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Blog / 05 Jan 2026

गैलेक्सी फ्रॉग पर फोटो पर्यटन की वृद्धि का प्रभाव

संदर्भ:

हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि दुनिया की सबसे दुर्लभ मेंढक प्रजातियों में शामिल सात गैलेक्सी मेंढकों (Melanobatrachus indicus) का समूह केरल के पश्चिमी घाट में स्थित उनके ज्ञात प्राकृतिक आवास से लापता हो गए हैं और अब उन्हें मृत माना जा रहा है। अध्ययन के अनुसार, इस गंभीर स्थिति का मुख्य कारण अनियंत्रित रूप से बढ़ता फोटो पर्यटन है। वन्यजीव फोटोग्राफरों द्वारा बार-बार हस्तक्षेप किए जाने से इन छोटे उभयचरों के अत्यंत नाज़ुक और संवेदनशील सूक्ष्म आवास को गंभीर नुकसान पहुँचा है।

अध्ययन के निष्कर्ष:

      • हर्पेटोलॉजी नोट्स में प्रकाशित " अनैतिक वन्यजीव फोटोग्राफी पश्चिमी घाट के स्थानिक गैलेक्सी मेंढक को खतरे में डालती है..." शीर्षक वाले शोध पत्र में बताया गया है कि वर्ष 2020 में दर्ज किए गए सात गैलेक्सी फ्रॉग 2021–2022 के दौरान किए गए अनुवर्ती सर्वेक्षणों में दोबारा नहीं पाए गए।
      • अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि कई फोटोग्राफर मेंढकों को नंगे हाथों से पकड़ते थे, बेहतर तस्वीरों के लिए उन्हें दूसरी जगह रखते थे और लंबे समय तक तीव्र कैमरा फ्लैश का उपयोग करते थे। ऐसे हस्तक्षेप से उभयचरों में नमी की कमी, शारीरिक तनाव तथा रोगाणुओं के फैलने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

7 of world's rarest frogs presumed dead, study blames rise in photo tourism  | India News - The Indian Express

फोटो पर्यटन के बारे में:

फोटो पर्यटन यात्रा का वह रूप है जिसमें यात्रा का मुख्य उद्देश्य फोटोग्राफी होता है। यात्री विशेष और आकर्षक तस्वीरें लेने के लिए अपनी यात्रा की योजना बनाते हैं, जैसे- वन्यजीव, प्राकृतिक दृश्य या स्थापत्य कला। सामान्य पर्यटन में जहाँ फोटोग्राफी एक सहायक गतिविधि होती है, वहीं फोटो पर्यटन पूरी तरह कैमरे और फोटो अवसरों पर आधारित होता है, जो यात्रा स्थल, समय और वहाँ के व्यवहार को प्रभावित करता है।

गैलेक्सी फ्रॉग के बारे में:

      • गैलेक्सी फ्रॉग एक अत्यंत दुर्लभ और छोटा उभयचर है, जिसकी लंबाई लगभग 2–3.5 सेंटीमीटर होती है। यह केवल दक्षिणी पश्चिमी घाट के नम सदाबहार वनों में पाया जाता है।
      • इसका नाम इसके विशिष्ट और आकर्षक रूप के कारण पड़ा है, गहरे रंग की त्वचा पर फैले नीले और नारंगी बिंदु, जो रात के आकाश में चमकते तारों का आभास कराते हैं।
      • यह प्रजाति IUCN की रेड लिस्ट में संवेदनशीलश्रेणी में शामिल है और विकासवादी दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अपने वंश की एकमात्र ज्ञात प्रजाति है।

फोटो पर्यटन कैसे खतरा बना?

      • वर्ष 2021 में गैलेक्सी फ्रॉग को मथिकेतन शोला राष्ट्रीय उद्यान की फ्लैगशिप प्रजातिघोषित किए जाने के बाद इस दुर्लभ मेंढक को देखने और उसकी तस्वीरें लेने के लिए वन्यजीव फोटोग्राफरों की संख्या तेजी से बढ़ गई।
      • यद्यपि वन्यजीव फोटोग्राफी से संरक्षण के प्रति जागरूकता फैल सकती है, लेकिन जब यह बिना स्पष्ट नियमों, नियंत्रण और नैतिक मर्यादाओं के की जाती है, तो यह अत्यंत नाजुक प्राकृतिक आवासों को गंभीर क्षति पहुँचा सकती है।
      • उभयचरों के अस्तित्व के लिए स्थिर नमी और संतुलित तापमान अत्यंत आवश्यक होते हैं, जिनमें थोड़ा-सा भी बदलाव उनके लिए घातक हो सकता है।
      • लकड़ी के लट्ठों, पत्थरों या पत्तियों की परत को हल्का-सा भी हटाना या पलटना उनके भोजन, आश्रय और प्रजनन चक्र को बाधित कर देता है, जिससे पूरा सूक्ष्म आवास उनके रहने के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।

पारिस्थितिक और संरक्षण संबंधी प्रभाव:

        • मेंढक महत्वपूर्ण संकेतक प्रजातियाँहोते हैं, क्योंकि उनकी संवेदनशीलता पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को दर्शाती है।
        • मेंढकों की संख्या में कमी अक्सर व्यापक पर्यावरणीय गिरावट का संकेत होती है।
        • सात गैलेक्सी फ्रॉग का गायब होना यह दिखाता है कि गलत तरीके से किया गया फोटो पर्यटन सीधे तौर पर अत्यंत संवेदनशील प्रजातियों के लिए खतरा बन सकता है।

निष्कर्ष:

इन सात दुर्लभ गैलेक्सी फ्रॉग का संभावित नुकसान संरक्षण से जुड़े एक गंभीर और विरोधाभासी खतरे को सामने लाता है। जिन गतिविधियों (जैसे वन्यजीव फोटो पर्यटन) का उद्देश्य प्रकृति और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना होता है यदि वे सख्त नैतिक मानकों और प्रभावी नियमन के बिना संचालित की जाएँ, तो अनजाने में ही प्रजातियों के पतन की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं। यह घटना पश्चिमी घाट जैसे पर्यावरणीय रूप से अत्यंत नाजुक क्षेत्रों में टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने और जैव विविधता संरक्षण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और कड़े नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता पर एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखी जानी चाहिए।