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Blog / 28 Apr 2026

नीति आयोग का पुनर्गठन

संदर्भ:

भारत सरकार ने हाल ही में नीति आयोग का पुनर्गठन किया है और अशोक कुमार लाहिरी को इसका नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह विकास भारत के बदलते आर्थिक शासन ढांचे और गतिशील नीति संस्थानों की आवश्यकता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नीति आयोग के बारे में:

नीति आयोग (National Institution for Transforming India) भारत सरकार का प्रमुख नीति थिंक टैंक है, जिसका उद्देश्य सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को बढ़ावा देना और सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।

स्थापना और पृष्ठभूमि:

      • इसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव के माध्यम से की गई थी।
      • इसने योजना आयोग (Planning Commission) का स्थान लिया, जो केंद्रीकृत योजना मॉडल पर आधारित था।
      • इसका उद्देश्य शीर्ष-से-नीचे (top-down) दृष्टिकोण के स्थान पर नीचे-से-ऊपर (bottom-up) और सहभागी (participatory) मॉडल को अपनाना था।

Ashok Kumar Lahiri Appointed NITI Aayog Vice Chairperson – Jan Sansad NEWS

उद्देश्य:

      • नीति निर्माण में राज्यों की भागीदारी को बढ़ावा देना।
      • नवाचार और रणनीतिक सोच के लिए एक मंच के रूप में कार्य करना।
      • आर्थिक योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना।
      • शासन की दक्षता और समावेशी विकास को बढ़ाना।

मुख्य कार्य:

      • नीति निर्माण: यह राष्ट्रीय विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ और ढाँचे तैयार करता है।
      • ज्ञान और नवाचार केंद्र: यह निम्नलिखित का भंडार (repository) के रूप में कार्य करता है:
        • सर्वोत्तम प्रथाएँ (Best practices)
        • नीति अनुसंधान (Policy research)
        • वैश्विक मानक (Global benchmarks)
      • निगरानी और मूल्यांकन: प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करता है
        • डेटा-आधारित शासन मॉडल का उपयोग करता है।
      • सुधार उत्प्रेरक (Reform Catalyst):
        • संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाता है।
        • जीवन स्तर (Ease of Living) और व्यवसाय करने में सरलता (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

संगठनात्मक संरचना:

      • अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
      • उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त (कैबिनेट स्तर का पद)
      • शासी परिषद (Governing Council): राज्यों के मुख्यमंत्री और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि
      • पूर्णकालिक सदस्य: विषय विशेषज्ञ
      • पदेन सदस्य (Ex-Officio Members): चयनित केंद्रीय मंत्री
      • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त

यह संरचना राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करती है, जिससे सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को मजबूती मिलती है।

हालिया पुनर्गठन का महत्व:

नीति निरंतरता और नवाचार

अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिरी की नियुक्ति यह संकेत देती है कि:
आर्थिक विशेषज्ञता पर अधिक जोर दिया जाएगा
साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण
(evidence-based policymaking) को मजबूत किया जाएगा

सहकारी संघवाद को सशक्त बनाना
पुनर्गठन से अवसर मिलता है:
केंद्रराज्य संबंधों को पुनर्जीवित करने का
क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने का

उभरती चुनौतियों के अनुरूप
डिजिटल अर्थव्यवस्था
जलवायु परिवर्तन
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ

इन क्षेत्रों में रणनीति निर्माण में नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

समस्याएँ और आलोचनाएँ:

वित्तीय शक्तियों का अभाव (Lack of Financial Powers)
योजना आयोग के विपरीत, नीति आयोग:
धन का आवंटन नहीं करता
केवल सलाहकार भूमिका में कार्य करता है

सीमित कार्यान्वयन अधिकार
इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं
कार्यान्वयन के लिए मंत्रालयों और राज्यों पर निर्भरता रहती है

संघीय चिंताएँ
कुछ राज्यों ने निम्नलिखित पर चिंता व्यक्त की है:
o केंद्र का अधिक प्रभाव
o वित्तीय स्वायत्तता में कमी

आगे की राह:

• संस्थागत स्वायत्तता को मजबूत करना
डेटा-आधारित निर्णय लेने के उपकरणों को बढ़ावा देना
राज्यों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना
स्थानीय शासन संस्थाओं (पंचायती राज संस्थाओं) के इनपुट को शामिल करना

निष्कर्ष:

नीति आयोग का पुनर्गठन भारत के नीति पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संस्थान ने भारत को केंद्रीकृत योजना प्रणाली से सफलतापूर्वक दूर किया है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि सहकारी संघवाद को कितना मजबूत किया जाता है, कार्यान्वयन क्षमता को कितना बढ़ाया जाता है और यह उभरती आर्थिक चुनौतियों के अनुसार कितना अनुकूल होता है। नई नेतृत्व टीम के साथ, यह भारत के विकास पथ में एक परिवर्तनकारी शक्ति बनने की क्षमता रखता है।