प्रसंग:
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कल किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियाँ और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं; यह भारत को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को फिर से दोहराने का एक मंच प्रदान करती है।
एससीओ में भारत का रुख:
वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता: भारत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों के समाधान में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर देगा।
आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता: भारत आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ अपने सख्त और निरंतर रुख को दोहराएगा।
रणनीतिक सहभागिता: एससीओ सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से रक्षा कूटनीति को मजबूत किया जाएगा।
प्रवासी भारतीयों से संवाद: बिश्केक में भारतीय समुदाय के साथ संवाद, भारत की सॉफ्ट पावर नीति को दर्शाता है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में:
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियाई अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2001 में शंघाई फाइव (1996) से हुई थी। इसमें 10 सदस्य देश शामिल हैं: चीन, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस। SCO का क्षेत्र यूरेशिया का लगभग 60% और विश्व की लगभग 42% जनसंख्या को कवर करता है। इसकी आधिकारिक भाषाएँ चीनी और रूसी हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य आपसी विश्वास बनाना, अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना और व्यापार, अर्थव्यवस्था, संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना है। यह क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने पर भी केंद्रित है, विशेष रूप से आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से निपटने पर।
SCO की संरचना में राष्ट्राध्यक्ष परिषद (शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई), बीजिंग स्थित सचिवालय और ताशकंद में क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) शामिल हैं। संगठन का विस्तार समय के साथ हुआ, जिसमें भारत और पाकिस्तान 2017 में, ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में शामिल हुए।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र :
सुरक्षा सहयोग
RATS के माध्यम से आतंकवाद-रोधी कार्रवाई
संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करना
आर्थिक सहयोग
बुनियादी ढांचे का विकास और व्यापार को सुगम बनाना
SCO ऊर्जा क्लब के माध्यम से ऊर्जा सहयोग
सामाजिक-सांस्कृतिक सहभागिता
शिक्षा, संस्कृति और जन-जन के बीच आदान-प्रदान
SCO का रणनीतिक महत्व:
- यह पश्चिमी नेतृत्व वाले वैश्विक संस्थानों के लिए एक संतुलनकारी मंच के रूप में कार्य करता है।
- सदस्य देशों के पास:
- लगभग 20% वैश्विक तेल भंडार
- लगभग 44% प्राकृतिक गैस भंडार
- यह चीन, रूस और भारत जैसे प्रमुख शक्तियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
भारत के लिए महत्व:
क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security): आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद, से निपटने में सहायता मिलती है।
मध्य एशिया तक पहुंच (Central Asia Outreach): कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
रणनीतिक संतुलन (Strategic Balancing): पश्चिमी और गैर-पश्चिमी दोनों समूहों के साथ जुड़ाव संभव होता है।
बहुपक्षीय कूटनीति (Multilateral Diplomacy): भारत की एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करता है।
चुनौतियाँ:
· भारत–पाकिस्तान तनाव से गहन सहयोग सीमित होता है।
· संगठन में चीन का प्रभाव/प्रभुत्व अधिक है।
· सदस्य देशों के बीच रणनीतिक हितों में भिन्नता है।
निष्कर्ष :
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत की भागीदारी वैश्विक सुरक्षा संवाद को आकार देने में उसकी सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। शांति, स्थिरता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति का समर्थन करते हुए भारत यूरेशियाई भू-राजनीति में एक प्रमुख हितधारक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है, साथ ही क्षेत्रीय जटिल गतिशीलताओं के बीच संतुलन भी बनाए रखता है।
