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Blog / 17 Oct 2026

विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी चुनावों से पहले 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की। इस पुनरीक्षण में 1 जनवरी, 2027 को अर्हक तिथि के रूप में उपयोग किया जाएगा। यह घोषणा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच की गई है।

विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) क्या है?

विशेष सारांश पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा संचालित मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूचियाँ सटीक, पूर्ण और अद्यतन रहें।

इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  • उन नागरिकों का पंजीकरण करना, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है और मतदाता पात्रता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • मौजूदा निर्वाचन अभिलेखों में त्रुटियों को सुधारना।
  • उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए दोहरी प्रविष्टियों तथा मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना।
  • दावों और आपत्तियों के माध्यम से जनभागीदारी को सुगम बनाना।

इस प्रक्रिया में बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन, प्रारूप मतदाता सूचियों का प्रकाशन तथा नागरिकों को सुधार के लिए आवेदन करने के अवसर प्रदान करना शामिल हो सकता है।

निर्वाचन आयोग की घोषणा का क्या अर्थ है?

SSR में निम्नलिखित 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल।

घोषित प्रमुख तिथियाँ निम्नलिखित हैं:

  • 12 नवंबर, 2026: प्रारूप मतदाता सूचियों का प्रकाशन।
  • 11 दिसंबर, 2026: दावों और आपत्तियों की अंतिम तिथि।
  • 4 जनवरी, 2027: अंतिम मतदाता सूचियों का प्रकाशन।

अर्हक तिथि यह निर्धारित करती है कि कोई नागरिक मतदाता पंजीकरण के लिए आयु संबंधी आवश्यकता को पूरा करता है या नहीं। पात्र नागरिक अपना नाम शामिल कराने, विवरण में सुधार कराने या अपना मतदाता पंजीकरण स्थानांतरित कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

SSR और SIR के बीच अंतर:

आधार

विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR)

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)

प्रकृति

मौजूदा मतदाता सूचियों का आवधिक अद्यतन

व्यापक गणना और सत्यापन

मौजूदा मतदाता

नाम सामान्यतः प्रारूप मतदाता सूची में यथावत रखे जाते हैं

मौजूदा मतदाताओं के लिए गणना प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है

दस्तावेज़ीकरण

प्रत्येक मौजूदा मतदाता के लिए नए दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की कोई सार्वभौमिक अनिवार्यता नहीं

लागू प्रक्रियाओं के अंतर्गत अतिरिक्त दस्तावेज़ों की आवश्यकता हो सकती है

मुख्य उद्देश्य

अभिलेखों को अद्यतन करना और त्रुटियों को सुधारना

मतदाता सूचियों का अधिक व्यापक पुनरीक्षण करना

प्रक्रिया

दावे, आपत्तियाँ और सत्यापन

गहन गणना, सत्यापन और जाँच

मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण प्रपत्र:

  • प्रपत्र 6: नए मतदाता को शामिल करने के लिए आवेदन।
  • प्रपत्र 7: किसी प्रविष्टि को हटाने या किसी प्रविष्टि को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए आवेदन।
  • प्रपत्र 8: मतदाता सूची के विवरण में सुधार या निवास स्थान के स्थानांतरण के लिए आवेदन।

ये प्रपत्र मतदाता अभिलेखों को सटीक बनाए रखने में सहायता करते हैं।

संवैधानिक और कानूनी ढाँचा:

  • अनुच्छेद 324: निर्वाचन आयोग (ECI) को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950: मतदाता सूचियों के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है।
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960: मतदाता सूचियों को तैयार करने और उनका पुनरीक्षण करने की प्रक्रियाएँ निर्धारित करता है।

निष्कर्ष:

SSR और SIR दोनों का साझा उद्देश्य विश्वसनीय मतदाता सूचियों को बनाए रखना है, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली और गहनता में अंतर है। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और भारतीय लोकतंत्र की अखंडता की रक्षा के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया का पारदर्शी, समावेशी और कानून के अनुरूप होना आवश्यक है।

 

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