संदर्भ
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लघु वन उत्पादों (MFP) की सरकारी खरीद में वर्ष 2024-25 के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 19 राज्यों में 2023-24 की तुलना में खरीद में 92% से अधिक की कमी आई है।
लघु वन उत्पादों (MFP) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बारे में:
लघु वन उपज (MFP): ये पौधों या जानवरों से प्राप्त गैर-लकड़ी वन उत्पाद हैं, जिनमें बाँस, शहद, लाख, औषधीय जड़ी-बूटियाँ, तेंदू पत्ते, गम काराया और करंज के बीज शामिल हैं। MFP 10 करोड़ से अधिक वन-आश्रित लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो उन्हें भोजन, दवा और कई आदिवासी समुदायों को उनकी वार्षिक आय का 20-40% हिस्सा प्रदान करते हैं।
लघु वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत 'प्राइसिंग सेल' द्वारा तय किया जाता है। MSP आदिवासी संग्रहकर्ताओं के लिए उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करता है और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है। इसमें आमतौर पर हर तीन साल में संशोधन किया जाता है।
MSP का उद्देश्य:
1. आदिवासी समुदायों को बिचौलियों के शोषण से बचाना।
2. वन-आश्रित आबादी के लिए आय और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना।
3. वन संसाधनों की संधारणीय (Sustainable) कटाई को प्रोत्साहित करना।
प्रमुख कानूनी ढांचा
● वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006: गैर-लकड़ी वन उत्पादों पर वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देता है।
● पेसा अधिनियम (PESA), 1996: वन प्रबंधन और MFP के विपणन में आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाता है।
आर्थिक और सामाजिक महत्व
1. यह विशेष रूप से गैर-कृषि मौसम के दौरान निर्वाह और नकद आय प्रदान करता है।
2. आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाता है, जो अक्सर MFP के संग्रह और प्रसंस्करण (Processing) में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
3. सालाना 1 करोड़ कार्यदिवस उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जो ग्रामीण विकास में योगदान देता है।
MFP के लिए प्रमुख योजनाएं और पहल
● MSP के माध्यम से MFP के विपणन की प्रणाली: 2013-14 में शुरू की गई यह योजना इमली, शहद और महुआ जैसे उत्पादों के लिए गारंटीकृत मूल्य देकर सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
● वन धन विकास केंद्र (VDVK): प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के तहत लागू ये केंद्र आदिवासी संग्रहकर्ताओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करते हैं।
● NSTFDC वित्तीय सहायता: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम MFP से जुड़ी गतिविधियों के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है।
● PM-JANMAN पहल: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को विशेष वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से सहायता प्रदान करती है।
MFP विकास के मुख्य घटक
● मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्चे माल के संग्रह से आगे बढ़कर जैम, पाउडर और तेल जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्माण।
● बुनियादी ढांचा सहयोग: भंडारण सुविधाओं, गोदामों और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना।
● क्षमता निर्माण: आदिवासियों को टिकाऊ संग्रह और विपणन प्रथाओं में प्रशिक्षित करना।
चुनौतियाँ:
● राज्य स्तर पर क्रियान्वयन (Implementation) में कमी।
● धन जारी करने में देरी और खरीद प्रक्रिया में लॉजिस्टिक बाधाएं।
● MSP और सरकारी योजनाओं के बारे में आदिवासी संग्रहकर्ताओं के बीच जागरूकता का अभाव।
निष्कर्ष:
2024-25 में MFP खरीद में 92% की गिरावट MSP तंत्र और संबंधित योजनाओं के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों को दर्शाती है। टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए राज्य-स्तरीय निष्पादन को मजबूत करना, समय पर खरीद सुनिश्चित करना और आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाना अनिवार्य है।
