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Blog / 07 Jan 2026

हिमालयी जलवायु वित्त अंतराल  पर रिपोर्ट

संदर्भ:

हाल ही में ​'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' (ICIMOD) द्वारा जारी हिमालयी जलवायु वित्त अंतराल  रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत सहित हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र के देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए धन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अकेले भारत को अपने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन (Adaptation) और शमन (Mitigation) की जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना लगभग 102 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

1. जलवायु वित्त की आवश्यकता :

      • हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र: आठ देशों (भारत, चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार) में फैले इस क्षेत्र को जलवायु प्रभावों से निपटने और लचीलापन बनाने के लिए प्रति वर्ष लगभग 768.7 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है।
      • भारत की हिस्सेदारी: इस आवश्यकता में भारत का हिस्सा सालाना लगभग 102 बिलियन डॉलर अनुमानित है।
      • चीन की आवश्यकता: चीन की जरूरत कहीं अधिक है, जो लगभग 605 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष है। भारत और चीन मिलकर इस क्षेत्र की कुल जलवायु वित्त जरूरतों का 92 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं।

2. दीर्घकालिक वित्त अंतराल:

      • ​2020-2050 की अवधि के लिए क्षेत्रीय जलवायु वित्त का कुल अंतराल लगभग 12 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है।
      • यह पहाड़ी पारिस्थितिक तंत्रों में निवेश की विशाल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

3. जलवायु संवेदनशीलता के मुख्य कारक:

हिमालयी क्षेत्र इन कारणों से जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है:

·        ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना।

·        जैव विविधता की हानि।

·        चरम मौसम की घटनाओं (जैसे बाढ़, बादल फटना) की बढ़ती आवृत्ति।

·        बढ़ता जल संकट।

भारत के लिए निहितार्थ:

दबाव में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र:

·        हिमालय दक्षिण एशिया के अरबों लोगों के लिए ताजे पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और भारत की कृषि उत्पादकता व आर्थिक स्थिरता के लिए केंद्रीय है।

·        ग्लेशियरों का पीछे हटना और वर्षा के अनियमित पैटर्न से देश की जल सुरक्षा, खाद्य प्रणाली और आपदा तैयारियों को खतरा है।

धन की कमी और विकास का दबाव:

·        भारी वित्तीय जरूरतों के बावजूद, वर्तमान में उपलब्ध जलवायु वित्त आवश्यक स्तर से बहुत कम है। इससे भारत की बड़े पैमाने पर अनुकूलन उपाय लागू करने की क्षमता सीमित हो जाती है।

·        सीमित घरेलू बजट और अन्य विकास प्राथमिकताएं (जैसे गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचा) इस चुनौती को और कठिन बना देती हैं।

ICIMOD के बारे में:

·        ​5 दिसंबर 1983 को स्थापित और काठमांडू, नेपाल में मुख्यालय वाला 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' (ICIMOD) एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसका मिशन ज्ञान साझा करना है जो क्षेत्रीय नीति और निवेश को सूचित करता है, जिससे सदस्य देश जलवायु-अनुकूल और हरित विकास की ओर बढ़ सकें।

निष्कर्ष:

​ICIMOD की रिपोर्ट हिंदू कुश हिमालय में जलवायु वित्त के एक बड़े अंतर को उजागर करती है। इस कमी को दूर करने के लिए घरेलू संसाधनों को जुटाने, अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त को मजबूत करने और नयी फंडिंग तंत्र (Innovative funding mechanisms) की आवश्यकता होगी ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की जा सके।