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Blog / 19 Sep 2026

प्रोजेक्ट चीता: भारत में चीता पुनर्वास के चार वर्ष

संदर्भ:

प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के एक दिन बाद, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जंगल में चार शावकों को जन्म दिया। KGP12, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई चीता गामिनीकी बेटी है। यह जन्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह भारत में जन्मी चीतों की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है और भारत की परिस्थितियों में चीतों के प्राकृतिक प्रजनन एवं अनुकूलन का संकेत देता है।

प्रोजेक्ट चीता के बारे में:

      • प्रोजेक्ट चीता भारत का राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 1952 में भारत से विलुप्त हो चुके चीते को पुनः भारत में बसाना है। इसे औपचारिक रूप से 17 सितंबर 2022 को शुरू किया गया था, जब नामीबिया से आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया।
      • इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका और 2026 में बोत्सवाना से भी चीतों को भारत लाया गया।
      • सरकार के अनुसार, यह विश्व की पहली ऐसी अंतरमहाद्वीपीय पुनर्वास परियोजना है, जिसमें बड़ी संख्या में किसी बड़े जंगली मांसाहारी जीव का एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में स्थानांतरण किया गया है।

प्रोजेक्ट चीता के उद्देश्य:

इस कार्यक्रम का उद्देश्य:

      • भारत में एक व्यवहार्य और आत्मनिर्भर चीता आबादी स्थापित करना।
      • क्षरित घासभूमि और खुले वन पारिस्थितिकी तंत्रों को पुनर्स्थापित करना।
      • दीर्घकाल में लगभग 60–70 चीतों की आबादी विकसित करना।
      • चीते को फ्लैगशिप और अम्ब्रेला प्रजाति के रूप में उपयोग करके जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा देना।
      • उपयुक्त आवासों के बीच पारिस्थितिक संपर्क (Ecological Connectivity) विकसित करना।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान को क्यों चुना गया?

कूनो को निम्नलिखित कारणों से चुना गया:

        • उपयुक्त घासभूमि और खुले वन का आवास।
        • पर्याप्त शिकार-आधार (Prey Base)
        • अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप।
        • आसपास के क्षेत्रों में विस्तार की संभावनाएँ।
      • अब संरक्षण के परिदृश्य का विस्तार कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के एकीकृत प्रबंधन के माध्यम से किया जा रहा है।
      • सरकार ने मध्य प्रदेश के नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और गुजरात की बन्नी घासभूमि को भी भविष्य में चीतों को छोड़ने के संभावित स्थलों के रूप में चिन्हित किया है।

चुनौतियाँ:

प्रोजेक्ट चीता की दीर्घकालिक सफलता निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेगी:

      • पर्याप्त शिकार प्रजातियों की आबादी बनाए रखना।
      • रोगों और आनुवंशिक विविधता का प्रबंधन।
      • मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना।
      • पर्याप्त आवास और पारिस्थितिक गलियारों को सुनिश्चित करना।
      • शावकों की जीवित रहने की दर में सुधार करना।
      • केवल एक स्थान पर निर्भर रहने के बजाय कई व्यवहार्य चीता आबादियाँ स्थापित करना।
      • स्थानांतरण और नई परिस्थितियों के अनुकूलन से जुड़े मृत्यु के जोखिमों का प्रबंधन करना।

संस्थागत ढाँचा:

      • प्रोजेक्ट चीता का क्रियान्वयन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत किया जा रहा है और इसका नेतृत्व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा किया जा रहा है।
      • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) तथा राज्य वन विभाग भी इस परियोजना में वैज्ञानिक और क्षेत्रीय प्रबंधन संबंधी विशेषज्ञता प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष:

भारत में जन्मी KGP12 द्वारा चार शावकों को जन्म देना इस बात का संकेत है कि प्रोजेक्ट चीता अब केवल चीतों के स्थानांतरण के प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर भारत में प्राकृतिक प्रजनन और आबादी स्थापित करने के चरण में प्रवेश कर रहा है। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार-आधार, आनुवंशिक विविधता, शावकों की जीवित रहने की दर और स्थानीय समुदायों के साथ सह-अस्तित्व पर निर्भर करेगी।

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