होम > Blog

Blog / 06 Aug 2026

RBI शहरी सहकारी बैंक को लाइसेंस देना फिर से शुरू करेगा

संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने घोषणा की है कि जनवरी 2026 के चर्चा-पत्र (Discussion Paper) पर हितधारकों (Stakeholders) से प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद जल्द ही नए शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks-UCBs) के लाइसेंस जारी करने संबंधी मसौदा दिशानिर्देश (Draft Guidelines) जारी करेगा। वर्ष 2004 में लगाए गए लाइसेंसिंग प्रतिबंध (Licensing Freeze) के बाद पहली बार नए UCB लाइसेंस जारी करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

शहरी सहकारी बैंक क्या हैं?

शहरी सहकारी बैंक (UCBs) प्राथमिक सहकारी वित्तीय संस्थान (Primary Cooperative Financial Institutions) हैं, जो शहरी एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्य करते हैं। इनका स्वामित्व एवं प्रबंधन इनके सदस्यों द्वारा "एक सदस्य, एक वोट (One Member, One Vote)" के सिद्धांत पर किया जाता है, चाहे उनकी शेयरधारिता (Shareholding) कितनी भी हो। ये मुख्यतः छोटे उधारकर्ताओं, स्थानीय व्यवसायों, व्यापारियों, स्वरोज़गार (Self-employed) पेशेवरों, वेतनभोगी व्यक्तियों तथा मध्यम आय वर्ग के परिवारों को बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करते हैं। वाणिज्यिक बैंकों (Commercial Banks) द्वारा अपेक्षाकृत कम सेवाएँ प्राप्त समुदायों तक सुलभ बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाकर UCBs वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कानूनी पंजीकरण एवं नियामकीय ढाँचा:

      • यदि कोई UCB केवल एक राज्य में कार्य करता है, तो उसका पंजीकरण राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम (State Cooperative Societies Act) के अंतर्गत किया जाता है। यदि वह एक से अधिक राज्यों में कार्य करता है, तो उसका पंजीकरण बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 (Multi-State Cooperative Societies Act, 2002) के अंतर्गत होता है।
      • इनके प्रशासनिक कार्यों की निगरानी सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Registrar of Cooperative Societies-RCS) अथवा केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Central Registrar of Cooperative Societies-CRCS) द्वारा की जाती है, जबकि इनके बैंकिंग कार्यों का विनियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 [सहकारी समितियों पर लागू] (Banking Regulation Act, 1949) तथा बैंकिंग विधि (सहकारी समितियाँ) अधिनियम, 1955 [Banking Laws (Co-operative Societies) Act, 1955] के अंतर्गत किया जाता है।

द्वैध नियंत्रण (Dual Control) एवं RBI की बढ़ी हुई शक्तियाँ:

      • ऐतिहासिक रूप से UCBs द्वैध नियामकीय व्यवस्था (Dual Regulatory Framework) के अंतर्गत कार्य करते थे। इनके प्रबंधन, चुनाव एवं पंजीकरण का संचालन सहकारी कानूनों के अंतर्गत होता था, जबकि लाइसेंसिंग, पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) तथा बैंकिंग संचालन का नियमन RBI द्वारा किया जाता था। इससे नियामकीय कमियाँ उत्पन्न होती थीं तथा सुधारात्मक कार्रवाइयों में देरी होती थी।
      • वर्ष 2020 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम (Banking Regulation Act) में संशोधन के बाद RBI को शासन सुधार (Governance Reforms), निदेशक मंडल (Board) को भंग करने तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (Prompt Corrective Action-PCA) ढाँचे को लागू करने की अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 एवं 23 के अंतर्गत RBI को बैंकिंग लाइसेंस प्रदान करने तथा नई शाखाओं के विस्तार की स्वीकृति देने का अधिकार प्राप्त है।

2004 में लाइसेंसिंग क्यों रोक दी गई थी?

      • वर्ष 2004 में कई सहकारी बैंकों के विफल होने के बाद RBI ने नए UCB लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया था। इन विफलताओं ने कमजोर शासन व्यवस्था, बढ़ते गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets-NPAs), वित्तीय धोखाधड़ी तथा पेशेवर प्रबंधन की कमी जैसी समस्याओं को उजागर किया।
      • माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक (Madhavpura Mercantile Cooperative Bank) तथा बाद में पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (PMC) बैंक के पतन ने इस क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को सामने ला दिया। द्वैध नियामकीय व्यवस्था से उत्पन्न चुनौतियों के साथ इन समस्याओं के कारण RBI ने मजबूत नियामकीय ढाँचा विकसित होने तक नए लाइसेंस जारी करना स्थगित कर दिया।

अब RBI लाइसेंसिंग दोबारा क्यों शुरू कर रहा है?

      • पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जिनमें बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 [Banking Regulation (Amendment) Act, 2020], चार-स्तरीय नियामकीय ढाँचा (Four-tier Regulatory Framework, 2022) तथा राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (National Urban Cooperative Finance and Development Corporation-NUCFDC), 2024 की स्थापना शामिल है।
      • बेहतर शासन व्यवस्था, घटते NPAs, मजबूत पूंजी पर्याप्तता तथा बढ़ी हुई लाभप्रदता (Profitability) ने UCBs की वित्तीय मजबूती (Resilience) को बढ़ाया है। प्रस्तावित ढाँचे के अनुसार केवल वे सहकारी ऋण समितियाँ (Cooperative Credit Societies), जिनकी न्यूनतम पूंजी ₹300 करोड़, 12% पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) तथा शुद्ध NPA (Net NPA) 3% से कम होगा, उन्हें UCB में परिवर्तित होने की पात्रता मिलेगी।

महत्त्व:

UCB लाइसेंसिंग को पुनः प्रारंभ करने से वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा स्थानीय व्यवसायों के लिए ऋण उपलब्धता में सुधार होगा, बैंकिंग क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलेगा तथा सुशासित एवं पेशेवर रूप से प्रबंधित संस्थानों के माध्यम से सहकारी बैंकिंग का विस्तार होगा। साथ ही, इससे देश की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) भी और अधिक मजबूत होगी।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj