संदर्भ:
हाल ही में, स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर 7 सितंबर 2026 को 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार 2026 प्रदान किए गए। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद इंदौर और जबलपुर रहे।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण क्या है?
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- यह शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रयासों का वार्षिक मूल्यांकन है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 2022-23 में शुरू किया।
- इसे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत लागू किया जाता है।
- शहरों का मूल्यांकन शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं (CAPs) के क्रियान्वयन तथा वायु प्रदूषण कम करने के उपायों के आधार पर किया जाता है।
- 2026 में शहरों का मूल्यांकन तीन जनसंख्या श्रेणियों में किया गया:
- 10 लाख से अधिक
- 3–10 लाख
- 3 लाख से कम
- 10 लाख से अधिक
- मूल्यांकन में शहर का स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तरीय निगरानी, CPCB मूल्यांकन तथा स्वतंत्र क्षेत्रीय सत्यापन शामिल हैं।
- यह शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रयासों का वार्षिक मूल्यांकन है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 2022-23 में शुरू किया।
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2026 के प्रमुख परिणाम:
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श्रेणी |
प्रथम |
द्वितीय |
तृतीय |
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10 लाख से अधिक |
लखनऊ |
इंदौर |
जबलपुर |
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3–10 लाख |
राउरकेला |
फिरोजाबाद एवं गुंटूर |
अमरावती |
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3 लाख से कम |
कलिंगनगर |
अंगुल |
तालचेर |
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- लखनऊ ने विद्युत चालित कचरा संग्रहण वाहनों, यंत्रीकृत सड़क सफाई, पुराने कचरे के प्रबंधन, बेहतर कचरा संग्रहण, कचरा जलाने पर रोक तथा हरित क्षेत्रों के विस्तार के माध्यम से अपनी रैंकिंग में सुधार किया।
- हालाँकि, लखनऊ में वार्षिक PM10 सांद्रता अभी भी राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) के 60 µg/m³ से अधिक है। फिर भी यह 2017-18 के 250 µg/m³ से घटकर 137 µg/m³ हो गई है।
- लखनऊ ने विद्युत चालित कचरा संग्रहण वाहनों, यंत्रीकृत सड़क सफाई, पुराने कचरे के प्रबंधन, बेहतर कचरा संग्रहण, कचरा जलाने पर रोक तथा हरित क्षेत्रों के विस्तार के माध्यम से अपनी रैंकिंग में सुधार किया।
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प्रमुख मूल्यांकन मानदंड:
सर्वेक्षण में निम्नलिखित का मूल्यांकन किया जाता है:
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- सड़क एवं मिट्टी की धूल का प्रबंधन
- वाहनों एवं उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट
- नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- खुले में कचरा जलाना
- शहरी हरित क्षेत्र
- स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं का क्रियान्वयन
- सड़क एवं मिट्टी की धूल का प्रबंधन
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महत्वपूर्ण रूप से, PM10 में कमी का भार केवल 2.5% है। इससे स्पष्ट है कि सर्वेक्षण मुख्य रूप से केवल मापी गई वायु प्रदूषण मात्रा के आधार पर शहरों की रैंकिंग करने के बजाय प्रदूषण नियंत्रण उपायों की गुणवत्ता और उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करता है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से संबंध:
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- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जनवरी 2019 में शुरू किया गया था। इसमें 130 शहर शामिल हैं और इसका उद्देश्य 2025-26 तक PM10 स्तरों में 40% तक कमी लाना या राष्ट्रीय मानक प्राप्त करना है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में 130 में से 108 NCAP शहरों में 2017-18 की तुलना में वार्षिक PM10 स्तरों में कमी दर्ज की गई, जबकि 14 शहरों ने राष्ट्रीय मानक प्राप्त किया।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जनवरी 2019 में शुरू किया गया था। इसमें 130 शहर शामिल हैं और इसका उद्देश्य 2025-26 तक PM10 स्तरों में 40% तक कमी लाना या राष्ट्रीय मानक प्राप्त करना है।
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महत्व:
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- शहरों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है।
- वैज्ञानिक एवं मापनीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन को प्रोत्साहित करता है।
- शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूत करता है।
- वायु प्रदूषण नियंत्रण को कचरा प्रबंधन, परिवहन और शहरी नियोजन से जोड़ता है।
- नागरिक भागीदारी एवं वार्ड-स्तरीय कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है।
- शहरों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है।
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चुनौतियाँ:
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- प्रमुख शहरों में PM10 का लगातार मानक से अधिक रहना।
- वाहन उत्सर्जन और सड़क की धूल का महत्वपूर्ण स्रोत बने रहना।
- शहरी स्थानीय निकायों की संस्थागत एवं तकनीकी क्षमता में असमानता।
- विशेषकर सर्दियों में मौसमी प्रदूषण में वृद्धि।
- प्रदूषण के स्रोतों एवं परिणामों की बेहतर निगरानी की आवश्यकता।
- प्रमुख शहरों में PM10 का लगातार मानक से अधिक रहना।
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निष्कर्ष:
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण केवल प्रदूषण मापने के बजाय शासन और क्रियान्वयन क्षमता के मूल्यांकन की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। लखनऊ का प्रदर्शन बताता है कि कचरा प्रबंधन, परिवहन, धूल नियंत्रण और शहरी नियोजन में निरंतर प्रयास से सुधार संभव है, लेकिन राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

