संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रहार (PRAHAAR) – राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति (National Counter-Terrorism Policy and Strategy) सम्मेलन का उद्घाटन किया और नया प्रत्यर्पण पोर्टल (Extradition Portal) लॉन्च किया। इसका उद्देश्य भगोड़ों को भारत वापस लाने के प्रयासों में बेहतर समन्वय स्थापित करना और प्रक्रिया को तेज करना है। सम्मेलन में PRAHAAR को मजबूत करने तथा इसे पुलिस थाना स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।
आतंकवाद क्या है?
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- आतंकवाद का व्यापक अर्थ भय पैदा करने और राजनीतिक, वैचारिक या अन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित रूप से हिंसा या हिंसा की धमकी तथा डराने-धमकाने का उपयोग करना है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 113 के तहत आतंकवादी कृत्य में ऐसे कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुँचाना या विस्फोटक, आग्नेयास्त्र, खतरनाक पदार्थों या अन्य साधनों के माध्यम से लोगों में आतंक पैदा करना है।
- आतंकवाद का व्यापक अर्थ भय पैदा करने और राजनीतिक, वैचारिक या अन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित रूप से हिंसा या हिंसा की धमकी तथा डराने-धमकाने का उपयोग करना है।
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आतंकवाद और उग्रवाद (Insurgency) में अंतर:
उग्रवाद में सामान्यतः राज्य की सत्ता को चुनौती देने का एक संगठित प्रयास शामिल होता है, जिसमें अक्सर क्षेत्रीय या राजनीतिक उद्देश्य होते हैं। इसके विपरीत, आतंकवाद में मुख्य रूप से हिंसा और भय को दबाव या मजबूरी पैदा करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
PRAHAAR: भारत का आतंकवाद-रोधी ढाँचा
भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति (PRAHAAR) को गृह मंत्रालय द्वारा फरवरी 2026 में जारी किया गया था। यह रणनीति संपूर्ण सरकार (Whole-of-Government) और संपूर्ण समाज (Whole-of-Society) के दृष्टिकोण को अपनाती है तथा एक सक्रिय और खुफिया-आधारित ढाँचा प्रदान करती है।
PRAHAAR के सात स्तंभ:
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- रोकथाम (Prevention) – आतंकवादी हमलों को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- प्रतिक्रिया (Response) – आतंकवादी घटनाओं के प्रति त्वरित और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना।
- आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण (Aggregating Internal Capacities) – विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- मानवाधिकार और कानून का शासन (Human Rights & Rule of Law) – कानून के अनुरूप आतंकवाद-रोधी कार्रवाई सुनिश्चित करना।
- अनुकूल परिस्थितियों को कम करना (Attenuating Conditions) – कट्टरपंथीकरण तथा आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को संबोधित करना।
- अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ समन्वय (Aligning International Efforts) – वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूत करना।
- पुनर्प्राप्ति और लचीलापन (Recovery & Resilience) – संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण के माध्यम से समाज की आतंकवाद से निपटने और उससे उबरने की क्षमता को मजबूत करना।
- रोकथाम (Prevention) – आतंकवादी हमलों को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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नया प्रत्यर्पण पोर्टल:
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- नए प्रत्यर्पण पोर्टल का उद्देश्य विदेशी देशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में समन्वय बेहतर करना और प्रक्रिया को तेज करना है।
- सरकार ने राज्य पुलिस बलों से केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए समर्पित टीमें गठित करने का भी आह्वान किया है।
- सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया।
- नए प्रत्यर्पण पोर्टल का उद्देश्य विदेशी देशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में समन्वय बेहतर करना और प्रक्रिया को तेज करना है।
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संस्थागत एवं कानूनी ढाँचा:
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- भारत के आतंकवाद-रोधी ढाँचे में कई प्रमुख संस्थाएँ और एजेंसियाँ शामिल हैं, जैसे:
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)
- मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC)
- राज्य पुलिस/आतंकवाद-रोधी दस्ता (ATS)
- गृह मंत्रालय का आतंकवाद-रोध एवं कट्टरपंथ-रोध प्रभाग
- आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने वाली विभिन्न व्यवस्थाएँ
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)
- आतंकवाद से निपटने के लिए प्रमुख कानूनों में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), NIA अधिनियम, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) शामिल हैं।
- भारत के आतंकवाद-रोधी ढाँचे में कई प्रमुख संस्थाएँ और एजेंसियाँ शामिल हैं, जैसे:
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उभरती चुनौतियाँ:
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- भारत के सामने आतंकवाद से संबंधित कई नई चुनौतियाँ उभर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सीमा-पार आतंकवाद
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टरपंथीकरण
- एन्क्रिप्टेड संचार
- डार्क वेब से जुड़ी गतिविधियाँ
- क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आतंकवाद का वित्तपोषण
- संभावित CBRN (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु) खतरों
- सीमा-पार आतंकवाद
- गृह मंत्रालय की रणनीति में प्रौद्योगिकी के उपयोग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राज्यों की आतंकवाद-रोधी इकाइयों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
- भारत के सामने आतंकवाद से संबंधित कई नई चुनौतियाँ उभर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
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आगे की राह:
PRAHAAR को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना, राज्य ATS की क्षमताओं को मजबूत करना, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना, अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग और तकनीक-आधारित जाँच को मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया (Due Process) का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
