सदर्भ:
हाल ही में, लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक प्रश्नपत्र लीक-रोधी कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच पारित हुआ। यह विधेयक लंबे समय के बाद जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के लिए किए जाने वाले आवेदनों की अधिक कठोर जाँच सुनिश्चित कर कानूनी ढाँचे को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
पृष्ठभूमि:
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- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 भारत में जन्म एवं मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System- CRS) की स्थापना की गई, जो महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय आँकड़ों तथा कानूनी पहचान का प्रमुख स्रोत है।
- वर्ष 2023 में इस अधिनियम में संशोधन कर राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस की व्यवस्था की गई तथा जन्म प्रमाण-पत्र को आधार, पासपोर्ट, मतदाता सूची, शैक्षिक अभिलेख एवं ड्राइविंग लाइसेंस जैसे विभिन्न अभिलेखों के अद्यतन हेतु एकल दस्तावेज के रूप में मान्यता प्रदान की गई।
- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 भारत में जन्म एवं मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System- CRS) की स्थापना की गई, जो महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय आँकड़ों तथा कानूनी पहचान का प्रमुख स्रोत है।
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संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
यह विधेयक अधिनियम की धारा 13(3) में संशोधन करते हुए विलंबित पंजीकरण के लिए द्वि-स्तरीय अनुमोदन व्यवस्था लागू करता है-
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- एक वर्ष से दो वर्ष के बीच विलंबित पंजीकरण: वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी। अनुमोदन संबंधित जिलाधिकारी (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा अधिकार-क्षेत्र वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाएगा।
- दो वर्ष से अधिक विलंबित पंजीकरण: अब अनुमोदन के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। इससे पूर्व यह अधिकार कार्यपालिका के पास था। इस परिवर्तन का उद्देश्य अत्यधिक विलंब से किए गए पंजीकरणों की अधिक कठोर जाँच सुनिश्चित करना है।
- एक वर्ष से दो वर्ष के बीच विलंबित पंजीकरण: वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी। अनुमोदन संबंधित जिलाधिकारी (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा अधिकार-क्षेत्र वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाएगा।
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विधेयक के उद्देश्य:
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- फर्जी अथवा जाली जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्रों पर रोक लगाना।
- नागरिक पंजीकरण प्रणाली की विश्वसनीयता एवं अखंडता को सुदृढ़ करना।
- जनसांख्यिकीय एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकीय आँकड़ों की शुद्धता में सुधार करना।
- अत्यधिक विलंब वाले मामलों में न्यायिक निगरानी को बढ़ाना।
- सुशासन एवं सार्वजनिक सेवाओं के लिए विश्वसनीय पहचान अभिलेख सुनिश्चित करना।
- फर्जी अथवा जाली जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्रों पर रोक लगाना।
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महत्त्व:
जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण किसी व्यक्ति की कानूनी पहचान स्थापित करने का आधार है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं, उत्तराधिकार अधिकारों, पेंशन एवं अन्य सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, नागरिक पंजीकरण से प्राप्त सटीक आँकड़े जनसंख्या आकलन, सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना, आपदा प्रबंधन तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह संशोधन आधिकारिक अभिलेखों की प्रामाणिकता बढ़ाने तथा पहचान संबंधी धोखाधड़ी को कम करने का प्रयास करता है।
निष्कर्ष:
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 विलंबित पंजीकरणों की अधिक कठोर जाँच की व्यवस्था करके भारत की नागरिक पंजीकरण प्रणाली को और सुदृढ़ बनाता है। सशक्त डिजिटल अवसंरचना तथा नागरिक-अनुकूल प्रक्रियाओं के साथ इसका प्रभावी क्रियान्वयन सटीक अभिलेखों, पारदर्शी प्रशासन और बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
