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Blog / 17 Feb 2026

प्रधानमंत्री राहत योजना

सन्दर्भ :

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार) योजना शुरू की है। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर और नकदरहित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना है।

योजना के विषय में:

प्रधानमंत्री राहत एक राष्ट्रीय नकदरहित आपातकालीन उपचार कार्यक्रम है, जो सुनिश्चित करता है कि पीड़ितों को बिना किसी आर्थिक बोझ के तुरंत इलाज मिले। पात्र मरीज दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का नकदरहित उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री राहत योजना का महत्व:

      • भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें कई मौतें समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण होती हैं। अध्ययनों के अनुसार, यदि दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे  जिसे स्वर्णिम घंटा कहा जाता है,के भीतर उपचार मिल जाए, तो लगभग 50 प्रतिशत मौतें रोकी जा सकती हैं।
      • यह योजना त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और उपचार सुनिश्चित करके इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है:
      • त्वरित और नकदरहित उपचार से रोकी जा सकने वाली मौतों में कमी आती है।
      • विभिन्न एजेंसियों, पुलिस और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करती है।
      • पीड़ितों और उनके परिवारों को तत्काल चिकित्सा खर्च से राहत देकर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।

PM RAHAT Scheme

प्रधानमंत्री राहत योजना की प्रमुख विशेषताएँ:

      • नकदरहित उपचार की गारंटी
        • दुर्घटना के बाद 7 दिनों तक प्रत्येक पीड़ित को ₹1.5 लाख तक का नकदरहित इलाज प्रदान किया जाता है।
      • स्वर्णिम घंटा पर विशेष ध्यान
        • आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली और 112 सहायता सेवा के साथ समन्वय, जिससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस और अस्पतालों के बीच त्वरित सहयोग सुनिश्चित होता है।
      • स्थिरीकरण उपचार
        • योजना के अंतर्गत 'स्थिरीकरण देखभाल' (Stabilization Care) को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि मुख्य उपचार से पूर्व पीड़ित की चिकित्सीय स्थिति को सुरक्षित किया जा सके। इसके तहत स्थिति की गंभीरता के आधार पर दो समय-सीमाएं निर्धारित हैं- गैर-गंभीर मामलों हेतु 24 घंटे तथा जीवन-संकट (Critical) मामलों हेतु 48 घंटे, जिससे मृत्यु दर को न्यूनतम किया जा सके।
      • डिजिटल एकीकरण एवं निगरानी
        • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणालियों के माध्यम से दुर्घटना रिपोर्टिंग, पुलिस सत्यापन, अस्पताल में भर्ती, उपचार, दावों और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को जोड़ा जाता है।
      • पुलिस प्रमाणीकरण
        • पुलिस 24 घंटे (सामान्य मामलों में) या 48 घंटे (गंभीर मामलों में) के भीतर दुर्घटना विवरण की पुष्टि करती है, जिससे जवाबदेही और उपचार की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
      • वित्तपोषण एवं प्रतिपूर्ति: यह मोटर वाहन दुर्घटना कोष के माध्यम से संचालित है-
        • बीमित मामलों का भुगतान बीमा कंपनियाँ करती हैं।
        • बिना बीमा या अज्ञात वाहन से हुई दुर्घटनाओं का खर्च सरकार वहन करती है।
        • दावों का निपटारा 10 दिनों के भीतर किया जाता है।
      • शिकायत निवारण
        • जिला सड़क सुरक्षा समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं, शिकायतों का समाधान और योजना के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष:

प्रधानमंत्री राहत योजना तकनीक, आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य प्रशासन के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ₹1.5 लाख तक का नकदरहित उपचार, स्वर्णिम घंटा पर जोर और समन्वित व्यवस्था के माध्यम से यह योजना पूरे भारत में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।