संदर्भ:
हाल ही में, कैद में प्रजनित पाँच लंबी-चोंच वाले गिद्ध (Slender-billed Vultures, Gyps tenuirostris) को असम में जंगल में छोड़ा गया। यह दुनिया में कैद में प्रजनित लंबी-चोंच वाले गिद्धों को जंगल में छोड़े जाने की पहली ज्ञात घटना है। इन गिद्धों को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व के बिश्वनाथ डिवीजन स्थित जटायु सॉफ्ट रिलीज सेंटर में छोड़ा गया।
लंबी-चोंच वाले गिद्ध के बारे में:
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विशेषता |
लंबी-चोंच वाला गिद्ध |
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वैज्ञानिक नाम |
Gyps tenuirostris |
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IUCN स्थिति |
अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered) |
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भारत में कानूनी संरक्षण |
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I |
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वितरण |
भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ भाग |
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भारत में आवास |
हिमालय की तलहटी के मैदान, असम और गंगा के मैदानी क्षेत्र |
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घोंसला बनाना |
मुख्यतः ऊँचे पेड़ों पर |
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प्रमुख खतरा |
पशु चिकित्सा में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक विषाक्तता |
छोड़ा जाना महत्वपूर्ण क्यों है?
लंबी-चोंच वाला गिद्ध उन जिप्स (Gyps) प्रजाति के गिद्धों में से एक है, जिनकी आबादी में पशु चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक के व्यापक उपयोग के कारण भारी गिरावट आई।
डाइक्लोफेनाक से उपचारित पशुओं के शव खाने वाले गिद्धों में गुर्दे की विफलता (Kidney Failure) और आंतरिक गाउट/विसरल गाउट (Visceral Gout) विकसित हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर उनकी मृत्यु हो जाती है।
इसलिए, कैद में प्रजनन और उसके बाद गिद्धों को जंगल में छोड़ना, जंगली गिद्धों की आबादी को पुनः बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपाय हैं।
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के बारे में:
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) भारत की प्रमुख गैर-सरकारी संस्थाओं में से एक है, जो वन्यजीव अनुसंधान, जैव-विविधता संरक्षण और प्रकृति शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करती है।
- स्थापना: 15 सितंबर 1883
- मुख्यालय: हॉर्नबिल हाउस, मुंबई
- प्रतीक: ग्रेट हॉर्नबिल
- अंतरराष्ट्रीय संबद्धता: BirdLife International की साझेदार संस्था
BNHS की भूमिका:
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) संकटग्रस्त गिद्धों के संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल रही है।
असम में छोड़े गए गिद्धों का प्रजनन गुवाहाटी के निकट रानी स्थित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में किया गया था।
जंगल में छोड़ने से पहले इन गिद्धों को लगभग तीन महीने तक अनुकूलन (Acclimatisation) के लिए एक एवियरी में रखा गया।
सॉफ्ट-रिलीज (Soft Release) पद्धति के तहत कैद में प्रजनित पक्षियों को पूरी तरह से जंगल में स्वतंत्र करने से पहले प्राकृतिक पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल धीरे-धीरे होने का अवसर दिया जाता है।
गिद्धों के लिए प्रमुख खतरे:
पशु चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक
- जिप्स (Gyps) प्रजाति के गिद्धों की आबादी में गिरावट का ऐतिहासिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण कारण।
- डाइक्लोफेनाक से उपचारित पशुओं के दूषित शव खाने से गिद्ध इस दवा के संपर्क में आते हैं।
- इससे गुर्दे की विफलता और विसरल गाउट हो सकता है।
आवास का क्षरण
- घोंसला बनाने के लिए आवश्यक बड़े पेड़ों की कमी।
- कृषि विस्तार तथा अन्य भूमि-उपयोग में परिवर्तन से उपयुक्त घोंसले और भोजन के क्षेत्रों में कमी आ सकती है।
भोजन की उपलब्धता और प्रदूषण
- पशुओं के शवों के निपटान की बदलती प्रक्रियाएँ गिद्धों के लिए भोजन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं।
- अन्य पशु चिकित्सा दवाएँ भी गिद्धों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
भारत में संरक्षण के उपाय
भारत ने गिद्धों के संरक्षण के लिए कई उपाय अपनाए हैं:
- गिद्धों में विषाक्तता को कम करने के लिए पशु चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक पर प्रतिबंध/नियंत्रण।
- गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्रों की स्थापना।
- कैद में प्रजनन के बाद उपयुक्त आवासों में गिद्धों को छोड़ना।
- जंगली गिद्धों की आबादी की निगरानी।
- वल्चर एक्शन प्लान (Vulture Action Plan) भारत की गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
