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Blog / 19 Feb 2026

स्वास्थ्य एआई पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए SAHI और BODH पहल

संदर्भ:

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने दो प्रमुख डिजिटल स्वास्थ्य पहलों “SAHI (सिक्योर एआई फॉर हेल्थ इनिशिएटिव) और BODH (बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई)का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ये पहलें भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, नैतिक, पारदर्शी और प्रमाण-आधारित उपयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम हैं।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने एक समग्र, परस्पर समन्वित, समावेशी और विस्तार योग्य डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की परिकल्पना की थी। इस विजन को वर्ष 2020 में प्रारंभ हुई आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने और सुदृढ़ किया, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित की। SAHI और BODH इसी आधार को आगे बढ़ाते हुए एक भरोसेमंद, पारदर्शी और जन-केंद्रित एआई तंत्र के निर्माण का प्रयास करते हैं।

SAHI and BODH: India's Blueprint for Responsible AI in Healthcare Under the  DPDP Era

SAHI और BODH पहल के बारे में:

      • SAHI (सिक्योर एआई फॉर हेल्थ इनिशिएटिव) केवल एक तकनीकी पहल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए एक सशक्त शासन ढांचा, नीतिगत दिशा-सूचक और राष्ट्रीय कार्य-योजना है। यह सुनिश्चित करता है कि भारत में एआई का उपयोग नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ हो तथा तकनीकी प्रगति सदैव जनहित के अनुरूप रहे।
      • BODH (बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई) को सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है। यह एक सुव्यवस्थित मंच उपलब्ध कराता है, जहाँ एआई आधारित समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले उनका परीक्षण, मूल्यांकन और सत्यापन किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि एआई प्रणालियाँ उच्च गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग की तैयारी के उच्च मानकों को पूरा करें, जिससे डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में जनविश्वास मजबूत हो।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रमुख उपयोग:

एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, तेज और सटीक बना रहा है। यह रोगों की पहचान को बेहतर बनाता है, कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करता है और व्यक्तिगत उपचार को संभव बनाता है। इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

      • नैदानिक इमेजिंग और रेडियोलॉजी: डीप लर्निंग एल्गोरिद्म चिकित्सा चित्रों का विश्लेषण कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की सटीक पहचान में सहायता करते हैं।
      • पूर्वानुमान विश्लेषण और जोखिम प्रबंधन: एआई जीवन-घातक स्थितियों (जैसे सेप्सिस) का पूर्वानुमान लगाने, आईसीयू क्षमता प्रबंधन तथा पुनः भर्ती की आशंका का आकलन करने में मदद करता है।
      • दवा खोज और विकास: एआई दवा अनुसंधान की प्रक्रिया से लेकर लक्ष्य पहचान अणुओं के परिष्करण और व्यक्तिगत चिकित्सा के विकास को तेज करता है ।
      • प्रशासनिक स्वचालन: एआई आधारित उपकरण कागजी कार्यभार कम करते हैं, जिससे चिकित्सक रोगी देखभाल पर अधिक समय और ध्यान दे पाते हैं।
      • वर्चुअल सहायक और दूरस्थ निगरानी: एआई संचालित चैटबॉट टेलीमेडिसिन सेवाओं को सशक्त बनाते हैं तथा मरीजों की निरंतर निगरानी संभव करते हैं।
      • रोबोटिक सर्जरी: एआई समर्थित प्रणालियाँ शल्यक्रिया की सटीकता बढ़ाती हैं और जटिलताओं के जोखिम को कम करती हैं।
      • धोखाधड़ी की पहचान: एआई बीमा दावों में असामान्य पैटर्न पहचानकर धोखाधड़ी पर नियंत्रण में सहायक होता है।

निष्कर्ष:

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई अनेक लाभ प्रदान करता है, जिसमें बेहतर दक्षता, शीघ्र और सटीक निदान, प्रभावी उपचार तथा विशेष रूप से दूरस्थ और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में बेहतर पहुँच शामिल है। तपेदिक और कैंसर जैसी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान रोगियों के उपचार परिणामों को उल्लेखनीय रूप से सुधारती है, जबकि प्रशासनिक स्वचालन चिकित्सकों के मानसिक दबाव को कम करने में सहायक है। फिर भी, डेटा गोपनीयता की सुरक्षा, मजबूत सत्यापन तंत्र और समान पहुँच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। ऐसे में SAHI और BODH जैसी पहलें नैतिक, जवाबदेह और समावेशी एआई उपयोग को सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये पहलें भारत को जिम्मेदार स्वास्थ्य एआई के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ाती हैं और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभाव एवं विस्तार को सुदृढ़ करती हैं।