संदर्भ:
हाल ही में स्पेन औपचारिक रूप से इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (आईपीओआई) में शामिल हुआ है। यह भारत के नेतृत्व में शुरू की गई समुद्री सहयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे भारत–स्पेन रणनीतिक संबंधों में एक नया आयाम जुड़ गया है। यह घटनाक्रम वर्ष 2026 में भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर के साथ मेल खाता है। इसी संदर्भ में भारत–स्पेन द्विपक्षीय सांस्कृतिक, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष की शुरुआत भी की गई है, जो दोनों देशों के संबंधों की व्यापक और बहुआयामी प्रकृति को दर्शाता है।
इंडो-पैसिफिक महासागर पहल के बारे में:
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- इंडो-पैसिफिक महासागर पहल की शुरुआत भारत द्वारा नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक गैर-संधि आधारित और स्वैच्छिक ढांचा है, जिसका उद्देश्य समान सोच रखने वाले देशों के बीच व्यावहारिक और परिणामोन्मुख सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित बनाया जा सके।
- इसके प्रमुख विषयगत स्तंभों में समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, तथा व्यापार और संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
- यह पहल भारत की सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की दृष्टि पर आधारित है तथा समुद्री स्थिरता, सतत विकास और क्षमता निर्माण के लिए साझा जिम्मेदारी पर जोर देती है। इसका उद्देश्य सहयोग को बढ़ाना है, न कि किसी प्रकार के औपचारिक सैन्य गठबंधन का गठन करना।
- इंडो-पैसिफिक महासागर पहल की शुरुआत भारत द्वारा नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक गैर-संधि आधारित और स्वैच्छिक ढांचा है, जिसका उद्देश्य समान सोच रखने वाले देशों के बीच व्यावहारिक और परिणामोन्मुख सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित बनाया जा सके।
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आईपीओआई में स्पेन के शामिल होने का महत्व:
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- रणनीतिक सामंजस्य: स्पेन की भागीदारी भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि के प्रति उसके समर्थन को दर्शाती है तथा नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
- बहुपक्षवाद: यह पहल गठबंधन-आधारित सुरक्षा ढांचों के बजाय सहयोगात्मक, समावेशी और बहुपक्षीय दृष्टिकोण को मजबूत करती है।
- यूरोपीय संघ का आयाम: इससे इंडो-पैसिफिक मामलों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहभागिता बढ़ती है तथा भारत–यूरोपीय संघ रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलती है।
- समुद्री प्रशासन: समुद्री सततता, आपदा प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों के लिए नए अवसर सृजित होते हैं।
- रणनीतिक सामंजस्य: स्पेन की भागीदारी भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि के प्रति उसके समर्थन को दर्शाती है तथा नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
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भारत–स्पेन संबंध के बारे में:
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- राजनयिक संबंध:
- भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी।
- भारत का राजनयिक मिशन मैड्रिड में 1958 में खोला गया तथा 1965 में पहले स्थायी भारतीय राजदूत की नियुक्ति की गई।
- दोनों देशों के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास पर आधारित रहे हैं तथा सामान्यतः सौहार्दपूर्ण और स्थिर बने हुए हैं।
- भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी।
- आर्थिक और व्यापारिक संबंध:
- स्पेन, यूरोपीय संघ में भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2017–18 में द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य लगभग 5.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत को व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ।
- भारत के प्रमुख निर्यातों में वस्त्र, जैविक रसायन, लोहा एवं इस्पात, समुद्री खाद्य उत्पाद, वाहन तथा चमड़े के उत्पाद शामिल हैं।
- भारत के प्रमुख आयातों में यांत्रिक उपकरण, विद्युत मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और खनिज ईंधन प्रमुख हैं।
- स्पेन, यूरोपीय संघ में भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- राजनयिक संबंध:
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निष्कर्ष:
इंडो-पैसिफिक महासागर पहल में स्पेन की भागीदारी भारत–स्पेन संबंधों के साथ-साथ स्थिर और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए वैश्विक सहयोग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सुरक्षा, बहुपक्षवाद और समुद्री प्रशासन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य को दर्शाती है तथा क्षेत्रीय सहयोग में भारत की एक प्रमुख और जिम्मेदार भूमिका को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार होगा, इंडो-पैसिफिक महासागर पहल में स्पेन की सहभागिता एक स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने में साझा हितों को और मजबूत करेगी।

