संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एसएमई ग्रोथ फंड (SME Growth Fund- SGF) की स्थापना के लिए सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपये के योगदान को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े संभावनाशील लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को दीर्घकालिक विकास पूंजी उपलब्ध कराना है।
एसएमई ग्रोथ फंड के बारे में:
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- एसएमई ग्रोथ फंड एक वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के माध्यम से प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश उपलब्ध कराएगा। पारंपरिक बैंक ऋणों के विपरीत, इक्विटी पूंजी से तत्काल पुनर्भुगतान का बोझ नहीं बनता है और इसलिए यह विस्तार की तलाश कर रहे उद्यमों को दीर्घकालिक एवं धैर्यपूर्ण पूंजी (Patient Capital) उपलब्ध करा सकती है।
- इस कोष से विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, उत्पादकता में सुधार करने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
- यह द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों (Tier-II और Tier-III Cities) में स्थित औद्योगिक क्लस्टरों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर अधिक संतुलित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- एसएमई ग्रोथ फंड एक वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के माध्यम से प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश उपलब्ध कराएगा। पारंपरिक बैंक ऋणों के विपरीत, इक्विटी पूंजी से तत्काल पुनर्भुगतान का बोझ नहीं बनता है और इसलिए यह विस्तार की तलाश कर रहे उद्यमों को दीर्घकालिक एवं धैर्यपूर्ण पूंजी (Patient Capital) उपलब्ध करा सकती है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्व:
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- यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि MSME भारत की गैर-कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनका भारत के GDP में लगभग 31.1%, विनिर्माण उत्पादन में 35.4% और निर्यात में 48.58% योगदान है।
- MSME ऑटोमोबाइल, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए घटकों, कच्चे माल और उप-असेंबली के महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भी कार्य करते हैं।
- विकास के चरण में इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराकर एसएमई ग्रोथ फंड को मंजूरी उद्यमों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने, मशीनरी के आधुनिकीकरण, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उत्पादकता में सुधार करने में सहायता कर सकता है।
- इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और रोजगार सृजन में सहायता मिल सकती है।
- यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि MSME भारत की गैर-कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनका भारत के GDP में लगभग 31.1%, विनिर्माण उत्पादन में 35.4% और निर्यात में 48.58% योगदान है।
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एमएसएमई का वर्गीकरण:
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- संशोधित एमएसएमई वर्गीकरण के तहत उद्यमों को निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इसमें विनिर्माण और सेवा उद्यमों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाता है।
- सूक्ष्म उद्यम (Micro Enterprise) वह है जिसमें 2.5 करोड़ रुपये तक का निवेश और 10 करोड़ रुपये तक का कारोबार हो।
- लघु उद्यम (Small Enterprise) में 25 करोड़ रुपये तक का निवेश और 100 करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है।
- वहीं, मध्यम उद्यम (Medium Enterprise) में 125 करोड़ रुपये तक का निवेश और 500 करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है।
- इन बढ़ी हुई सीमाओं से उद्यमों को सरकारी सहायता का लाभ लेते हुए अपने परिचालन का विस्तार करने में मदद मिलती है।
- संशोधित एमएसएमई वर्गीकरण के तहत उद्यमों को निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इसमें विनिर्माण और सेवा उद्यमों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाता है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- अपने महत्त्व के बावजूद, MSME को कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। औपचारिक ऋण तक सीमित पहुँच, जमानत की आवश्यकताएँ और कार्यशील पूंजी की कमी व्यवसाय के विस्तार में बाधा डालती हैं।
- बड़ी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों द्वारा भुगतान में देरी से MSME के नकदी प्रवाह पर और अधिक दबाव पड़ता है।
- MSME को प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे की कमी, कुशल श्रमिकों की कमी, नियामकीय अनुपालन का बोझ तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों तथा कार्बन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- इसलिए, इक्विटी पूंजी तक पहुँच के साथ व्यापक संस्थागत और बुनियादी ढाँचे से जुड़े सुधारों की भी आवश्यकता है।
- अपने महत्त्व के बावजूद, MSME को कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। औपचारिक ऋण तक सीमित पहुँच, जमानत की आवश्यकताएँ और कार्यशील पूंजी की कमी व्यवसाय के विस्तार में बाधा डालती हैं।
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सरकार की पहल:
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- सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। CGTMSE पात्र सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी की सुविधा प्रदान करता है, जबकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सूक्ष्म उद्यमों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराती है।
- TReDS एमएसएमई को व्यापारिक प्राप्य राशि (Trade Receivables) के आधार पर वित्त प्राप्त करने और भुगतान में देरी की समस्या से निपटने में सहायता करता है।
- Udyam Registration डिजिटल औपचारिकीकरण को बढ़ावा देता है, जबकि RAMP योजना MSME के प्रदर्शन, बाजार तक पहुँच और केंद्र-राज्य संबंधों को बेहतर बनाने का प्रयास करती है।
- सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy) के तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा MSE से वार्षिक खरीद का 25% किया जाना निर्धारित है।
- इसके अतिरिक्त, GeM, PM Vishwakarma, SFURTI और CHAMPIONS Portal जैसी पहलें बाजार तक पहुँच, पारंपरिक कारीगरों, क्लस्टर विकास और शिकायत निवारण को समर्थन प्रदान करती हैं।
- सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। CGTMSE पात्र सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी की सुविधा प्रदान करता है, जबकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सूक्ष्म उद्यमों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराती है।
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आगे की राह:
एसएमई ग्रोथ फंड में उच्च क्षमता वाले भारतीय SMEs को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों में बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बनने की क्षमता है।
हालाँकि, इसकी सफलता पारदर्शी लाभार्थी चयन, पेशेवर कोष प्रबंधन और प्रभावी निगरानी पर निर्भर करेगी।
इक्विटी सहायता के साथ बेहतर बुनियादी ढाँचा, प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल विकास, समय पर भुगतान और बाजार तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
इसलिए, भारत को अपने MSME पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत “पूंजी, प्रौद्योगिकी, कौशल, बाजार, बुनियादी ढाँचा” दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

