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Blog / 03 Oct 2026

वाणिज्य विभाग ने रिलीफ (RELIEF) योजना की समयसीमा बढ़ाई

संदर्भ:

हाल ही में, वाणिज्य विभाग ने रिलीफ (RELIEF) योजना के घटक-II के तहत पात्रता और वैधता अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया है। इस विस्तार का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक और समुद्री-लॉजिस्टिक्स संबंधी व्यवधानों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है।

RELIEF योजना क्या है?

RELIEF का पूरा नाम रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन है। इसे निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के तहत 19 मार्च 2026 को शुरू किया गया था।

यह योजना निम्नलिखित कारणों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों की सहायता के लिए शुरू की गई थी:

      • माल ढुलाई लागत में असाधारण वृद्धि
      • बीमा प्रीमियम में वृद्धि
      • युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिम
      • खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशियाई समुद्री गलियारे में व्यवधान

एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) इस पहल के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

RELIEF का घटक-II:

घटक-II आगामी निर्यात खेपों के लिए बीमा सहायता पर केंद्रित है।

विस्तारित व्यवस्था के तहत:

      • निर्यातक पात्र ECGC कवर के माध्यम से 95% जोखिम कवरेज प्राप्त कर सकते हैं।
      • यह 16 मार्च 2026 को या उसके बाद प्राप्त की गई स्टैंड अलोन पॉलिसियों और होल टर्नओवर पॉलिसियों पर लागू होता है।
      • पात्रता की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई है।
      • पात्र अवधि के दौरान निर्यातकों द्वारा भुगतान किया जाने वाला प्रीमियम व्यवधान से पहले के स्तर से अधिक नहीं होगा।

पात्र कार्गो:

इस सहायता के अंतर्गत शामिल हैं:

1.        फुल कंटेनर लोड (FCL)

2.      लेस दैन कंटेनर लोड (LCL)

3.      रीफर कंटेनर

हालाँकि, इस घटक के अंतर्गत ऊर्जा से संबंधित खेपों को शामिल नहीं किया गया है।

भारतीय निर्यात के लिए महत्व:

      • पश्चिम एशिया भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है। इस क्षेत्र में व्यवधान से निम्नलिखित प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं: भू-राजनीतिक तनाव,  शिपिंग जोखिम, माल ढुलाई लागत, बीमा लागत, निर्यात लागत में वृद्धि
      • इसलिए, यह विस्तार जारी लॉजिस्टिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों को अधिक निश्चितता प्रदान करता है।

संबंधित निर्यात सहायता:

      • RELIEF के साथ-साथ, सरकार ने RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) योजना को भी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। मौजूदा दरें और मूल्य सीमा अपरिवर्तित रहेंगी।
      • RoDTEP का उद्देश्य उन पात्र केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों, करों तथा लेवी की वापसी करना है, जो अन्यथा निर्यातकों को वापस नहीं किए जाते हैं।

निष्कर्ष:

RELIEF के घटक-II की समयसीमा का विस्तार भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच व्यापार जोखिम प्रबंधन और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को दर्शाता है। बेहतर बीमा कवरेज और प्रीमियम सुरक्षा प्रदान करके यह उपाय भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह को बनाए रखने में मदद करने का प्रयास करता है।

 

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