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Blog / 14 Aug 2026

पूर्वोत्तर भारत में कैस्केड मेंढक की तीन नई प्रजातियों की खोज

संदर्भ:

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पूर्वोत्तर भारत में कैस्केड मेंढक (Cascade Frogs) की तीन नई प्रजातियों की खोज की है और भारत में पहली बार पाँच अन्य प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की है। ये निष्कर्ष 15 वर्षों से अधिक समय तक किए गए क्षेत्रीय अनुसंधान के बाद तुलनात्मक प्राणी-विज्ञान संग्रहालय का बुलेटिन में प्रकाशित हुए।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:

      • इस अध्ययन का नेतृत्व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. एस. डी. बीजू ने किया।
      • शोधकर्ताओं ने तेज़ बहाव वाली वन धाराओं में रहने वाले मेंढकों की 300 से अधिक भौगोलिक आबादियों का अध्ययन किया।
      • वयस्क मेंढकों और टैडपोल के आकृति-विज्ञान संबंधी अध्ययन के साथ DNA विश्लेषण से तीन नई प्रजातियों की पुष्टि हुई:

1.        अम्माची कैस्केड मेंढक (Amolops ammachi)त्रिपुरा

2.      सेंदेन्यु कैस्केड मेंढक (Amolops sendenyu)नागालैंड

3.      ब्यूटीफुल कैस्केड मेंढक (Amolops bella)पश्चिम बंगाल

Three new Cascade Frog species discovered in Northeast India, one named  after Kerala social worker

नई प्रजातियों के नामकरण:

      • अम्माची कैस्केड मेंढक का नाम दिवंगत केरल की समाजसेवी और परोपकारी पद्मिनी वार्की के सम्मान में रखा गया, जिन्हें लोकप्रिय रूप सेअम्माचीकहा जाता था। यह नाम उनके मानवीय कार्यों के सम्मान में दिया गया है।
      • सेंदेन्यु कैस्केड मेंढक का नाम नागालैंड के सेंदेन्यु गाँव के नाम पर रखा गया है।
      • ब्यूटीफुल कैस्केड मेंढक का अर्थसुंदरहै। इसका नाम इसके आकर्षक हरे और मोज़ेक जैसी बनावट वाले रूप को दर्शाता है।

भारत में पहली बार दर्ज की गई पाँच प्रजातियाँ:

अध्ययन में कैस्केड मेंढक की निम्नलिखित पाँच प्रजातियों को भारत में पहली बार दर्ज किया गया:

·        अमोलॉप्स अफगानस

·        अमोलॉप्स नेपालिकस

·        अमोलॉप्स वांग्याली

·        एमोलॉप्स मेडोजेन्सिस

·        अमोलॉप्स बेलुलस

इस प्रकार, इस अध्ययन से भारत में Amolops वंश की ज्ञात जैव-विविधता और भौगोलिक वितरण में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है।

पारिस्थितिक महत्व:

कैस्केड मेंढक तेज़ बहाव वाली धाराओं, झरनों और चट्टानी जलप्रपातों में रहने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होते हैं। इनमें:

    • अशांत और तेज़ बहते पानी में चलने के लिए मजबूत पैर होते हैं।
    • गीली चट्टानों पर पकड़ बनाने के लिए चिपकने वाले पैर के पंजे (Adhesive Toe Pads) होते हैं।
    • जलीय आवास के अनुकूल सुव्यवस्थित शरीर होता है।

स्वच्छ और ऑक्सीजन से भरपूर जलधाराओं पर उनकी निर्भरता के कारण ये मेंढक मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के उपयोगी जैव-संकेतक माने जा सकते हैं।

संरक्षण संबंधी चिंताएँ:

पारिस्थितिक महत्व के बावजूद कैस्केड मेंढकों को कई खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे:

    • जल प्रदूषण
    • वनों की कटाई
    • जलविद्युत परियोजनाएँ
    • आवास में बदलाव और उसका विखंडन
    • जलवायु परिवर्तन
    • वन एवं नदी-धारा वाले पारिस्थितिकी तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप

भारत के लिए महत्व:

पूर्वोत्तर भारत इंडो-बर्मा जैव-विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है और यहाँ उभयचर प्रजातियों की असाधारण विविधता पाई जाती है। यह खोज निम्नलिखित के महत्व को उजागर करती है:

    • जैव-विविधता का दस्तावेजीकरण और वर्गीकरण संबंधी अनुसंधान (Taxonomic Research)
    • वन धाराओं और नदी-तटीय आवासों का संरक्षण
    • मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र की पारिस्थितिक निगरानी
    • पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतत विकास
    • कम ज्ञात उभयचर प्रजातियों का संरक्षण

 

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