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Blog / 09 May 2026

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर अध्ययन

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर अध्ययन

संदर्भ:

हाल ही में NREGA संघर्ष मोर्चा द्वारा जारी और LibTech India द्वारा तैयार एक अध्ययन में बताया गया है कि वर्ष 2025–26 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के संचालन के पैमाने में उल्लेखनीय कमी आई है।

अध्ययन के प्रमुख बिंदु:

      • अध्यन के अनुसार पंजीकृत परिवारों की संख्या 14.98 करोड़ से बढ़कर 15.46 करोड़ हो गई, फिर भी MGNREGS के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है। 2024–25 की तुलना में 44 लाख कम परिवारों और 67 लाख कम श्रमिकों को रोजगार मिला। मानव दिवसों (persondays) में 21.5% की कमी आई, जो 268.44 करोड़ से घटकर 210.73 करोड़ रह गई। साथ ही, प्रति परिवार औसत मानव दिवस 50.18 से घटकर 42.92 हो गया।
      • इसके अलावा, 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों में 40.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई, और प्रति परिवार औसत आय में लगभग ₹1,221 की कमी आई। यह गिरावट व्यापक रही, जिसमें 20 प्रमुख राज्यों में से 15 राज्यों ने मानव दिवसों में कमी दर्ज की। तमिलनाडु और हरियाणा में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जबकि केवल कुछ ही राज्यों में मामूली सुधार देखने को मिला।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के बारे में:

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में पारित एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून है, जो भारत में ग्रामीण परिवारों को कानूनी रूप से काम का अधिकारप्रदान करता है। यह दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक रोजगार कार्यक्रमों में से एक है।

उद्देश्य:

MGNREGA का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, रोजगार की गारंटी दी जाती है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष 100 दिन के गारंटीकृत वेतन रोजगार की व्यवस्था
      • मांग-आधारित प्रणाली: मांग करने के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य
      • कार्य न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान
      • कानूनी अधिकार-आधारित ढांचा
      • ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकृत (decentralised) क्रियान्वयन
      • महिलाओं की कम से कम एक-तिहाई भागीदारी (व्यवहार में अक्सर अधिक)
      • वेतन का भुगतान सीधे बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से
      • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)

MGNREGS से VB-G RAM G Act, 2025 तक:

विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 ग्रामीण रोजगार नीति में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • गारंटीकृत कार्य 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया
      • मांग-आधारित प्रणाली से हटकर आपूर्ति-आधारित आवंटन की ओर बदलाव
      • केंद्रराज्य वित्त पोषण अनुपात 60:40
      • 15 दिन के चक्र की जगह साप्ताहिक वेतन भुगतान
      • कृषि के चरम मौसम में 60 दिनों का कार्य विराम
      • परिसंपत्ति निर्माण, अवसंरचना विकास और कौशल विकास पर जोर
      • AI आधारित निगरानी और GPS टैगिंग का उपयोग

अध्ययन का महत्व:

      • ग्रामीण संकट का संकेत: पंजीकरण में वृद्धि के बावजूद रोजगार में गिरावट ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रोजगार अवशोषण क्षमता में कमी को दर्शाती है, जो ग्रामीण संकट का संकेत है।
      • उपभोग पर प्रभाव: कार्य दिवसों में कमी से ग्रामीण आय में गिरावट आती है, जिससे ग्रामीण मांग और समग्र उपभोग स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
      • क्षेत्रीय असमानता: राज्यों के बीच असमान प्रदर्शन MGNREGS के क्रियान्वयन में विद्यमान खामियों और प्रशासनिक विविधताओं को उजागर करता है।
      • नीतिगत संक्रमण जोखिम: यह गिरावट एक व्यापक संरचनात्मक पुनर्गठन के साथ मेल खाती है, जिससे नीति के संक्रमण काल में स्थिरता एवं प्रभावशीलता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

निष्कर्ष:

2025–26 में MGNREGS में आई तेज गिरावट ग्रामीण रोजगार सृजन की गहरी चुनौतियों को दर्शाती है, वह भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के समय। यद्यपि नया प्रस्तावित ढांचा ग्रामीण रोजगार सृजन को आधुनिक और पुनर्गठित करने का प्रयास करता है, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह MGNREGS के मूल सिद्धांत, ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा की कानूनी गारंटी को बनाए रख पाता है या नहीं।

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