संदर्भ:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024–25 रिपोर्ट में भारत की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक विरोधाभास सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, वहीं इन मामलों में शामिल कुल वित्तीय राशि में तेज़ वृद्धि हुई है। यह प्रवृत्ति बैंकिंग धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप, वित्तीय अपराधों की बढ़ती जटिलता तथा बैंकिंग सेवाओं के तीव्र डिजिटलीकरण के बीच प्रभावी निगरानी और नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियों को उजागर करती है।
RBI रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
मामले कम, लेकिन राशि अधिक
• कुल बैंक धोखाधड़ी के मामले (2024–25): 23,879
(2023–24 में दर्ज 36,052 मामलों की तुलना में उल्लेखनीय कमी)
• धोखाधड़ी में शामिल कुल राशि: ₹34,771 करोड़
(पिछले वर्ष की ₹11,261 करोड़ की राशि की तुलना में तीव्र वृद्धि)
RBI के अनुसार, धोखाधड़ी की कुल राशि में आई इस असाधारण वृद्धि का प्रमुख कारण 122 मामलों की पुनः जाँच और नई रिपोर्टिंग है, जिनमें कुल ₹18,336 करोड़ की राशि शामिल है। यह पुनर्वर्गीकरण 27 मार्च 2023 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में किया गया, जिसमें बैंकों को किसी उधारकर्ता को ‘धोखाधड़ीकर्ता’ घोषित करने से पहले निर्धारित विधिक प्रक्रिया का पूर्णतः पालन करने का निर्देश दिया गया था।
हाल के रुझान (अप्रैल–सितंबर 2025–26):
• धोखाधड़ी के कुल मामले: 5,092 (पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 18,386 मामलों की तुलना में उल्लेखनीय कमी)
• धोखाधड़ी में शामिल कुल राशि: ₹21,515 करोड़ (पिछले वर्ष की ₹16,569 करोड़ की तुलना में स्पष्ट वृद्धि)
ये आँकड़े दर्शाते हैं कि भले ही बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में निरंतर गिरावट आ रही हो, लेकिन उच्च मूल्य वाली धोखाधड़ी अब भी बैंकिंग प्रणाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बैंक धोखाधड़ी का स्वरूप:
1. प्रकार के आधार पर:
• कार्ड और इंटरनेट से जुड़ी धोखाधड़ी:
वर्ष 2024–25 में कुल बैंक धोखाधड़ी मामलों की संख्या का 66.8% हिस्सा
• ऋण (एडवांस) से संबंधित धोखाधड़ी:
कुल धोखाधड़ी राशि का 33.1%, अर्थात मूल्य के आधार पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाली श्रेणी
इससे स्पष्ट होता है कि जहाँ डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी मामलों की संख्या के लिहाज़ से प्रमुख है, वहीं ऋण से जुड़ी धोखाधड़ी बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा जोखिम उत्पन्न करती है।
2. बैंक श्रेणी के आधार पर:
• निजी क्षेत्र के बैंक:
o कुल धोखाधड़ी मामलों की संख्या का 59.3%
o कार्ड और इंटरनेट धोखाधड़ी की संख्या अपेक्षाकृत अधिक
• सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक:
o कुल धोखाधड़ी राशि का 70.7%
o ऋण से जुड़ी धोखाधड़ी संख्या और वित्तीय मूल्य दोनों के लिहाज़ से प्रमुख
RBI के अनुसार, विभिन्न बैंक समूहों में ऋण से संबंधित धोखाधड़ी में दर्ज की गई वृद्धि का मुख्य कारण पूर्व में दर्ज मामलों का पुनर्वर्गीकरण है, जिनमें से अधिकांश बड़े कॉरपोरेट ऋणों से जुड़े हुए थे।
बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती:
धोखाधड़ी की राशि बढ़ने के बावजूद, RBI ने भारत की बैंकिंग प्रणाली को कुल मिलाकर मज़बूत और स्थिर बताया है।
1. वित्तीय स्थिति के संकेतक:
• बैलेंस शीट वृद्धि (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक): 11.2% (2024–25)
• क्रेडिट वृद्धि: 11.5%
• जमा वृद्धि: 11.1%
2. लाभप्रदता और पूंजी पर्याप्तता:
• परिसंपत्ति पर प्रतिफल (RoA): सभी बैंक समूहों में सुधार
• जोखिम-भारित परिसंपत्तियों पर पूंजी अनुपात (CRAR):
o मार्च 2025: 17.4%
o सितंबर 2025: 17.2%
(नियामकीय न्यूनतम स्तर से काफ़ी अधिक)
3. परिसंपत्ति गुणवत्ता:
• सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (GNPA):
o मार्च 2025 में घटकर 2.2% (कई दशकों का न्यूनतम स्तर)
o सितंबर 2025 में और सुधरकर 2.1%
शहरी सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में भी परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर हुई है और पूंजी की स्थिति मज़बूत बनी हुई है।
RBI द्वारा चिन्हित उभरती चुनौतियाँ:
• बड़े मूल्य की धोखाधड़ी में वृद्धि: धोखाधड़ी के मामलों की संख्या कम होने के बावजूद, उच्च वित्तीय मूल्य वाले मामलों में जोखिम का संकेंद्रण लगातार बढ़ रहा है।
• डिजिटल और साइबर जोखिम: बैंकिंग सेवाओं के तीव्र डिजिटलीकरण के कारण साइबर धोखाधड़ी, डेटा उल्लंघन और परिचालन संबंधी कमजोरियों की आशंका बढ़ गई है।
• गैर-बैंक संस्थाओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) और फिनटेक फर्में ऋण बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को तेज़ कर रही हैं, जिससे नियामकीय और पर्यवेक्षण संबंधी चुनौतियाँ जटिल होती जा रही हैं।
• शासन और जोखिम प्रबंधन में कमियाँ: कॉरपोरेट गवर्नेंस, ऋण आकलन (क्रेडिट अप्रेज़ल) तथा स्वीकृति के बाद की निगरानी प्रणालियों में निरंतर बनी हुई कमजोरियाँ वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं।
आगे की राह:
RBI ने इस संदर्भ में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ज़ोर दिया है:
• जोखिम आकलन और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था को मज़बूत किया जाए
• डिजिटल तकनीक को सुरक्षित और जिम्मेदारी से अपनाया जाए
• उपभोक्ताओं में जागरूकता और संरक्षण बढ़ाया जाए
• कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों में सुधार किया जाए
• धोखाधड़ी की पहचान, रिपोर्टिंग और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ मजबूत हों
वित्तीय समावेशन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और भरोसे को बनाए रखना भारत के बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और सतत नीति चुनौती बना हुआ है।
