सन्दर्भ:
हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को यौन अपराधों के विरुद्ध निवारक तंत्र को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसमें संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी के लिए 24 घंटे निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित करना भी शामिल है। ये निर्देश दिल्ली-NCR में हाल के यौन अपराधों से संबंधित स्वतः संज्ञान कार्यवाही के दौरान दिए गए।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश:
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- संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी करने और पुलिस द्वारा त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित करना।
- पार्कों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवहन केंद्रों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास बीट गश्त को मजबूत करना।
- CCTV फुटेज की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना, विशेष रूप से उन स्थानों के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर जहाँ पूर्ण कवरेज संभव नहीं है।
- अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, निगरानी या पुलिस उपस्थिति वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और मानचित्रण करना।
- पूर्ववृत्त सत्यापन और बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों की पहचान के लिए यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डेटाबेस (NDSO) का अधिक उपयोग करना।
- समयबद्ध जाँच की निगरानी के लिए यौन अपराधों के लिए जाँच ट्रैकिंग प्रणाली (ITSSO) का प्रभावी उपयोग करना।
- 112 और महिला हेल्पलाइन सहित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना।
- यह सुनिश्चित करना कि मौजूदा योजनाएँ और अवसंरचना केवल कागजों पर मौजूद न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से कार्यरत हों।
- संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी करने और पुलिस द्वारा त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित करना।
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यौन अपराधों का विधायी ढाँचा:
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023:
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- धारा 63 – बलात्कार: बलात्कार को परिभाषित करती है और बिना सहमति के यौन कृत्यों को गठित करने वाली परिस्थितियों को निर्दिष्ट करती है।
- धारा 64–70: बलात्कार, गंभीर प्रकृति के बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के लिए दंड का प्रावधान करती हैं, जिसमें कारावास से लेकर निर्दिष्ट गंभीर मामलों में आजीवन कारावास/मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
- धारा 69: छलपूर्ण साधनों से यौन संबंध को एक विशिष्ट अपराध बनाती है। इसमें विवाह करने के वादे को पूरा करने का इरादा न होने के बावजूद उस वादे के माध्यम से यौन संबंध बनाना या कुछ अन्य प्रकार के छल शामिल हैं; इसकी सजा 10 वर्ष तक हो सकती है।
- धारा 74–79: महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला, यौन उत्पीड़न, निर्वस्त्र करने, ताक-झाँक (वॉयूरिज्म) और पीछा करने (स्टॉकिंग) जैसे अपराधों को शामिल करती हैं।
- धारा 63 – बलात्कार: बलात्कार को परिभाषित करती है और बिना सहमति के यौन कृत्यों को गठित करने वाली परिस्थितियों को निर्दिष्ट करती है।
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महत्व:
न्यायालय का दृष्टिकोण केवल अपराध होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों के मानचित्रण और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से अपराध की रोकथाम पर जोर देता है।
यह निम्नलिखित की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है:
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- जवाबदेह पुलिस व्यवस्था
- सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन
- बेहतर शहरी नियोजन
- लैंगिक रूप से संवेदनशील पुलिस व्यवस्था
- प्रौद्योगिकी आधारित अपराध रोकथाम
- कानून प्रवर्तन में जनता का विश्वास
- जवाबदेह पुलिस व्यवस्था
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चुनौतियाँ:
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- CCTV अवसंरचना कई बार गैर-कार्यात्मक या अपर्याप्त रूप से निगरानी की स्थिति में रह सकती है।
- पुलिस कर्मियों की कमी लगातार गश्त को सीमित कर सकती है।
- खराब प्रकाश व्यवस्था और असुरक्षित शहरी डिजाइन संवेदनशील स्थानों का निर्माण करते हैं।
- डेटाबेस और तकनीकी प्रणालियाँ तभी उपयोगी हैं जब उनमें उपलब्ध जानकारी कानूनसम्मत निवारक कार्रवाई में परिवर्तित हो।
- पुलिस, परिवहन प्राधिकरणों, स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय की कमी प्रतिक्रिया में देरी कर सकती है।
- CCTV अवसंरचना कई बार गैर-कार्यात्मक या अपर्याप्त रूप से निगरानी की स्थिति में रह सकती है।
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आगे की राह:
भारत को संवेदनशील क्षेत्रों के मानचित्रण, 24×7 निगरानी, प्रभावी आपातकालीन प्रणालियों और त्वरित प्रतिक्रिया पर आधारित निवारक और समुदाय-केंद्रित पुलिस व्यवस्था अपनाने की आवश्यकता है। प्रौद्योगिकी को पर्याप्त पुलिस उपस्थिति का स्थान लेने के बजाय उसका पूरक होना चाहिए। नियमित ऑडिट, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और नागरिकों की प्रतिक्रिया यह सुनिश्चित कर सकती है कि सुरक्षा उपाय वास्तविक सुरक्षा में परिवर्तित हों।
निष्कर्ष:
सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह रेखांकित करता है कि यौन अपराधों से निपटने के लिए केवल अपराध के बाद जाँच और दंड पर्याप्त नहीं हैं। रोकथाम, निगरानी, उत्तरदायी पुलिस व्यवस्था, सुरक्षित शहरी अवसंरचना और संस्थागत जवाबदेही का संयोजन यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि महिलाएँ और बच्चे बिना भय के सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच सकें।
