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Blog / 07 Feb 2026

लघु वन उत्पादों की खरीद में गिरावट

​संदर्भ

​न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लघु वन उत्पादों (MFP) की सरकारी खरीद में वर्ष 2024-25 के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 19 राज्यों में 2023-24 की तुलना में खरीद में 92% से अधिक की कमी आई है।

​लघु वन उत्पादों (MFP) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बारे में:

​लघु वन उपज (MFP): ये पौधों या जानवरों से प्राप्त गैर-लकड़ी वन उत्पाद हैं, जिनमें बाँस, शहद, लाख, औषधीय जड़ी-बूटियाँ, तेंदू पत्ते, गम काराया और करंज के बीज शामिल हैं। MFP 10 करोड़ से अधिक वन-आश्रित लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो उन्हें भोजन, दवा और कई आदिवासी समुदायों को उनकी वार्षिक आय का 20-40% हिस्सा प्रदान करते हैं।

​लघु वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत 'प्राइसिंग सेल' द्वारा तय किया जाता है। MSP आदिवासी संग्रहकर्ताओं के लिए उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करता है और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है। इसमें आमतौर पर हर तीन साल में संशोधन किया जाता है।

​MSP का उद्देश्य:

1.     ​आदिवासी समुदायों को बिचौलियों के शोषण से बचाना।

2.     ​वन-आश्रित आबादी के लिए आय और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना।

3.     ​वन संसाधनों की संधारणीय (Sustainable) कटाई को प्रोत्साहित करना।

​प्रमुख कानूनी ढांचा

●      ​वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006: गैर-लकड़ी वन उत्पादों पर वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देता है।

●      ​पेसा अधिनियम (PESA), 1996: वन प्रबंधन और MFP के विपणन में आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाता है।

​आर्थिक और सामाजिक महत्व

1.     ​यह विशेष रूप से गैर-कृषि मौसम के दौरान निर्वाह और नकद आय प्रदान करता है।

2.     ​आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाता है, जो अक्सर MFP के संग्रह और प्रसंस्करण (Processing) में मुख्य भूमिका निभाती हैं।

3.     ​सालाना 1 करोड़ कार्यदिवस उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जो ग्रामीण विकास में योगदान देता है।

​MFP के लिए प्रमुख योजनाएं और पहल

●      ​MSP के माध्यम से MFP के विपणन की प्रणाली: 2013-14 में शुरू की गई यह योजना इमली, शहद और महुआ जैसे उत्पादों के लिए गारंटीकृत मूल्य देकर सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

●      ​वन धन विकास केंद्र (VDVK): प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के तहत लागू ये केंद्र आदिवासी संग्रहकर्ताओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करते हैं।

●      ​NSTFDC वित्तीय सहायता: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम MFP से जुड़ी गतिविधियों के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है।

●      ​PM-JANMAN पहल: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को विशेष वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से सहायता प्रदान करती है।

​MFP विकास के मुख्य घटक

●      ​मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्चे माल के संग्रह से आगे बढ़कर जैम, पाउडर और तेल जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्माण।

●      ​बुनियादी ढांचा सहयोग: भंडारण सुविधाओं, गोदामों और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना।

●      ​क्षमता निर्माण: आदिवासियों को टिकाऊ संग्रह और विपणन प्रथाओं में प्रशिक्षित करना।

​ चुनौतियाँ:

●      ​राज्य स्तर पर क्रियान्वयन (Implementation) में कमी।

●      ​धन जारी करने में देरी और खरीद प्रक्रिया में लॉजिस्टिक बाधाएं।

●      ​MSP और सरकारी योजनाओं के बारे में आदिवासी संग्रहकर्ताओं के बीच जागरूकता का अभाव।

​निष्कर्ष:

​2024-25 में MFP खरीद में 92% की गिरावट MSP तंत्र और संबंधित योजनाओं के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों को दर्शाती है। टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए राज्य-स्तरीय निष्पादन को मजबूत करना, समय पर खरीद सुनिश्चित करना और आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाना अनिवार्य है।

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj