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Blog / 14 May 2025

सोशल मीडिया के लिए सेफ हार्बर पर पुनर्विचार

संदर्भ:
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति को सूचित किया है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए "सेफ हार्बर" की अवधारणा पर पुनर्विचार कर रहा है। यह कदम ऑनलाइन "फेक न्यूज़" के प्रसार से निपटने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पुनर्विचार के पीछे का कारण
फेक न्यूज़ से लड़ाई: सरकार सेफ हार्बर प्रावधानों की दोबारा समीक्षा कर ऑनलाइन गलत सूचना के प्रसार से निपटना चाहती है।
सोशल मीडिया को विनियमित करना: यह कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने का हिस्सा है कि वे अपनी साइटों पर होस्ट की गई सामग्री के लिए जिम्मेदारी लें।
कानूनों के उल्लंघन को रोकना: सरकार ने विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भारतीय कानूनों की अवहेलना करने और हटाने की सूचनाओं पर देर से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

सेफ हार्बर के बारे में-
सेफ हार्बर एक कानूनी सिद्धांत है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्मोंजैसे कि सोशल मीडिया नेटवर्क, फोरम और मैसेजिंग सेवाओंको उनके उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए उत्तरदायी ठहराए जाने से सुरक्षा प्रदान करता है।
भारत में, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत, यदि मध्यस्थ कुछ नियत सावधानियों का पालन करते हैं तो उन्हें जिम्मेदारी से छूट दी जाती है।

मध्यस्थ की जिम्मेदारी (Intermediary Liability)
मध्यस्थ की जिम्मेदारी से आशय उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की कानूनी जवाबदेही से है जो किसी सामग्री को उपलब्ध कराते हैं या उसका वितरण करते हैं। भारतीय कानून के तहत, यदि किसी अवैध सामग्री के बारे में सूचित किए जाने के बाद भी वे कार्रवाई नहीं करते हैं, तो वे इस सुरक्षा को खो देते हैं। यह सूचना आमतौर पर अदालत के आदेश या सरकारी एजेंसी के निर्देश के रूप में होनी चाहिए।
सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ने अनुपालन को और अधिक कड़ा कर दिया है। प्रमुख आवश्यकताएं हैं:
एक मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति और शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति।
सूचित किए जाने के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से सामग्री को हटाना।
उपयोगकर्ता शिकायतों और की गई कार्रवाई का विवरण देने वाली नियमित अनुपालन रिपोर्टों का प्रकाशन।

निष्कर्ष-
डिजिटल शासन के विकास के एक निर्णायक मोड़ पर भारत द्वारा सेफ हार्बर प्रावधानों की पुन: समीक्षा की जा रही है। जैसे-जैसे गलत सूचना अधिक जटिल और व्यापक होती जा रही है, चुनौती ऐसे कानून बनाने की है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों की रक्षा करें। प्रस्तावित डिजिटल इंडिया अधिनियम और उसमें सेफ हार्बर के साथ किया गया व्यवहार भारत के डिजिटल भविष्य की दिशा तय करेगा और वैश्विक दक्षिण में नियामक प्रवृत्तियों को प्रभावित करेगा।

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