होम > Blog

Blog / 30 Mar 2026

RBI पेमेंट्स विज़न 2028: मुख्य पहलें और डिजिटल पेमेंट्स में वृद्धि

सन्दर्भ:

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 'पेमेंट्स विज़न 2028' दस्तावेज़ जारी किया है, जिसका विषय "भारत के भुगतान क्षेत्र को नया आकार देना" (Shaping India’s Payment Frontier) है। यह विज़न दस्तावेज़ दिसंबर 2028 तक भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने, सुरक्षित करने और वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने के लिए 15 विशिष्ट पहलों की रूपरेखा तैयार करता है।

मुख्य पहल:

      • उपयोगकर्ता सशक्तिकरण (User Empowerment):
        • 'स्विच ऑन/ऑफ' सुविधा: वर्तमान में यह केवल कार्ड्स के लिए उपलब्ध है, लेकिन अब इसे सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों (जैसे UPI, IMPS) तक विस्तारित किया जाएगा। इससे उपयोगकर्ता किसी भी समय अपनी डिजिटल लेनदेन सेवाओं को सक्रिय या निष्क्रिय कर सकेंगे।
        • पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS): यह बैंक खाता पोर्टेबिलिटी को आसान बनाएगा। यदि कोई ग्राहक अपना बैंक बदलता है, तो उसके स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शंस (SI) और मैंडेट्स (जैसे लोन EMI या बिल भुगतान) स्वतः ही नए बैंक खाते में स्थानांतरित हो जाएंगे।
      • धोखाधड़ी से सुरक्षा (Fraud Prevention):
        • साझा जिम्मेदारी ढांचा (Shared Responsibility Framework): डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में अब जारीकर्ता (Issuing) और लाभार्थी (Beneficiary) दोनों बैंकों की जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे बैंकों को सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
        • साइबर की-रिस्क इंडिकेटर्स (KRI): गैर-बैंक भुगतान प्रणालियों के लिए एक निगरानी ढांचा तैयार किया जाएगा ताकि साइबर खतरों का समय रहते पता लगाया जा सके।
      • नवाचार और सुगमता:
        • ई-चेक (e-cheques): पारंपरिक कागजी चेक की विश्वसनीयता को डिजिटल गति के साथ जोड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक चेक की अवधारणा लाई जाएगी।
        • MSME सहायता: 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' (TReDS) प्लेटफॉर्म के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) सुनिश्चित की जाएगी ताकि छोटे उद्योगों को ऋण प्राप्त करने में आसानी हो।
      • वैश्विक विस्तार (Global Reach):
        • सीमा पार (Cross-border) भुगतानों को सस्ता और तेज बनाने के लिए विदेशी केंद्रीय बैंकों के साथ सहयोग और नियमों को सरल बनाने पर जोर दिया गया है।

RBI Payments Vision 2028

संस्थागत ढांचा:

      • इस विज़न के कार्यान्वयन की देखरेख भुगतान नियामक बोर्ड (Payments Regulatory Board - PRB) द्वारा की जाएगी।
      • इसकी अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करेंगे। यह बोर्ड पुराने 'भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमन और पर्यवेक्षण बोर्ड' (BPSS) का स्थान लेगा।

'पेमेंट्स विज़न 2028 दस्तावेज़ ' का महत्व:

      • वित्तीय समावेशन: यह विज़न ग्रामीण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में डिजिटल पैठ बढ़ाकर अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय सेवा पहुँचाने में सहायक होगा।
      • डिजिटल संप्रभुता: 'DLEI' (डोमेस्टिक लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर) जैसे उपायों से भारत अपने वित्तीय डेटा और लेनदेन की ट्रैकिंग को अधिक सटीक बना पाएगा।
      • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: भुगतान प्रणालियों में दक्षता से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) में सुधार होगा और लेनदेन लागत में कमी आएगी।

निष्कर्ष:

पेमेंट्स विज़न 2028 केवल तकनीक के बारे में नहीं, बल्कि यह डिजिटल लेनदेन में 'विश्वास' को गहरा करने के विषय में है। यह भारत को न केवल एक 'कैशलेस' अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल वित्त के क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी मजबूत करेगा।