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Blog / 09 Jun 2026

परमाणु हथियारों पर SIPRI रिपोर्ट

संदर्भ:

हाल ही में, स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) ने SIPRI ईयरबुक 2026 जारी की जिसमें वैश्विक परमाणु शस्त्रागार में महत्वपूर्ण विकासों को उजागर किया गया है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

      • परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण: दुनिया के सभी 9 परमाणु संपन्न देशों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल) ने अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाना और बढ़ाना जारी रखा है।
      • सक्रिय हथियार और अलर्ट: कुल परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 12,187 है। इनमें से लगभग 4,012 हथियार मिसाइलों और विमानों पर तैनात (Deployed) हैं। लगभग 2,100 से 2,200 हथियार 'हाई ऑपरेशनल अलर्ट' पर हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में दागा जा सकता है।
      • सैन्य खर्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। हथियारों की मांग बढ़ने के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) में रुकावटें देखी गई हैं।

Nuclear risks rise as powers expand and modernise arsenals: SIPRI study | Nuclear  Weapons News | Al Jazeera

भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में:

      • भारत का शस्त्रागार: भारत का परमाणु वारहेड स्टॉकपाइल 2025 के 180 से बढ़कर 2026 की शुरुआत में 190 हो गया है।
      • शांति काल में तैनाती (Peacetime Deployment): रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि भारत ने शांति काल के दौरान पहली बार 12 परमाणु वारहेड्स को तैनात किया है। भारत का मुख्य ध्यान अब लंबी दूरी के हथियारों को विकसित करने पर है, जो पूरे चीन को अपनी जद में ले सकें।
      • चीन और पाकिस्तान की स्थिति: चीन ने भी अपनी तैनात परमाणु संपत्तियों को बढ़ाकर 34 कर दिया है। पाकिस्तान भी अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ा रहा है, हालांकि भारत का ध्यान अब मुख्य रूप से चीन की सैन्य चुनौतियों पर केंद्रित है।
      • रक्षा खर्च और आयात: भारत 92.1 बिलियन डॉलर के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बना हुआ है। इसके साथ ही, भारत यूक्रेन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (Arms Importer) है।

भारत के लिए रणनीतिक और सुरक्षा निहितार्थ:

      • दो मोर्चों पर युद्ध का खतरा (Two-Front War Threat): चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते परमाणु और रणनीतिक सहयोग के कारण भारत को अपनी 'नो फर्स्ट यूज' (No First Use) नीति और 'न्यूनतम विश्वसनीय निवारक' (Credible Minimum Deterrence) की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
      • आधुनिकीकरण की आवश्यकता: भारत को अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
      • आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta): दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक होना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के लिए एक बड़ी कमजोरी है। घरेलू रक्षा उत्पादन (DefTech) को और गति देनी होगी।

SIPRI के बारे में:

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थान है, जो संघर्ष, हथियार, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर अनुसंधान तथा डेटा विश्लेषण प्रदान करता है।

इसकी स्थापना 1966 में स्वीडिश संसद के निर्णय के बाद हुई थी और इसका मुख्यालय स्टॉकहोम में स्थित है।

      • मिशन: इसका उद्देश्य एक शांतिपूर्ण विश्व स्थापित करना है जहाँ असुरक्षा कम हो। इसका कार्य अनुसंधान, नीति विश्लेषण, संवाद, पारदर्शिता और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है।

निष्कर्ष:

SIPRI ईयरबुक 2026 यह स्पष्ट करती है कि वैश्विक नियमों पर आधारित व्यवस्था (Rules-based Order) कमजोर हो रही है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ अपनी रक्षा तैयारियों और परमाणु निवारक क्षमता को मजबूत करे, और दूसरी तरफ वैश्विक मंचों पर बहुपक्षीय संवाद और परमाणु जोखिम न्यूनीकरण (Nuclear Risk Reduction) के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करे।

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