संदर्भ:
हाल ही में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'BBB-' से 'BBB' और अल्पकालिक रेटिंग को 'A-3' से 'A-2' में सुधार किया है। यह 18 वर्षों में भारत का पहला सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड है; पिछला अपग्रेड 2007 में हुआ था, जब भारत की रेटिंग 'BBB-' निवेश ग्रेड में बढ़ाई गई थी। यह अपग्रेड भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन के प्रति वैश्विक भरोसे को दर्शाता है।
रेटिंग सुधार के पीछे मुख्य कारण:
- राजकोषीय अनुशासन: राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (2003) के तहत लंबे समय तक सुधार के बाद, सरकार ने कोविड-19 महामारी के बाद से वित्तीय समेकन को तेज़ी से लागू किया है। 2020-21 में GDP के 9.2% तक पहुंचा राजकोषीय घाटा अब 2025-26 में लगभग 4.4% रहने का अनुमान है। दीर्घकालिक लक्ष्य 2030-31 तक ऋण-से-GDP अनुपात को 57.1% से घटाकर 49-51% के बीच लाना है।
- आर्थिक विकास: 2024-25 में 6.5% की अपेक्षित वृद्धि के साथ भी, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। मजबूत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि घटते ऋण बोझ को संभाल रही है, जिससे वित्तीय स्थिरता मजबूत हो रही है।
- मुद्रास्फीति प्रबंधन: एसएंडपी ने भारत की मुद्रास्फीति नियंत्रण की क्षमता को सराहा है। जुलाई 2025 में मुद्रास्फीति 1.55% तक गिर गई, जो 2017 के बाद सबसे कम है। स्थिर और कम मुद्रास्फीति निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है, मुद्रा स्थिरता बनाए रखती है और सामाजिक जोखिमों को कम करती है।
- समग्र मूल्यांकन: राजकोषीय समेकन, मजबूत आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति नियंत्रण के ये संयोजन भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं। ये कारक भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं और दीर्घकालिक सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड के लिए आधार प्रदान करते हैं।
सुधारों का प्रभाव:
- कम उधारी लागत: इस रेटिंग उन्नयन से भारतीय कंपनियों की वित्तपोषण लागत में कमी आ सकती है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच आसान होगी।
- बढ़ा हुआ विदेशी निवेश: इस उन्नयन के परिणामस्वरूप बॉन्ड बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने की संभावना है, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
- बेहतर वैश्विक स्थिति: वैश्विक उभरते बाजारों के निवेश परिदृश्य में भारत की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, जो बेहतर जोखिम-समायोजित प्रतिफल और निश्चित आय वाले निवेशकों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स (SCR) के बारे में:
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स (SCR) किसी देश की साख का स्वतंत्र मूल्यांकन होती हैं, जो उसके ऋण दायित्वों को समय पर पूरा करने की क्षमता का आकलन करती हैं। प्रमुख रेटिंग एजेंसियों में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (S&P), फिच और मूडीज़ शामिल हैं।
• SCR के माध्यम से देशों को मुख्यतः निवेश श्रेणी और निवेश-अयोग्य श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है, जहाँ निवेश-अयोग्य श्रेणी में ऋण चूक की संभावना अधिक होती है।
• निवेश-श्रेणी रेटिंग एसएंडपी और फिच के लिए BBB- से AAA तक तथा मूडीज़ के लिए Baa3 से Aaa तक होती है।
o महत्व: अनुकूल रेटिंग देशों के लिए वैश्विक पूंजी बाजारों और विदेशी निवेश तक पहुँच को आसान बनाती है तथा उधारी की लागत को घटाती है।
o चुनौतियाँ: रेटिंग प्रक्रियाओं में पूर्वाग्रह, हितों के टकराव और रेटिंग सीमा के मुद्दे समय-समय पर उठाए जाते रहे हैं।
निष्कर्ष:
एसएंडपी द्वारा भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘BBB’ तक उन्नत करना एक महत्वपूर्ण विकास है, जो भारत के स्थिर और लचीले आर्थिक विकास, मजबूत राजकोषीय अनुशासन तथा व्यापक आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है। यह मान्यता न केवल वैश्विक बाजारों में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाती है, बल्कि आने वाले वर्षों में सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करते हुए विदेशी निवेश में वृद्धि और उधारी की लागत में कमी के रास्ते भी खोलती है।
