संदर्भ:
भारत स्थित रक्षा स्टार्ट-अप डी-प्रोपल्स ने हाल ही में हैदराबाद स्थित DRDO की एक सुविधा में रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन (Rotating Detonation Engines- RDE) का सफल प्रदर्शन किए जाने की घोषणा की है। वैश्विक स्तर पर RDE का परीक्षण रॉकेट, हाइपरसोनिक मिसाइलों और अंतरिक्ष यानों के लिए किया जा रहा है।
रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन क्या है?
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- रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन एक उन्नत प्रणोदन प्रणाली है, जो ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को मुक्त करने के लिए पारंपरिक दहन के बजाय डेटोनेशन (विस्फोटन) का उपयोग करती है।
- पारंपरिक इंजनों में दहन मुख्य रूप से डिफ्लैग्रेशन (Deflagration) के माध्यम से होता है, जिसमें लौ ध्वनि की गति से कम गति पर आगे बढ़ती है। इसके विपरीत, डेटोनेशन में एक अतिध्वनिक आघात तरंग (Supersonic Shock Wave) ईंधन-वायु मिश्रण को तेजी से संपीड़ित और गर्म करती है, जिससे अत्यंत तीव्र दहन होता है।
- रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन एक उन्नत प्रणोदन प्रणाली है, जो ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को मुक्त करने के लिए पारंपरिक दहन के बजाय डेटोनेशन (विस्फोटन) का उपयोग करती है।
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RDE कैसे काम करता है?
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- एक रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन में सामान्यतः एक वलयाकार दहन कक्ष (Annular Combustion Chamber) होता है। इसमें दो संकेंद्रित बेलनाकार संरचनाएँ होती हैं, जिनके बीच एक संकीर्ण वलयाकार स्थान होता है।
- ईंधन और ऑक्सीडाइज़र को लगातार इस कक्ष में प्रवाहित किया जाता है। एक या एक से अधिक डेटोनेशन तरंगें बहुत तेज गति से इस वलयाकार कक्ष के चारों ओर घूमती रहती हैं। ये तरंगें ताजे ईंधन-वायु मिश्रण को तेजी से दहन करती हैं और उच्च-दाब वाली गैसें उत्पन्न करती हैं। ये गैसें नोजल के माध्यम से फैलती हैं और थ्रस्ट (प्रणोद) उत्पन्न करती हैं।
- स्पंदित विस्फोट इंजन (Pulsed Detonation Engine -PDE) के विपरीत, RDE में डेटोनेशन को लगातार बनाए रखा जा सकता है। इससे निरंतर प्रणोद उत्पन्न करना संभव होता है।
- एक रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन में सामान्यतः एक वलयाकार दहन कक्ष (Annular Combustion Chamber) होता है। इसमें दो संकेंद्रित बेलनाकार संरचनाएँ होती हैं, जिनके बीच एक संकीर्ण वलयाकार स्थान होता है।
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यह अधिक दक्ष क्यों है?
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- रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन अधिक दक्ष माने जाते हैं क्योंकि इनमें दहन से पहले अतिध्वनिक आघात तरंग के माध्यम से ईंधन-वायु मिश्रण को अत्यधिक संपीड़ित किया जाता है। इससे अधिक दाब उत्पन्न होता है और ईंधन की रासायनिक ऊर्जा का अधिक हिस्सा उपयोगी प्रणोद में परिवर्तित किया जा सकता है, जबकि ऊष्मा के रूप में ऊर्जा का नुकसान कम होता है।
- इसलिए रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन पारंपरिक दहन प्रणालियों की तुलना में लगभग 10–25% अधिक ऊष्मागतिक दक्षता (Thermodynamic Efficiency) प्रदान कर सकते हैं।
- रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन अधिक दक्ष माने जाते हैं क्योंकि इनमें दहन से पहले अतिध्वनिक आघात तरंग के माध्यम से ईंधन-वायु मिश्रण को अत्यधिक संपीड़ित किया जाता है। इससे अधिक दाब उत्पन्न होता है और ईंधन की रासायनिक ऊर्जा का अधिक हिस्सा उपयोगी प्रणोद में परिवर्तित किया जा सकता है, जबकि ऊष्मा के रूप में ऊर्जा का नुकसान कम होता है।
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अनुप्रयोग:
अधिक दक्षता का अर्थ है कि समान उत्पादन प्राप्त करने के लिए कम ईंधन की आवश्यकता हो सकती है:
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- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी: रॉकेटों में कम प्रणोदक की खपत से पेलोड क्षमता, मिशन की दक्षता बढ़ सकती है और संभावित रूप से प्रक्षेपण की लागत को कम किया जा सकता है।
- रक्षा क्षेत्र: RDE भविष्य की हाइपरसोनिक मिसाइलों और उन्नत प्रणोदन प्रणालियों में उपयोगी हो सकते हैं। इससे उनकी मारक क्षमता, गति या पेलोड दक्षता में सुधार की संभावना है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी: रॉकेटों में कम प्रणोदक की खपत से पेलोड क्षमता, मिशन की दक्षता बढ़ सकती है और संभावित रूप से प्रक्षेपण की लागत को कम किया जा सकता है।
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RDE तकनीक कठिन क्यों है?
