संदर्भ:
हाल ही में, 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्र मंथन – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) को वित्त वर्ष 2030–31 तक प्रथम चरण (Phase-I) के लिए ₹84,084 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य अपतटीय तेल एवं गैस अन्वेषण में तेजी लाना, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करना है।
समुद्र मंथन योजना के बारे में:
समुद्र मंथन भारत सरकार की एक प्रमुख (Flagship) पहल है, जिसका उद्देश्य देश के विशाल अपतटीय हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन करना है। यह योजना आधुनिक तकनीक, बेहतर भू-वैज्ञानिक डेटा, साझा अवसंरचना तथा सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों की अधिक भागीदारी के माध्यम से कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) तथा मेक इन इंडिया (Make in India) के दृष्टिकोण को भी समर्थन प्रदान करती है।
योजना की आवश्यकता:
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश का वार्षिक कच्चे तेल का आयात बिल लगभग 144 अरब अमेरिकी डॉलर (₹13 लाख करोड़) है। भारत के अपतटीय बेसिनों में 5,600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समतुल्य (MMTOE) से अधिक हाइड्रोकार्बन संसाधनों का अनुमान है। इसलिए, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अपतटीय अन्वेषण का विस्तार आवश्यक है।
प्रमुख घटक:
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- भूकंपीय (Seismic) डेटा संग्रहण: ₹28,534 करोड़ का आवंटन 2D एवं 3D भूकंपीय सर्वेक्षण, AI-आधारित डेटा विश्लेषण तथा पुराने भू-वैज्ञानिक डेटा के पुनः प्रसंस्करण (Reprocessing) के लिए किया गया है, ताकि नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की पहचान की जा सके।
- अपतटीय अन्वेषण : ₹43,200 करोड़ की राशि 60 गहरे समुद्र (Deepwater) एवं अति-गहरे समुद्र (Ultra-Deepwater) के कुओं की ड्रिलिंग के लिए प्रदान की जाएगी। सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों को अन्वेषण के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ड्रिलिंग लागत का 50% तक या प्रति कुआँ ₹675 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- साझा अपतटीय अवसंरचना : ₹10,000 करोड़ का उपयोग महानदी एवं कच्छ जैसे अपतटीय बेसिनों में साझा उत्पादन एवं परिवहन सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
- विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र : ₹2,000 करोड़ का आवंटन तेल एवं गैस विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र (Oil and Gas Manufacturing and Services Zone) की स्थापना के लिए किया गया है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा तथा मेक इन इंडिया पहल को मजबूती मिलेगी।
- भूकंपीय (Seismic) डेटा संग्रहण: ₹28,534 करोड़ का आवंटन 2D एवं 3D भूकंपीय सर्वेक्षण, AI-आधारित डेटा विश्लेषण तथा पुराने भू-वैज्ञानिक डेटा के पुनः प्रसंस्करण (Reprocessing) के लिए किया गया है, ताकि नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की पहचान की जा सके।
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अपेक्षित लाभ:
इस योजना का उद्देश्य 600 MMTOE से अधिक हाइड्रोकार्बन भंडार जोड़ना तथा घरेलू उत्पादन को 62 MMTOE से बढ़ाकर लगभग 80 MMTOE प्रति वर्ष करना है। इससे प्रतिवर्ष कच्चे तेल के आयात में लगभग ₹1 लाख करोड़ की कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, यह योजना रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में भी सहायक होगी।
निष्कर्ष:
समुद्र मंथन भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा सतत आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अपतटीय अन्वेषण को बढ़ावा देकर, अवसंरचना को सुदृढ़ बनाकर तथा घरेलू क्षमताओं को मजबूत करके यह योजना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और आयातित ऊर्जा पर भारत की निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

