संदर्भ:
हाल ही में स्पेन ने बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए नियमों को और अधिक सख़्त करने की वैश्विक पहल में शामिल होने का निर्णय लिया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने 3 फ़रवरी 2026 को दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के दौरान घोषणा की कि उनकी सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नाबालिगों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखना तथा युवाओं के लिए एक अधिक सुरक्षित और संतुलित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है।
स्पेन यह कदम क्यों उठा रहा है?
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- ऑनलाइन खतरों से सुरक्षा: स्पेन सरकार के अनुसार, बच्चों को इंटरनेट पर कई गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:
- अश्लील और यौन शोषण से संबंधित सामग्री, जिसमें हानिकारक कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित सामग्री भी शामिल है।
- घृणास्पद भाषण, भ्रामक सूचनाओं और हिंसक सामग्री के संपर्क में आना।
- मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक विकास पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव।
- प्रधानमंत्री सांचेज़ ने सोशल मीडिया को एक “डिजिटल वाइल्ड वेस्ट” की संज्ञा दी है, जहां बच्चे पर्याप्त सुरक्षा के बिना जटिल डिजिटल दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं।
- अश्लील और यौन शोषण से संबंधित सामग्री, जिसमें हानिकारक कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित सामग्री भी शामिल है।
- ऑनलाइन खतरों से सुरक्षा: स्पेन सरकार के अनुसार, बच्चों को इंटरनेट पर कई गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:
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स्पेन के प्रस्ताव के मुख्य प्रावधान:
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- आयु प्रतिबंध:
- 16 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर खाता बनाने या उनका उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को प्रभावी और मज़बूत आयु-सत्यापन प्रणालियां लागू करनी होंगी, जो केवल साधारण टिक-बॉक्स तक सीमित न हों।
- यह प्रतिबंध संसद में विचाराधीन मौजूदा डिजिटल सुरक्षा क़ानूनों के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
- 16 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर खाता बनाने या उनका उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
- व्यापक डिजिटल सुरक्षा सुधार:
- अवैध सामग्री को हटाने में विफल रहने की स्थिति में सोशल मीडिया कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी।
- हानिकारक या अवैध सामग्री को बढ़ावा देने वाले एल्गोरिदम को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।
- घृणास्पद भाषण और ऑनलाइन ध्रुवीकरण पर निगरानी रखने के लिए नए उपाय लागू किए जाएंगे।
- अवैध सामग्री को हटाने में विफल रहने की स्थिति में सोशल मीडिया कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी।
- आयु प्रतिबंध:
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अंतरराष्ट्रीय संदर्भ:
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- ऑस्ट्रेलिया: दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बना। यह व्यवस्था ऑनलाइन सुरक्षा संशोधन अधिनियम के तहत लागू की गई, जिसमें नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर दंड का प्रावधान है।
- फ़्रांस: फ़्रांस ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला क़ानून पारित किया है, जो वर्ष 2026 से लागू होगा। इसके साथ ही स्कूलों में मोबाइल फ़ोन के उपयोग को सीमित करने के प्रयास भी किए गए हैं।
- यूरोप में व्यापक रुझान: डेनमार्क और यूनाइटेड किंगडम के कुछ हिस्सों सहित कई यूरोपीय देश भी ऐसे ही कदमों पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह एक व्यापक यूरोपीय प्रवृत्ति के रूप में उभर रही है।
- ऑस्ट्रेलिया: दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बना। यह व्यवस्था ऑनलाइन सुरक्षा संशोधन अधिनियम के तहत लागू की गई, जिसमें नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर दंड का प्रावधान है।
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चुनौतियां और व्यावहारिक पहलू:
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- आयु सत्यापन और अनुपालन: प्रभावी आयु-सत्यापन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है और इससे निजता से जुड़े प्रश्न भी उत्पन्न होते हैं।
- क़ानूनी बाधाएं: स्पेन सरकार के पास संसद में पूर्ण बहुमत नहीं है, इसलिए इस प्रस्ताव के लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन आवश्यक होगा।
- अधिकारों का संतुलन: आलोचकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकते हैं और डिजिटल साक्षरता जैसे वैकल्पिक उपायों से ध्यान भटका सकते हैं।
- आयु सत्यापन और अनुपालन: प्रभावी आयु-सत्यापन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है और इससे निजता से जुड़े प्रश्न भी उत्पन्न होते हैं।
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निष्कर्ष:
स्पेन द्वारा प्रस्तावित यह प्रतिबंध बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया और फ़्रांस के मार्ग का अनुसरण करते हुए स्पेन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नाबालिगों के प्रति ज़िम्मेदारी को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही यह पहल बाल सुरक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता और सरकारी विनियमन के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। इस प्रस्ताव के बच्चों, तकनीकी कंपनियों और संपूर्ण समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है।