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- अपनी संभावनाओं के बावजूद RDE का व्यावहारिक उपयोग काफी चुनौतीपूर्ण है। RDE के दहन कक्ष में तापमान 2,000°C से अधिक, दाब 10–100 वायुमंडलीय दाब या उससे अधिक तथा डेटोनेशन की गति 1,500 मीटर/सेकंड से अधिक हो सकती है।
- ईंधन और वायु के मिश्रण में छोटे बदलाव भी डेटोनेशन तरंग को अस्थिर कर सकते हैं। इसलिए इस तकनीक के विकास के लिए उन्नत सामग्री, ईंधन इंजेक्शन प्रणालियों, उच्च गति वाली कंप्यूटिंग, उन्नत निदान तकनीकों और सटीक विनिर्माण की आवश्यकता होती है।
- अपनी संभावनाओं के बावजूद RDE का व्यावहारिक उपयोग काफी चुनौतीपूर्ण है। RDE के दहन कक्ष में तापमान 2,000°C से अधिक, दाब 10–100 वायुमंडलीय दाब या उससे अधिक तथा डेटोनेशन की गति 1,500 मीटर/सेकंड से अधिक हो सकती है।
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रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन और पल्स्ड डेटोनेशन इंजन में अंतर:
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- पल्स्ड डेटोनेशन इंजन (PDE) में एक ट्यूब का उपयोग किया जाता है, जिसमें डेटोनेशन बार-बार चक्रों के रूप में होता है। प्रत्येक चक्र के बाद कक्ष को खाली करके फिर से ईंधन और ऑक्सीडाइज़र से भरना पड़ता है।
- इसके विपरीत, रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन में एक वलयाकार कक्ष होता है, जिसमें डेटोनेशन तरंगें लगातार घूमती रहती हैं। इससे ईंधन का निरंतर प्रवाह और लगातार प्रणोद उत्पन्न करना संभव होता है।
- पल्स्ड डेटोनेशन इंजन (PDE) में एक ट्यूब का उपयोग किया जाता है, जिसमें डेटोनेशन बार-बार चक्रों के रूप में होता है। प्रत्येक चक्र के बाद कक्ष को खाली करके फिर से ईंधन और ऑक्सीडाइज़र से भरना पड़ता है।
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भारत के लिए महत्व:
स्वदेशी रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन तकनीक का विकास भारत की रक्षा, हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रणोदन क्षमताओं को मजबूत कर सकता है। साथ ही, इससे विदेशी प्रणोदन तकनीकों पर निर्भरता कम करने और उन्नत प्रणोदन प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष:
रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन अगली पीढ़ी की एक महत्वपूर्ण प्रणोदन तकनीक के रूप में उभर रहे हैं, जिनमें पारंपरिक दहन प्रणालियों की तुलना में 10–25% अधिक ऊष्मागतिक दक्षता की संभावना है। हालांकि, अत्यधिक तापमान और दाब जैसी परिस्थितियों तथा स्थिर डेटोनेशन तरंग बनाए रखने की कठिनाइयों के कारण यह तकनीक अभी भी प्रायोगिक अवस्था में है। निरंतर अनुसंधान, उन्नत तकनीकी क्षमताओं और स्वदेशी नवाचार के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन के सैद्धांतिक लाभ भविष्य में वास्तविक और परिचालन प्रणालियों में परिवर्तित हो सकें।

