होम > Blog

Blog / 17 Jan 2026

भारत में सड़क दुर्घटना संकट पर रिपोर्ट

संदर्भ:

भारत सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली वार्षिक मौतों की संख्या के मामले में विश्व में पहले स्थान पर है। हाल ही में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा सेव लाइफ फ़ाउंडेशन (SaveLIFE Foundation) द्वारा जारी एक संयुक्त रिपोर्ट में देश के उन शीर्ष 100 ज़िलों की पहचान की गई है, जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की गंभीरता सबसे अधिक पाई गई है। इस सूची में महाराष्ट्र का नासिक ग्रामीण ज़िला पहले स्थान पर है, जबकि इसके बाद पुणे ग्रामीण, पटना और अहमदनगर का स्थान आता है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

      • दुर्घटना और मृत्यु के आँकड़े (शीर्ष ज़िले, 2023–24):

ज़िला

दुर्घटनाएँ

मृत्यु

नासिक ग्रामीण

4,336

2,678

पुणे ग्रामीण

4,886

2,781

पटना

3,120

2,222

अहमदनगर

4,807

2,433

      • मौतों का वितरण:
        • 59% मृत्यु बिना किसी यातायात नियम उल्लंघन के होती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सड़क डिज़ाइन और इंजीनियरिंग की कमियाँ एक बड़ा कारण हैं।
        • 53% मृत्यु शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच होती हैं, जो खराब रोशनी और कमज़ोर निगरानी व्यवस्था की ओर संकेत करता है।
        • 80% घायलों को सरकारी 108 एम्बुलेंस सेवा के बजाय निजी साधनों से अस्पताल पहुँचाया जाता है।
      • स्थान-विशेष पर दुर्घटनाओं का जमाव:
        • अधिकांश दुर्घटनाएँ चिन्हित दुर्घटना-प्रवण स्थलों, विशेष सड़क खंडों या कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों के आसपास होती हैं।
        • दुर्घटना-प्रवण स्थल कुल मौतों के 58% के लिए ज़िम्मेदार हैं, जबकि महत्वपूर्ण सड़क कॉरिडोरों पर 42% मौतें दर्ज की गई हैं।
      • दुर्घटनाओं के प्रकार और कारण:
        • पीछे से टक्कर, आमने-सामने की टक्कर और पैदल यात्रियों से जुड़ी दुर्घटनाएँ कुल मौतों के 72% के लिए ज़िम्मेदार हैं।
        • यातायात नियम उल्लंघन में तेज़ गति (19%), लापरवाह ड्राइविंग (7%) और खतरनाक ओवरटेकिंग (3%) प्रमुख कारण हैं।
        • इंजीनियरिंग से जुड़ी मुख्य कमियों में क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर, मिटे हुए सड़क चिह्न, खराब संकेतक, बिना सुरक्षा वाले कठोर ढाँचे और अपर्याप्त रोशनी शामिल हैं।
      • क्षेत्रीय निष्कर्ष:
        • उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक गंभीर ज़िले पाए गए हैं, इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान का स्थान आता है।
      • अवसंरचना की स्थिति:
        • भारत का सड़क नेटवर्क 63.45 लाख किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग, 1.8 लाख किलोमीटर राज्य राजमार्ग और 60 लाख किलोमीटर से अधिक अन्य सड़कें शामिल हैं।
        • कुल सड़क दुर्घटना मौतों में से 63% गैर-राष्ट्रीय राजमार्गों पर होती हैं, जिससे स्थानीय सड़कों की डिज़ाइन, पुलिस व्यवस्था और अस्पतालों की तैयारी में मौजूद कमियाँ स्पष्ट होती हैं।

Image

मुख्य सिफ़ारिशें:

      • इंजीनियरिंग सुधार:
        • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा प्रत्येक सड़क कॉरिडोर का नियमित सड़क सुरक्षा सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए।
        • दुर्घटना-प्रवण स्थलों पर बार-बार सामने आने वाली शीर्ष 20 इंजीनियरिंग समस्याओं को भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।
      • पुलिसिंग और प्रवर्तन:
        • महत्वपूर्ण और संवेदनशील पुलिस थानों को पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी उपकरण और प्रवर्तन क्षमता से सशक्त किया जाए।
        • दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में सामान्य कार्रवाई के बजाय स्थान-विशेष पर केंद्रित और निरंतर प्रवर्तन रणनीति अपनाई जाए।
      • आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य व्यवस्था:
        • 108 एम्बुलेंस सेवाओं का राष्ट्रीय एम्बुलेंस कोड के अनुरूप नियमित ऑडिट किया जाए, ताकि सेवा की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।
        • घायलों के कम से कम 75% मामलों में 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पताल पहुँचाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया जाए।
      • बजट और योजनाओं का बेहतर उपयोग:
        • रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि नई योजनाएँ शुरू करने की बजाय मौजूदा योजनाओं के प्रभावी और समन्वित क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
        • इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बजट के बीच बेहतर तालमेल, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

आगे की राह:

      • भारत की सड़क सुरक्षा समस्या योजनाओं की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़ी समस्या है।
      • बेहतर सड़क डिज़ाइन, सख़्त प्रवर्तन और तेज़ आपातकालीन सेवाओं से बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता है।
      • ये प्रयास स्टॉकहोम घोषणा (2020) के तहत 2030 तक सड़क दुर्घटना मौतों को आधा करने के लक्ष्य के अनुरूप हैं।

निष्कर्ष:

कुछ विशेष ज़िलों और स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं का अधिक होना यह दर्शाता है कि लक्षित और केंद्रित सुधारों से बड़ा बदलाव संभव है। सड़क सुरक्षा के लिए एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें अवसंरचना सुधार, प्रभावी पुलिस व्यवस्था, तेज़ आपातकालीन सेवाएँ और निरंतर जन-जागरूकता शामिल हों।