संदर्भ:
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं महासभा 12 जनवरी 2026 को अबू धाबी में संपन्न हुई। इस महासभा में विभिन्न देशों से 1,500 से अधिक मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए। महासभा के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण को तीव्र गति देने की वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराया गया तथा 2026–27 की अवधि के लिए एक मध्यमकालिक रणनीति और कार्य-कार्यक्रम को स्वीकृति दी गई। बैठक में, जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति और साझा वैश्विक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से बढ़ाने की आवश्यकता पर, विशेष ध्यान दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के बारे में:
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- अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) एक वैश्विक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2009 में की गई थी तथा इसका विधान वर्ष 2010 में प्रभावी हुआ। इसका मुख्यालय संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में स्थित है। यह संगठन नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक प्रसार और सतत विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करने का एक प्रमुख वैश्विक मंच है।
- IRENA विकसित एवं विकासशील, दोनों प्रकार के देशों को कम-कार्बन विकास, ऊर्जा सुरक्षा तथा सभी के लिए सुलभ और वहनीय ऊर्जा उपलब्धता के अनुरूप ऊर्जा संक्रमण की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करता है। भारत IRENA का एक संस्थापक सदस्य देश है।
- अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) एक वैश्विक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2009 में की गई थी तथा इसका विधान वर्ष 2010 में प्रभावी हुआ। इसका मुख्यालय संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में स्थित है। यह संगठन नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक प्रसार और सतत विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करने का एक प्रमुख वैश्विक मंच है।
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IRENA के प्रमुख कार्य और उद्देश्य:
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- सहयोग को प्रोत्साहन: नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी नीतियों, योजनाओं और रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु एक प्रभावी वैश्विक मंच प्रदान करना।
- ज्ञान केंद्र के रूप में भूमिका: नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, संसाधन क्षमता तथा सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों और विश्लेषण का संकलन एवं प्रसार करना।
- नीतिगत परामर्श: सरकारों को प्रभावी, समावेशी और व्यवहार्य नवीकरणीय ऊर्जा नीतिगत ढांचे तैयार करने तथा उनके सफल क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करना।
- क्षमता निर्माण: नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार हेतु देशों में आवश्यक मानव संसाधन, संस्थागत व्यवस्था और आधारभूत ढांचे के विकास में सहायता करना।
- सतत विकास को बढ़ावा: स्वच्छ ऊर्जा को आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुंच और कम-कार्बन विकास के लक्ष्यों के साथ एकीकृत करना।
- सहयोग को प्रोत्साहन: नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी नीतियों, योजनाओं और रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु एक प्रभावी वैश्विक मंच प्रदान करना।
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महासभा की प्रमुख बातें:
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- “मानवता को ऊर्जा प्रदान करना: साझा समृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा” विषय के अंतर्गत आयोजित इस महासभा में जलवायु संरक्षण और विकास संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के तीव्र और व्यापक विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
- महासभा के दौरान नीतिगत ढांचे, वित्तपोषण की व्यवस्थाएँ, डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ, सतत ईंधन, तथा ऊर्जा एवं खाद्य प्रणालियों के परस्पर एकीकरण जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने वर्ष 2025 में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 2.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड वैश्विक निवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की ओर वैश्विक संक्रमण अब अपरिवर्तनीय हो चुका है, किंतु पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप बने रहने के लिए इसकी गति को और अधिक तेज़ करना अनिवार्य है।
- “मानवता को ऊर्जा प्रदान करना: साझा समृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा” विषय के अंतर्गत आयोजित इस महासभा में जलवायु संरक्षण और विकास संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के तीव्र और व्यापक विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
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भारत और विश्व के लिए महत्व:
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- जलवायु लक्ष्य: महासभा से प्राप्त निष्कर्ष 1.5 डिग्री सेल्सियस के अनुरूप मार्ग पर बने रहने के लिए देशों द्वारा अपने जलवायु संबंधी लक्ष्यों और महत्वाकांक्षाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा: नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता में कमी आती है तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षा प्राप्त होती है।
- आर्थिक विकास: स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि और दीर्घकालिक सतत विकास को प्रोत्साहित करने की क्षमता रखता है।
- वैश्विक सहयोग: IRENA का बहुपक्षीय मंच प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, वित्तीय संसाधनों के समुचित जुटाव तथा देशों के बीच सर्वोत्तम अनुभवों और सफल मॉडलों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- जलवायु लक्ष्य: महासभा से प्राप्त निष्कर्ष 1.5 डिग्री सेल्सियस के अनुरूप मार्ग पर बने रहने के लिए देशों द्वारा अपने जलवायु संबंधी लक्ष्यों और महत्वाकांक्षाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं।
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निष्कर्ष:
16वीं IRENA महासभा द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करने की अपील इस वैश्विक समझ को दर्शाती है कि स्वच्छ ऊर्जा जलवायु परिवर्तन से निपटने, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बिंदु है। जैसे-जैसे देश डीकार्बनाइजेशन के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, IRENA की भूमिका, उसका विश्लेषणात्मक अनुभव और देशों को एक साथ लाने की क्षमता, सहयोग, नवाचार और समावेशी विकास पर आधारित एक सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में दुनिया का मार्गदर्शन करने में निर्णायक बनी रहेगी।

