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Blog / 09 Mar 2026

सीएमएस के परिशिष्ट I और II में धारीदार लकड़बग्घा (Striped Hyena)

संदर्भ:

हाल ही में ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने प्रस्ताव दिया है कि धारीदार लकड़बग्घा (Striped Hyena – Hyaena hyaena) को वन्य प्राणियों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (CMS) के परिशिष्ट I और II में शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव पर चर्चा 23–29 मार्च 2026 को कैंपो ग्रांडे, ब्राज़ील में होने वाली CMS COP15 बैठक में की जाएगी।

धारीदार लकड़बग्घा के बारे में:

धारीदार लकड़बग्घा एक मध्यम आकार का मांसाहारी स्तनधारी है, जो हायनीडे (Hyaenidae) परिवार से संबंधित है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला लकड़बग्घा की एकमात्र प्रजाति है। यह प्रकृति में मृत जीवों को खाकर सफाई करने वाला (scavenger) होने के कारण पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • वैज्ञानिक नाम: Hyaena hyaena
      • यह प्रायः रात्रिचर (Nocturnal) होता है और आसानी से दिखाई नहीं देता।
      • इसके शरीर पर ग्रे रंग के कोट पर काली धारियां जैसी आकृति होती हैं तथा पीठ पर लंबी अयाल (mane) होती है।
      • इसके मजबूत जबड़े हड्डियों को भी तोड़ सकते हैं
      • यह मुख्य रूप से मरे हुए जानवरों (carrion) को खाता है, लेकिन छोटे जानवरों का शिकार भी कर सकता है।

आवास और वितरण:

      • धारीदार लकड़बग्घा दुनिया के कई क्षेत्रों में पाया जाता है:
        • उत्तर और उप-सहारा अफ्रीका
        • मध्य पूर्व
        • मध्य एशिया
        • दक्षिण एशिया (जिसमें भारत भी शामिल है)
      • यह सामान्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र में निवास करता है, जैसे:
        • सवाना
        • घास के मैदान
        • अर्ध-मरुस्थल
        • खुले वन क्षेत्र
        • पथरीले पर्वतीय क्षेत्र

संरक्षण स्थिति:

      • IUCN रेड लिस्ट: निकट संकटग्रस्त (Near Threatened)
      • भूमध्यसागरीय क्षेत्र: Vulnerable (असुरक्षित)
      • भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित (सर्वोच्च संरक्षण)।

मुख्य खतरे:

      • धारीदार लकड़बग्घा को अपने पूरे क्षेत्र में कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ रहा है:
        • कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण आवास का नष्ट होना और विखंडन
        • शिकार प्रजातियों की संख्या में कमी और पशुपालन की बदलती पद्धतियाँ।
        • समुदायों में नकारात्मक धारणा के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्रताड़ना
        • अवैध शिकार और अवैध व्यापार
      • इन कारणों से कई क्षेत्रों में इसकी आबादी लगातार घट रही है।

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन (CMS):

यह रिपोर्ट प्रवासी वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन (CMS) के अंतर्गत तैयार की गई है। यह 1979 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत अपनाई गई एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सीमाओं के पार प्रवासी जानवरों और उनके आवासों का संरक्षण करना है।

      • दो प्रमुख परिशिष्ट:
        • परिशिष्ट–I: इसमें संकटग्रस्त प्रवासी प्रजातियाँ शामिल होती हैं और इनके लिए कड़ी सुरक्षा आवश्यक होती है, जैसे आवास का पुनर्स्थापन और शिकार पर प्रतिबंध।
        • परिशिष्ट–II: इसमें वे प्रजातियाँ शामिल होती हैं जिनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है।

भारत के लिए महत्व:

      • भारत में धारीदार लकड़बग्घा की अच्छी-खासी आबादी विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में पाई जाती है।
      • यदि इसे CMS के परिशिष्टों में शामिल किया जाता है, तो
        • सीमा-पार संरक्षण बेहतर बनाया जा सकेगा।
        • एशिया के देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा।
        • उन खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण को समर्थन मिलेगा जहाँ यह प्रजाति पाई जाती है।

निष्कर्ष:

ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान द्वारा धारीदार लकड़बग्घा को CMS के परिशिष्ट I और II में शामिल करने का प्रस्ताव इस प्रजाति की घटती आबादी और बिखरते आवासों को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। यदि CMS COP15 में यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो कड़े संरक्षण उपायों और बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी और इस पारिस्थितिकी रूप से महत्वपूर्ण मृतभक्षी प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।