संदर्भ:
हाल ही में खगोलविदों ने एंड्रोमेडा आकाशगंगा में स्थित एक तारे M31 2014 DS1 को सीधे ब्लैक होल में परिवर्तित होते हुए देखा। यह अब तक का सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि कोई तारा बिना सुपरनोवा विस्फोट के भी अचानक गायब होकर ब्लैक होल बन सकता है।
तारा कैसे ढहता है?
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- तारे मूलतः दो विपरीत बलों के बीच संतुलन की अवस्था में रहते हैं:
- बाहरी दाब (Outward Pressure): यह दाब तारे के केंद्र में होने वाली नाभिकीय संलयन (Hydrogen → Helium) प्रक्रिया से उत्पन्न होता है।
- अंदरूनी गुरुत्वाकर्षण बल (Inward Pull): तारे का विशाल द्रव्यमान उसे भीतर की ओर खींचता है।
- बाहरी दाब (Outward Pressure): यह दाब तारे के केंद्र में होने वाली नाभिकीय संलयन (Hydrogen → Helium) प्रक्रिया से उत्पन्न होता है।
- जब किसी विशाल तारे का ईंधन समाप्त हो जाता है, तो नाभिकीय संलयन रुक जाता है और बाहरी दाब समाप्त हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप गुरुत्वाकर्षण बल प्रभावी हो जाता है और तारे का केंद्र तेजी से संकुचित होकर ढहने लगता है।
- तारे मूलतः दो विपरीत बलों के बीच संतुलन की अवस्था में रहते हैं:
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तारे का अंतिम परिणाम:
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- तारा अंततः क्या बनेगा, यह उसके कोर (Core) के द्रव्यमान पर निर्भर करता है:
- तारा अंततः क्या बनेगा, यह उसके कोर (Core) के द्रव्यमान पर निर्भर करता है:
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कोर का द्रव्यमान |
संभावित परिणाम |
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सूर्य के द्रव्यमान का 1.4 गुना से कम |
श्वेत बौना (White Dwarf) |
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1.4 – 3 गुना के बीच |
न्यूट्रॉन तारा (Neutron Star) |
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3 गुना से अधिक |
ब्लैक होल (Black Hole) |
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- 1.4 सौर द्रव्यमान सीमा को चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) कहा जाता है।
- 3 सौर द्रव्यमान तक की सीमा को टॉलमैन–ओपेनहाइमर–वोल्कॉफ सीमा (TOV Limit) कहा जाता है।
- यदि तारे का कोर इन सीमाओं से अधिक भारी होता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल इतना प्रबल हो जाता है कि पदार्थ पूरी तरह संकुचित होकर ब्लैक होल में बदल जाता है।
- 1.4 सौर द्रव्यमान सीमा को चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) कहा जाता है।
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खोज का महत्व:
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- यह सिद्ध करता है कि ब्लैक होल केवल विस्फोटक सुपरनोवा से ही नहीं बनते, बल्कि कुछ तारे “मूक मृत्यु” (Silent Death) के माध्यम से भी सीधे ब्लैक होल में परिवर्तित हो सकते हैं।
- इससे तारकीय विकास (Stellar Evolution) की हमारी समझ में सुधार होगा।
- यह ब्रह्मांड में ब्लैक होल के निर्माण की दर और उनकी उत्पत्ति के नए मॉडल विकसित करने में सहायक होगा।
- साथ ही, यह ब्रह्मांड के दीर्घकालिक विकास (Cosmic Evolution) को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह सिद्ध करता है कि ब्लैक होल केवल विस्फोटक सुपरनोवा से ही नहीं बनते, बल्कि कुछ तारे “मूक मृत्यु” (Silent Death) के माध्यम से भी सीधे ब्लैक होल में परिवर्तित हो सकते हैं।
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ब्लैक होल बनने के प्रमुख तरीके:
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- सुपरनोवा विस्फोट द्वारा निर्माण: अधिकांश विशाल तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा विस्फोट करते हैं। विस्फोट के बाद बचा हुआ अत्यधिक घना कोर ब्लैक होल में परिवर्तित हो सकता है।
- प्रत्यक्ष ढहाव (Direct Collapse / Failed Supernova): कुछ तारे, जैसे M31 2014 DS1, बिना किसी विस्फोट के चुपचाप ढह जाते हैं और सीधे ब्लैक होल बन जाते हैं। इस प्रक्रिया को “फेल्ड सुपरनोवा” कहा जाता है। इस स्थिति में आसपास के तारे अपनी कक्षा में बने रहते हैं, जैसा कि V404 Cygni ब्लैक होल ट्रिपल सिस्टम में देखा गया है।
- सुपरनोवा विस्फोट द्वारा निर्माण: अधिकांश विशाल तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा विस्फोट करते हैं। विस्फोट के बाद बचा हुआ अत्यधिक घना कोर ब्लैक होल में परिवर्तित हो सकता है।
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ब्लैक होल के मुख्य भाग:
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- सिंगुलैरिटी (Singularity): ब्लैक होल का केंद्र, जहाँ घनत्व अनंत माना जाता है।
- इवेंट होराइजन (Event Horizon): वह सीमा जहाँ से प्रकाश सहित कोई भी वस्तु बाहर नहीं निकल सकती।
- अभिवृद्धि चक्र (Accretion Disk): ब्लैक होल के चारों ओर गैस और धूल का चक्र, जो अत्यधिक तापमान के कारण एक्स-रे विकिरण उत्सर्जित करता है। इसी के माध्यम से वैज्ञानिक ब्लैक होल का पता लगाते हैं।
- सिंगुलैरिटी (Singularity): ब्लैक होल का केंद्र, जहाँ घनत्व अनंत माना जाता है।
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हाल की महत्वपूर्ण खोजें:
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- Gaia BH3: मिल्की वे आकाशगंगा में खोजा गया ब्लैक होल, जिसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग 33 गुना अधिक है।
- सैजिटेरियस A*: हमारी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित महाविशालकाय ब्लैक होल।
- इवेंट होराइजन टेलीस्कोप (EHT): वर्ष 2019 में पहली बार ब्लैक होल की छाया की तस्वीर लेने में सफल रहा।
- Gaia BH3: मिल्की वे आकाशगंगा में खोजा गया ब्लैक होल, जिसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग 33 गुना अधिक है।
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