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Blog / 06 Apr 2026

तेलंगाना, आरबीआई की नई ऋण रणनीति में शामिल: RBI BIS सुधार

सन्दर्भ:

हाल ही में, तेलंगाना उन नौ राज्यों (आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित) के समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई 'बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रैटेजी' (BIS) को अपनाया है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के लिए पायलट आधार पर शुरू किया गया यह सुधार राज्य विकास ऋण (State Development Loans - SDL) के बाजार में पारदर्शिता और तरलता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रैटेजी (BIS) क्या है?

अब तक, राज्यों की उधारी प्रक्रिया अक्सर असंगठित रहती थी, जिससे निवेशकों के लिए द्वितीयक बाजार (Secondary Market) में तरलता की कमी रहती थी। नई रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

      • मानकीकृत परिपक्वता अवधि (Standardized Tenors): राज्य अब 5 वर्ष, 10 वर्ष और 15 वर्ष जैसे विशिष्ट 'बेंचमार्क बकेट' में प्रतिभूतियां जारी करेंगे।
      • पूर्व-निर्धारित कैलेंडर: केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों (G-Secs) की तर्ज पर, राज्य एक निश्चित कैलेंडर का पालन करेंगे, जिससे निवेशकों को भविष्य की आपूर्ति के बारे में स्पष्टता मिलेगी।
      • तरलता में वृद्धि: बड़े और मानक आकार के बॉन्ड जारी करने से बाजार में उनकी खरीद-बिक्री आसान होगी, जिससे राज्यों के लिए उधार लेने की लागत (Yield) कम हो सकती है।

तेलंगाना के लिए इसका महत्व:

तेलंगाना के लिए इस सुधार का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य वर्तमान में ऋण प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है:

      • ऋण का पुनर्गठन (Debt Restructuring): तेलंगाना ने हाल के वर्षों में 10-12% की उच्च ब्याज दर वाले पुराने ऋणों को चुकाने के लिए RBI तंत्र का उपयोग किया है और उन्हें 7% से 7.5% की कम दर वाले नए ऋणों से बदला है।
      • ऋण का बोझ: वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में, तेलंगाना ने लगभग ₹48,000 करोड़ जुटाए। हालांकि, इस राशि का एक बड़ा हिस्सा (लगभग ₹32,303 करोड़) पिछले ऋणों के पुनर्भुगतान और कालेश्वरम जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के ब्याज भुगतान में चला गया।
      • CAG की चिंताएं: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों ने संकेत दिया है कि राज्य अपनी दैनिक परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 'विशेष आहरण सुविधा' (SDF) और 'अर्थोपाय अग्रिम' (Ways and Means Advances - WMA) जैसे अल्पकालिक ऋणों पर अत्यधिक निर्भर रहा है।

इस सुधार के संभावित लाभ:

      • ब्याज बोझ में कमी: लंबी अवधि (30 वर्ष तक) और कम ब्याज दरों पर ऋण प्राप्त होने से राज्य के खजाने पर तत्काल वित्तीय दबाव कम होगा।
      • निवेशक आधार का विस्तार: मानक बॉन्ड होने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) और पेंशन फंड जैसे बड़े संस्थान राज्यों के ऋण में निवेश करने के लिए अधिक प्रोत्साहित होंगे।
      • वित्तीय अनुशासन: RBI की इस सख्त और पारदर्शी रणनीति से राज्यों में राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अनुशासन बढ़ेगा।

चुनौतियां:

यद्यपि यह रणनीति उधारी तंत्र को आधुनिक बनाती है, लेकिन यह राज्यों की बुनियादी वित्तीय समस्याओं (जैसे बढ़ता राजस्व घाटा) का समाधान नहीं है। तेलंगाना जैसे राज्यों के लिए केवल ऋण की संरचना बदलना पर्याप्त नहीं है; उन्हें अपने स्वयं के कर राजस्व (SOTR) को बढ़ाने और गैर-उत्पादक व्यय को नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष:

RBI की 'बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रैटेजी' सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ केंद्रीय बैंक राज्यों को उनके ऋण प्रबंधन में पेशेवर विशेषज्ञता प्रदान कर रहा है। तेलंगाना का इसमें शामिल होना राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।