होम > Blog

Blog / 29 Nov 2025

मानव मस्तिष्क पर अध्ययन

संदर्भ:

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज (MRC कॉग्निशन एंड ब्रेन साइंसेज़ यूनिट) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक हालिया स्टडी (जो नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुई) में 3,802 व्यक्तियों के MRI ब्रेन डिफ्यूज़न स्कैन का विश्लेषण किया गया। ये स्कैन 1 दिन की आयु से लेकर 90 वर्ष तक के लोगों पर किए गए थे। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क की वायरिंग में चार महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट्सकी पहचान की, जो मनुष्य के जीवन में पाँच बड़े संरचनात्मक विकास चरणों (एपॉक्स”) को निर्धारित करते हैं। ये टर्निंग पॉइंट्स लगभग 9 वर्ष, 32 वर्ष, 66 वर्ष और 83 वर्ष की उम्र पर आते हैं।

ये पाँच युग इस प्रकार हैं:

युग

आयु

मस्तिष्क में प्रमुख परिवर्तन

बचपन

0–9

सिनैप्स (न्यूरॉन्स के संयोजक बिंदु) का बहुत तेज़ निर्माण और छँटाई; न्यूरल नेटवर्क की मज़बूत नींव स्थापित होती है; आगे चलकर संज्ञानात्मक क्षमता (cognition) की बुनियाद यहीं बनती है।

किशोरावस्था

9–32

मस्तिष्क की कनेक्टिविटी और दक्षता लगातार बढ़ती है; तर्क क्षमता, सीखने की क्षमता, सामाजिक समझ और निर्णय लेने जैसे कौशलों को मज़बूती मिलती है।

प्रारंभिक वयस्कता

32–66

मस्तिष्क एक स्थिर अवस्था में पहुँचता है; लगभग 32 वर्ष की उम्र में ब्रेन रीवायरिंग सर्वोच्च स्तर पर होती है; व्यक्तित्व और संज्ञानात्मक क्षमताएँ संतुलित व स्थिर अवस्था (plateau) पर रहती हैं।

प्रारंभिक वृद्धावस्था

66–83

मस्तिष्क की कनेक्टिविटी धीरे-धीरे कम होने लगती है; न्यूरल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की संवेदनशीलता और जोखिम बढ़ जाते हैं।

देर की वृद्धावस्था

83+

कनेक्टिविटी में तेज़ गिरावट देखी जाती है; मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के बीच सूचना-संचार कम होता है, जिससे कार्यात्मक अलगाव बढ़ता है; उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक जोखिम और चुनौतियाँ अधिक प्रकट होती हैं।

A recent study by researchers at University of Cambridge (MRC Cognition and Brain Sciences Unit)

महत्व और व्यावहारिक उपयोग:

        जीवनभर होने वाला परिवर्तन: मस्तिष्क का विकास रैखिक (सीधी रेखा जैसा) नहीं होता, बल्कि हर चरण में अलग-अलग संज्ञानात्मक, सामाजिक और जैविक ज़रूरतों के अनुसार बदलता है।

        लचीलापन और संवेदनशीलता: मस्तिष्क की कनेक्टिविटी किशोरावस्था और प्रारंभिक वयस्कता में चरम पर रहती है, जबकि 66 वर्ष के बाद यह धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह जानकारी शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और वृद्धावस्था से जुड़ी रणनीतियों के निर्माण में मदद करती है।

        जीवनभर सीखने की क्षमता: मस्तिष्क का संरचनात्मक लचीलापन (Plasticity) वृद्धावस्था तक बना रहता है, जिससे नई चीजें सीखना, पुनः-कौशल विकसित करना और पुनर्वास (Rehabilitation) संभव होता है।

        उम्र आधारित संज्ञानात्मक समझ: ये युग यह स्पष्ट करते हैं कि जीवन के अलग-अलग चरणों में किन क्षमताओं में peak प्रदर्शन होता है और किन क्षमताओं में उम्र के साथ गिरावट आती है।

        शोध और नीतियों के लिए आधार: यह मॉडल न्यूरोसाइंस, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेरन्टोलॉजी जैसे क्षेत्रों के लिए आधार प्रदान करता है। इससे मस्तिष्क की संरचना को संज्ञानात्मक प्रदर्शन, क्षमता और मानसिक लचीलापन के साथ जोड़ा जा सकता है।

मानव मस्तिष्क के बारे में:

    • मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का मुख्य अंग है। यह विचार, स्मृति, भावनाएँ, स्पर्श, मोटर कौशल, दृष्टि, श्वसन, तापमान और शरीर की कई अन्य क्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह खोपड़ी द्वारा सुरक्षित रहता है और सेरेब्रोस्पाइनल द्रव द्वारा संरक्षित होता है।
    • मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का प्रमुख अंग है। यह विचार, स्मृति, भावनाएँ, स्पर्श, गति (motor skills), दृष्टि, श्वसन, तापमान और शरीर की कई अन्य क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क खोपड़ी द्वारा सुरक्षित रहता है और इसे सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (Cerebrospinal Fluid) द्वारा भी संरक्षित किया जाता है।

प्रमुख भाग और उनकी भूमिकाएँ:

1.      सेरेब्रुम (Cerebrum)

·        मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग, जो दो गोलार्धों में विभाजित होता है।

·        सोच, स्मृति, भाषा, इंद्रियाँ और स्वैच्छिक गतिविधियों (voluntary movements) को नियंत्रित करता है।

2.     सेरेबेलम (Cerebellum)

·        संतुलन, मुद्रा (posture) और शारीरिक समन्वय (coordination) को नियंत्रित करता है।

3.     ब्रेनस्टेम (Brainstem – मिडब्रेन, पोंस, मेडुला)

        हृदय की धड़कन, श्वसन और पाचन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

        मस्तिष्क को रीढ़ की हड्डी से जोड़ता है।

4.    लिम्बिक सिस्टम (Limbic System – हिप्पोकैम्पस, अमिगडाला, हाइपोथैलेमस)

        भावनाओं, प्रेरणा, सीखने और स्मृति का नियमन करता है।

5.     थैलेमस (Thalamus)

        संवेदी और मोटर संकेतों का संचरण करता है।

        चेतना और नींद के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

6.    कॉर्पस कैलोसाम (Corpus Callosum)

        मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ गोलार्ध के बीच संचार स्थापित करता है।

निष्कर्ष:

मानव मस्तिष्क का विकास बहु-चरणीय है और यह जीवनभर जारी रहता है, यह कभी भी रैखिक (सीधी रेखा जैसा) नहीं होता। इन विकास चरणों को समझना शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक नीतियों और व्यक्तिगत विकास के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है। इस समझ से व्यक्ति अपनी न्यूरोप्लास्टिसिटी (मस्तिष्क की अनुकूलन क्षमता) का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकता है और जीवन के हर चरण में नई सोच, सीखने और कौशल विकास के अवसरों को बेहतर तरीके से अपना सकता है।