजिटरी का शामिल होना भारत की जैव-अर्थव्यवस्था और संरक्षण रणनीतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल हमारी अनूठी समुद्री और सूक्ष्मजीव विविधता को सुरक्षित रखेगा, बल्कि भविष्य की वैज्ञानिक खोजों के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करेगा, जो देश के सतत विकास में सहायक होगा।