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Blog / 10 Jan 2026

टेक्स-रैम्प्स योजना

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र क्षेत्र से संबंधित रिसर्च, असेसमेंट, मॉनिटरिंग, प्लानिंग और स्टार्ट-अप (Tex RAMPS) योजना के अंतर्गत 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन के प्रथम दिन संपन्न हुए, जिसका विषयभारत के वस्त्र: विकास, विरासत और नवाचार की बुनाई था।

टेक्स-रैम्प्स योजना के बारे में:

      • टेक्स-रैम्प्स एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे पूर्णतः भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित किया जाता है और जिसे भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त है। इस योजना का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, सुदृढ़ डेटा प्रणालियों, अनुसंधान तथा नवाचार के माध्यम से वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र को सशक्त बनाना है।
      • यह योजना वस्त्र क्षेत्र में लंबे समय से विद्यमान डेटा की कमी, अनुसंधान अवसंरचना, योजना निर्माण, निगरानी व्यवस्था तथा क्षमता विकास से संबंधित चुनौतियों को दूर करने का प्रयास करती है।

टेक्स-रैम्प्स के प्रमुख उद्देश्य:

      • अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना: क्षेत्र-विशेष अनुसंधान को प्रोत्साहित कर नीति निर्माण को सुदृढ़ बनाना और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि करना।
      • डेटा-आधारित योजना: वास्तविक समय में डेटा संग्रह और एकीकृत सांख्यिकीय प्रणालियों के माध्यम से बेहतर एवं सटीक निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना।
      • निगरानी और विश्लेषण को सशक्त बनाना: रणनीतिक नीति निर्माण के लिए प्रदर्शन की निगरानी और उन्नत विश्लेषण को सक्षम बनाना।
      • स्टार्ट-अप और नवाचार को प्रोत्साहन: स्टार्ट-अप्स, नए उत्पादों और उच्च मूल्य वाले निर्माण को प्रोत्साहित करना।
      • क्षेत्रीय क्षमताओं में वृद्धि: राज्यों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करने के माध्यम से क्षेत्रीय क्षमता का विकास करना।
      • वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक इस योजना के लिए कुल अनुमानित व्यय ₹305 करोड़ निर्धारित किया गया है।

समझौतों का मुख्य फोकस:

      • क्लस्टर एवं ज़िला स्तर की योजना: हथकरघा, हस्तशिल्प, परिधान तथा तकनीकी वस्त्र जैसे प्रमुख उपक्षेत्रों के लिए एकीकृत योजना निर्माण पर विशेष बल दिया गया है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन क्लस्टर और ज़िला स्तर पर किया जाएगा।
      • सहकारी संघवाद: राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से यह पहल सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करती है तथा वस्त्र क्षेत्र के विकास हेतु केंद्रराज्य सहयोग को मज़बूत बनाती है।
      • वित्तीय सहायता:
      • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अनुदान: योजना के अंतर्गत प्रत्येक भागीदार राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश को योजना से संबंधित गतिविधियों के संचालन हेतु प्रति वर्ष ₹12 लाख का अनुदान प्रदान किया जाएगा।
      • ज़िला कार्य योजना अनुदान: ज़िला स्तर पर कार्य योजनाओं के निर्माण तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रति ज़िला प्रति वर्ष ₹1 लाख की अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

वस्त्र क्षेत्र पर प्रभाव:

      • यह पहल सुदृढ़ डेटा अवसंरचना और उन्नत विश्लेषण के माध्यम से नीति निर्माण के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगी, जिससे नीतियाँ अधिक प्रभावी, लक्षित और समयानुकूल बन सकेंगी।
      • मज़बूत डेटा प्रणालियों और एकीकृत योजना के माध्यम से यह योजना वर्ष 2030 तक भारत के वस्त्र उद्योग को 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सरकार के लक्ष्य को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करती है।
      • ज़िला और क्लस्टर स्तर पर केंद्रित दृष्टिकोण से राष्ट्रीय रणनीतियों का स्थानीय क्षमताओं और विशिष्टताओं के साथ बेहतर समन्वय होगा, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता में वृद्धि होगी।
      • सुदृढ़ डेटा प्रणालियाँ वस्त्र क्षेत्र में लंबे समय से विद्यमान सांख्यिकीय कमियों को दूर करने के साथ-साथ वास्तविक समय में निगरानी और मूल्यांकन को संभव बनाएँगी।

निष्कर्ष:

टेक्स-रैम्प्स योजना के अंतर्गत हुए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर वस्त्र क्षेत्र को डेटा-आधारित शासन, एकीकृत योजना, अनुसंधान तथा नवाचार के माध्यम से आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। राज्यों के साथ सशक्त साझेदारी के ज़रिये वस्त्र मंत्रालय सहकारी संघवाद और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूती प्रदान करना चाहता है, जिससे आने वाले दशक में भारत का वस्त्र क्षेत्र सतत विकास, बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर हो सके।