संदर्भ:
हाल ही में भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ है। यह पहल सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और सुदृढ़ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण के उद्देश्य से स्थापित एक रणनीतिक साझेदारी है।
पैक्स सिलिका के बारे में:
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- पैक्स सिलिका संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में प्रारंभ की गई एक रणनीतिक पहल है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों तथा लॉजिस्टिक्स जैसी आधारभूत और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षित, सुदृढ़ और नवाचार-आधारित वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का विकास करना है।
- यह पहल तथाकथित “अनिवार्य निर्भरता” को कम करने का प्रयास करती है, विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहाँ किसी एक देश या सीमित स्रोतों (जैसे चीन) पर अत्यधिक निर्भरता बनी रहती है। इसके साथ ही, यह भरोसेमंद और समान विचारधारा वाले साझेदार देशों के बीच प्रौद्योगिकी आपूर्ति नेटवर्क के विविधीकरण और सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल देती है।
- इस पहल का नाम ‘पैक्स’ (अर्थात् शांति और स्थिरता) तथा ‘सिलिका’ (जो सिलिकॉन चिप्स का मूलभूत पदार्थ है) शब्दों के संयोजन से लिया गया है, जो इसके व्यापक रणनीतिक और तकनीकी उद्देश्य को दर्शाता है।
- पैक्स सिलिका संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में प्रारंभ की गई एक रणनीतिक पहल है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों तथा लॉजिस्टिक्स जैसी आधारभूत और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षित, सुदृढ़ और नवाचार-आधारित वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का विकास करना है।
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भू-राजनीतिक संदर्भ:
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- पैक्स सिलिका, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोगी एवं समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावशाली उत्पादक देशों, विशेष रूप से चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने से संबंधित संयुक्त राज्य अमेरिका की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण अंग है।
- इस पहल में भाग लेने वाले देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात तथा ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। भारत को इस पहल में आमंत्रित किया जाना वैश्विक प्रौद्योगिकी शासन ढाँचों में उसकी बढ़ती और गहन भागीदारी को दर्शाता है तथा यह संकेत करता है कि भारत भरोसेमंद, सुदृढ़ और विविधीकृत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण में एक उभरती हुई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- पैक्स सिलिका, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोगी एवं समान विचारधारा वाले देशों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने तथा प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावशाली उत्पादक देशों, विशेष रूप से चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने से संबंधित संयुक्त राज्य अमेरिका की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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भारत के लिए प्रभाव:
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- प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन: पैक्स सिलिका पहल में भारत की भागीदारी से सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मंचों, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण तथा उन्नत आपूर्ति-शृंखला अवसंरचना में निवेश को नई गति मिल सकती है। इसके माध्यम से भारत की घरेलू तकनीकी क्षमताओं को उभरती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में भी सहायता प्राप्त होगी।
- रणनीतिक विविधीकरण: इस पहल से भारत की भू-राजनीतिक साझेदारियों का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। इससे संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अन्य समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग को गहराई मिलेगी, जबकि यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के अनुरूप भी बना रहेगा।
- आर्थिक एकीकरण और नवाचार को बल: यह पहल भारत को उच्च-मूल्य वाली वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रणालियों से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने में सहायक हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति शृंखलाओं की सुदृढ़ता बढ़ेगी तथा भारत नवाचार और उन्नत तकनीकी विकास के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मज़बूत कर सकेगा।
- प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन: पैक्स सिलिका पहल में भारत की भागीदारी से सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मंचों, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण तथा उन्नत आपूर्ति-शृंखला अवसंरचना में निवेश को नई गति मिल सकती है। इसके माध्यम से भारत की घरेलू तकनीकी क्षमताओं को उभरती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में भी सहायता प्राप्त होगी।
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निष्कर्ष:
पैक्स सिलिका पहल में भारत को दिया गया निमंत्रण वैश्विक प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण आपूर्ति-शृंखला व्यवस्था में उसकी स्थिति का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समर्थन है। यह भारत की उस क्षमता में वैश्विक विश्वास को दर्शाता है, जिसके माध्यम से वह सुरक्षित और विविध प्रौद्योगिकी नेटवर्क में योगदान दे सकता है, साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को भी आगे बढ़ा सकता है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है, भारत की भूमिका एक सहयोगी भागीदार और एक संप्रभु तकनीकी शक्ति, दोनों रूपों में आने वाले समय में और अधिक विस्तृत होती जाएगी।

