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Blog / 14 Mar 2026

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। यह विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित करता है, जिनमें स्व-पहचान (Self-identification) के अधिकार को हटाना और कड़े आपराधिक प्रावधानों को शामिल करना प्रमुख हैं।

प्रस्तावित विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

      • ट्रांसजेंडर व्यक्ति की संकीर्ण परिभाषा:
        • यह विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिभाषा में संशोधन करता है।
        • इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
          • हिजड़ा, किन्नर, अरावणी और जोगता जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्ति।
          • इंटरसेक्स भिन्नताओं या जन्मजात यौन-लक्षण संबंधी अंतर वाले व्यक्ति।
          • हालाँकि, यह उन व्यक्तियों को बाहर कर देता है जो केवल अपनी स्व-धारित लैंगिक पहचान या यौन अभिविन्यास के आधार पर स्वयं को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचानते हैं।
      • स्व-पहचान का अधिकार समाप्त:
        • पहले के कानून के तहत व्यक्तियों को अपनी स्व-धारित लैंगिक पहचान के आधार पर अपना लिंग निर्धारित करने की अनुमति थी।
        • संशोधन इस प्रावधान को समाप्त करता है।
        • अब जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणपत्र जारी करने से पहले मेडिकल बोर्ड ट्रांसजेंडर पहचान की जाँच और प्रमाणन करेगा।
      • प्रमाणीकरण के लिए मेडिकल बोर्ड:
        • लैंगिक पहचान के प्रमाणीकरण के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में एक मेडिकल बोर्ड आवेदन का आकलन करेगा।
        • जिला मजिस्ट्रेट केवल बोर्ड की सिफारिश के बाद ही प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे।
      • कड़े आपराधिक दंड:
      • विधेयक निम्नलिखित अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है:
        • किसी व्यक्ति का अपहरण करके उसे ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर करना
        • जबरन अंग-भंग, बधियाकरण या सर्जरी करना
        • बच्चों को ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए बाध्य करना
        • बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों में सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।

पृष्ठभूमि:

      • नालसा निर्णय (2014): सुप्रीम कोर्ट ने NALSA बनाम भारत संघ (2014) मामले में:
        • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी।
        • लैंगिक पहचान की स्व-पहचान के अधिकार को अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा के अधिकार) का हिस्सा माना।
      • ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019:
        • ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया पहला व्यापक कानून है। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता, भेदभाव से संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना है।

प्रमुख विशेषताएँ:

      • ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा:
        • ऐसा व्यक्ति जिसका लिंग जन्म के समय निर्धारित लिंग से मेल नहीं खाता।
        • इसमें ट्रांस-पुरुष, ट्रांस-महिला, इंटरसेक्स व्यक्ति, जेंडर-क्वियर व्यक्ति तथा हिजड़ा और किन्नर जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानें शामिल हैं।
      • पहचान प्रमाणपत्र:
        • कोई भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति पहचान प्रमाणपत्र के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है।
        • यह प्रमाणपत्र आधिकारिक दस्तावेजों में नाम और लिंग को अद्यतन करने की अनुमति देता है।
      • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद:
        • यह परिषद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित नीतियों और कल्याण कार्यक्रमों पर सरकार को सलाह देती है।
      • अपराध और दंड:
        • दुर्व्यवहार, जबरन श्रम और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच से वंचित करने जैसे कृत्य दंडनीय हैं।
        • इनके लिए 6 महीने से 2 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

प्रमुख चिंताएँ

स्व-पहचान के अधिकार को हटाना NALSA निर्णय के विपरीत हो सकता है।
मेडिकल प्रमाणीकरण की अनिवार्यता व्यक्तिगत स्वायत्तता को सीमित कर सकती है।
कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून कई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण से बाहर कर सकता है।

आगे की राह-

कानून को संवैधानिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों, विशेषकर गरिमा, समानता और व्यक्तिगत स्वायत्तता, के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। साथ ही यह आवश्यक है कि ट्रांसजेंडर समुदाय, नागरिक समाज संगठनों और विषय विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए, ताकि कानून उनकी वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को प्रतिबिंबित कर सके। इसके अतिरिक्त, सरकार को कल्याणकारी योजनाओं को सुदृढ़ करना चाहिए और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा रोजगार के अवसरों तक पहुँच का विस्तार करना चाहिए, ताकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा मिल सके।